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चाय से भी सस्ता पेट्रोल! इस देश में मात्र ₹2 लीटर मिल रहा तेल, टॉप-10 की लिस्ट देख पकड़ लेंगे माथा

भारत में 100 रुपये लगते हैं एक लीटर पर, लेकिन लीबिया-ईरान जैसे देशों में चाय के दाम में 5 लीटर भर लो। ये राज जानकर हैरान हो जाओगे। क्यों सस्ता वहां, भारत महंगा? पूरी लिस्ट देखो, आंखें फटी की फटी रह जाएंगी!

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भारत में हर बार पेट्रोल पंप पर जेब ढीली करने का दर्द आम है, जहां एक लीटर ईंधन के लिए 90 से 100 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। लेकिन दुनिया के कुछ कोने में हालात बिल्कुल उलट हैं। वहां पेट्रोल की कीमत एक कप चाय से भी कम है। लीबिया जैसे देश में तो मात्र 2 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। मतलब, 10-15 रुपये की चाय के दाम में 5 लीटर तक टैंक भर ली जा सकती है। ईरान और वेनेजुएला जैसे राष्ट्र भी इस दौड़ में आगे हैं। आइए जानें इस आश्चर्यजनक अंतर की पूरी कहानी।

चाय से भी सस्ता पेट्रोल! इस देश में मात्र ₹2 लीटर मिल रहा तेल, टॉप-10 की लिस्ट देख पकड़ लेंगे माथा

सबसे सस्ता ईंधन कहां-कहां?

उत्तर अफ्रीका का लीबिया इस मामले में अव्वल है। यहां प्रति लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 2.15 रुपये है। देश के विशाल तेल भंडार के दम पर सरकार आम लोगों को भारी सब्सिडी देती है। राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद ईंधन सस्ता रखा जाता है, ताकि जनता का गुस्सा शांत रहे। दूसरे नंबर पर ईरान है, जहां 2.59 रुपये में पेट्रोल उपलब्ध है। वैश्विक प्रतिबंधों का सामना कर रहे इस देश में तेल संसाधनों से घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं। तीसरे स्थान पर वेनेजुएला आता है, यहां भाव लगभग 2.40 रुपये प्रति लीटर। आर्थिक संकट के दौर में भी तेल निर्यात पर निर्भर यह राष्ट्र ईंधन को नियंत्रित दामों पर बेचता है।

टॉप-10 की पूरी सूची

दुनिया के सस्ते पेट्रोल वाले देशों में ज्यादातर तेल उत्पादक राष्ट्र ही शामिल हैं। चौथे से दसवें स्थान पर कतर, सऊदी अरब, कुवैत, अल्जीरिया जैसे खाड़ी और अफ्रीकी देश हैं। इनमें कीमतें 30 से 50 रुपये के दायरे में रहती हैं। उदाहरणस्वरूप, कतर में प्राकृतिक संसाधनों की भरमार से ईंधन सस्ता है। ये सभी देश अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा तेल बेचकर कमाते हैं, इसलिए घरेलू बाजार सब्सिडी वाला रखते हैं। विपरीत छोर पर हांगकांग जैसे आयातक क्षेत्र 340 रुपये लीटर तक चार्ज करते हैं, जो दुनिया का सबसे महंगा है।

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भारत क्यों पिछड़ रहा?

देश में सबसे कम भाव पोर्ट ब्लेयर जैसे इलाकों में 82 रुपये के आसपास है, लेकिन दिल्ली-मुंबई में 100 रुपये आसानी से पार हो जाते हैं। मार्च 2024 के बाद कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। मुख्य वजहें साफ हैं। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल बाहर से लाता है। वैश्विक क्रूड कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल घूम रही हैं, रुपये की कमजोरी इसमें इजाफा करती है। ऊपर से केंद्र की एक्साइज ड्यूटी और राज्यों का वैट मिलकर बोझ दोगुना कर देते हैं। इथेनॉल मिश्रण और नवीकरणीय ऊर्जा पर काम चल रहा है, लेकिन पूर्ण राहत दूर है। पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी पेट्रोल भारत से सस्ता है।

इसके पीछे क्या राज?

तेल उत्पादक देश वैश्विक बाजार को कंट्रोल करते हैं। वे उत्पादन घटाकर-बढ़ाकर दाम तय करते हैं, लेकिन घर में सब्सिडी से जनता खुश रखते हैं। लीबिया-ईरान जैसे राष्ट्रों में यह राजनीतिक स्थिरता का हथियार है। भारत जैसे उभरते देश आयात पर निर्भर हैं, इसलिए उतार-चढ़ाव झेलते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि तेल दाम गिरने पर कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन लीबिया जैसी सस्ताई संभव नहीं। ऊर्जा सुरक्षा के लिए हमें स्वदेशी विकल्प मजबूत करने होंगे।

यह लिस्ट सोचने पर विवश करती है। क्या भारत सब्सिडी बढ़ा सकता है? फिलहाल चाय की चुस्की लें और ईंधन का इंतजार करें। आने वाले दिनों में वैश्विक बदलाव क्या लाते हैं, देखना दिलचस्प होगा।

Author
info@divcomkonkan.in

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