
भारत अपनी भौगोलिक विविधताओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जहाँ उत्तर में उत्तर-पूर्वी हिमालय की गोद में कंचनजंगा (8,586 मीटर) देश के सबसे ऊंचे शिखर के रूप में गर्व से खड़ा है, वहीं दक्षिण में केरल का कुट्टनाड क्षेत्र एक ऐसा भौगोलिक अजूबा है जिसे ‘भारत का नीदरलैंड्स’ कहा जाता है।
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समुद्र तल से नीचे की अनोखी दुनिया
केरल के अलाप्पुझा, कोट्टायम और पतनमथिट्टा जिलों में फैला कुट्टनाड भारत का सबसे निचला बिंदु है, यह क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 2.2 मीटर (7.2 फीट) नीचे स्थित है। यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह दुनिया के उन गिने-चुने स्थानों में से एक है जहाँ खेती समुद्र तल से नीचे की जाती है।
‘भारत का नीदरलैंड्स’ और पोल्डर तकनीक
कुट्टनाड को ‘भारत का नीदरलैंड्स’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ डच तकनीक (Polder System) की तर्ज पर खेती की जाती है।
- भूमि सुधार: किसानों ने बैकवाटर्स और समुद्र के पानी को रोककर खेती के लिए जमीन तैयार की है।
- डाइक्स और बंड्स: यहाँ मिट्टी, नारियल के छिलके और मिट्टी की मोटी दीवारों (बंड्स या डाइक्स) के जरिए पानी को खेतों से बाहर रखा जाता है।
- चावल का कटोरा: अपनी प्रचुर पैदावार के कारण इसे ‘केरल का धान का कटोरा’ (Rice Bowl of Kerala) भी कहा जाता है।
वैश्विक पहचान और विरासत
कुट्टनाड की इस अनूठी कृषि प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इसे ‘वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली’ (GIAHS) का दर्जा दिया है, यह सम्मान उन पारंपरिक कृषि प्रणालियों को दिया जाता है जो जैव विविधता और स्थानीय समुदायों के बीच एक गहरा तालमेल प्रदर्शित करती हैं।
पर्यटन का प्रमुख केंद्र
अपनी प्राकृतिक सुंदरता और बैकवाटर्स के कारण कुट्टनाड पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है, यहाँ के केट्टुवल्लम (पारंपरिक नौकाएं) अब आधुनिक हाउसबोट्स में तब्दील हो चुके हैं, जो स्थानीय जीवन और खेती की झलक देखने का सबसे अच्छा माध्यम हैं।















