जब परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य अचानक चला जाता है, तो पूरा घर उजड़ जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना गरीब परिवारों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभरी है। इस योजना के तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार को मुखिया की मौत पर 30 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता मिलती है। यह मदद परिवार को आर्थिक रूप से पटरी पर लाने का काम करती है।

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योजना का उद्देश्य और कवरेज
यह केंद्रीय प्रायोजित योजना मुख्य रूप से उन परिवारों को निशाना बनाती है जो बीपीएल सूची में दर्ज हैं। अगर परिवार का प्रमुख कमाने वाला सदस्य 18 से 60 वर्ष की आयु में किसी भी कारण से मर जाता है, चाहे प्राकृतिक कारणों से हो या दुर्घटना, तो तुरंत आर्थिक सहायता का प्रावधान है। योजना का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाना है, ताकि विधवा या अनाथ बच्चे सड़क पर न आएं। ग्रामीण इलाकों में मजदूरी करने वाले परिवारों के लिए यह खासतौर पर उपयोगी साबित हो रही है। एक परिवार जीवन भर में सिर्फ एक बार ही इस लाभ का हकदार होता है।
पात्रता के मुख्य नियम
पात्र होने के लिए परिवार का नाम सरकारी बीपीएल सूची में होना जरूरी है। आय सीमा ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना 56 हजार रुपये तक और शहरी इलाकों में 46 हजार तक तय है। मृतक का नाम राशन कार्ड में मुखिया के रूप में दर्ज होना चाहिए। उत्तराधिकारी में पत्नी, पति या सबसे बड़ा वयस्क सदस्य को प्राथमिकता मिलती है। अगर परिवार पहले ही इस योजना से लाभ ले चुका है, तो दोबारा दावा नहीं किया जा सकता। राज्य स्तर पर थोड़े बदलाव हो सकते हैं, लेकिन मूल नियम एकसमान हैं।
जरूरी कागजात और तैयारी
आवेदन से पहले दस्तावेज इकट्ठा कर लें। सबसे महत्वपूर्ण है मृत्यु प्रमाण पत्र, जो अस्पताल या नगर निगम से जारी होता है। इसके अलावा आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक की कॉपी, आय प्रमाण पत्र और परिवार की फोटो लगानी पड़ती है। अगर मौत दुर्घटना में हुई है, तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जोड़ें। ये कागजात पूरे और सही होने चाहिए, वरना आवेदन लौट आ सकता है। डिजिटल तरीके से आधार को बैंक से लिंक करवाना भी अनिवार्य है।
आवेदन कैसे करें?
मृत्यु की खबर मिलते ही एक साल के अंदर आवेदन करना पड़ता है, कुछ जगहों पर एक महीने में। ऑफलाइन तरीके से ग्राम पंचायत सचिव, ब्लॉक कार्यालय, तहसील या जिला सामाजिक कल्याण विभाग में फॉर्म जमा करें। फॉर्म मुफ्त उपलब्ध होता है। ऑनलाइन विकल्प में राज्य का सामाजिक सुरक्षा पोर्टल या सीएससी केंद्र का सहारा लें। आवेदन के बाद स्थानीय अधिकारी सत्यापन करते हैं, बैंक खाता जांचा जाता है। स्वीकृति मिलने पर पीएफएमएस सिस्टम से सीधे खाते में पैसे आ जाते हैं। प्रक्रिया में 10 से 75 दिन लग सकते हैं।
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चुनौतियां और समाधान के उपाय
कई बार बैंक विवरण गलत होने या आधार लिंकिंग की समस्या से पैसा अटक जाता है। राशन कार्ड में नाम मेल न खाने पर भी अस्वीकृति हो जाती है। ऐसे में स्थानीय कार्यालय से संपर्क कर तुरंत सुधार करवाएं। पंजाब में लुधियाना जैसे जिलों के निवासियों को जिला कल्याण विभाग से ताजा अपडेट लेना चाहिए। जागरूकता की कमी बड़ी बाधा है, इसलिए गांव-गांव में शिविर लगाने की जरूरत है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भ्रष्टाचार रोका है, लेकिन इंटरनेट न होने पर ऑफलाइन ही भरोसा करें।
असर और भविष्य की संभावनाएं
यह योजना लाखों परिवारों को नई जिंदगी दे चुकी है। उत्तर भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूर परिवारों ने इसे सराहा है। सरकार डीबीटी को और मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। पात्र लोगों को देर न करें, तुरंत आवेदन करें। स्थानीय स्तर पर मदद के लिए तहसीलदार या पंचायत प्रतिनिधियों से बात करें। यह छोटी लगने वाली सहायता परिवार के भविष्य को बदल सकती है।















