
क्या स्कूल में अनुशासन बनाए रखने के लिए शिक्षक द्वारा छात्र को छड़ी से मारना अपराध की श्रेणी में आता है? इस गंभीर कानूनी सवाल पर केरल हाई कोर्ट ने एक बड़ा और स्पष्ट फैसला सुनाया है, अदालत ने कहा कि यदि कोई शिक्षक छात्र के व्यवहार में सुधार और अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘नेक नीयत’ (Good Faith) से छड़ी का उपयोग करता है, तो इसे आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा।
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छड़ी ‘खतरनाक हथियार’ नहीं: कोर्ट
न्यायमूर्ति सी. प्रदीप कुमार की एकल पीठ ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 के तहत दर्ज एक मामले को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की, अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुशासन सिखाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली छड़ी को कानून की नजर में ‘खतरनाक हथियार’ नहीं माना जा सकता।
फैसले की बड़ी बातें
- कोर्ट ने माना कि जब माता-पिता अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं, तो वे परोक्ष रूप से शिक्षक को यह अधिकार देते हैं कि वे बच्चे के चरित्र निर्माण और सुधार के लिए उचित कदम उठाएं।
- अदालत ने जोर देकर कहा कि सजा का उद्देश्य छात्र को शारीरिक चोट पहुँचाना नहीं, बल्कि उसे एक बेहतर नागरिक बनाना होना चाहिए। यदि शिक्षक का इरादा नेक है और बल का प्रयोग न्यूनतम (Minimal Force) है, तो उन पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
- यह फैसला उन शिक्षकों के लिए बड़ी राहत है जो छोटी-मोटी अनुशासनात्मक कार्रवाई के कारण जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की धारा 75 या अन्य आपराधिक धाराओं के तहत कानूनी कार्यवाही का सामना करते हैं।
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कब होगी कानूनी कार्रवाई?
अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यह सुरक्षा ‘पूर्ण’ नहीं है, यदि शिक्षक का व्यवहार क्रूर, दुर्भावनापूर्ण (Malafide) है या यदि छात्र को गंभीर चोट पहुँचती है, तो शिक्षक कानूनी कार्रवाई से नहीं बच पाएंगे, शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत अभी भी किसी भी तरह के शारीरिक दंड पर प्रतिबंध है, लेकिन आपराधिक अदालतों में अब ‘सुधार के उद्देश्य’ को प्राथमिकता दी जाएगी।















