
भारतीय रेलवे की दुनिया में सफर करते हुए कई बार खिड़की से झांकते ही चेहरे पर मुस्कान तैर जाती है। वजह? वे अनोखे स्टेशन नाम, जो हिंदी या स्थानीय बोलचाल में दोहरा अर्थ लिए हुए लगते हैं। व्लॉगर्स और यात्रियों के वीडियो में ये नाम वायरल हो जाते हैं, सोशल मीडिया पर मीम्स बनते हैं। लेकिन ये नाम महज मजाक नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विविधता का आईना हैं।
Table of Contents
क्यों वायरल होते हैं ये नाम?
भारत का रेल नेटवर्क दुनिया का चौथा सबसे बड़ा है, जिसमें 7,300 से ज्यादा स्टेशन हैं। ब्रिटिश काल से चले आ रहे कई नाम स्थानीय गावों, जानवरों या रिश्तों पर आधारित हैं। उदाहरणस्वरूप, ‘काला बकरा’ सुनकर लगता है कोई मजाक हो, लेकिन ये पंजाब के जालंधर जिले का वास्तविक स्टेशन है (कोड: KKL)। वहीं राजस्थान का ‘साली’ जोधपुर के पास है, जो भाभी का संकेत देता है। टिकट काउंटर पर ‘साली जाने वाली टिकट’ मांगना तो शर्मिंदगी का सबब बन जाता है।
ये नाम बदलने की मांग कभी-कभी उठती है, लेकिन रेलवे इन्हें यथावत रखता है। कारण साफ है- नाम बदलने से यात्रियों में भ्रम फैलेगा, खासकर बुजुर्गों या ग्रामीणों के लिए। रेल मंत्रालय का कहना है कि ये ऐतिहासिक पहचान हैं। सोशल मीडिया पर 2026 में भी ये ट्रेंड कर रहे हैं, जैसे हालिया न्यूज18 की रिपोर्ट में 7 सबसे मजेदार नाम गिनाए गए।
टॉप मजेदार स्टेशनों की सूची
देशभर में बिखरे ये स्टेशन क्षेत्रीय भाषाओं की मिठास दिखाते हैं। यहां कुछ प्रमुख:
| स्टेशन का नाम | राज्य/स्थान | क्यों मजेदार? | कोड/ट्रेनें |
|---|---|---|---|
| काला बकरा | पंजाब (जालंधर) | ‘काली बकरी का नर’ जैसा लगता है | KKL |
| साली | राजस्थान (जोधपुर) | भाभी का संकेत, बोलने में हिचकिचाहट | – |
| नाना | राजस्थान (पाली/सिरोही) | दादाजी जैसा, childish लगता है | – |
| दीवाना | हरियाणा (पानीपत) | ‘पागल’ का मतलब, मजे लेते हैं यात्री | – |
| बिल्ली | उत्तर प्रदेश (सोनभद्र) | बिल्ली जंक्शन, जानवरों का हास्य | – |
| भैंसा | उत्तर प्रदेश/तेलंगाना | भैंस से जुड़ा, ग्रामीण मजा | – |
| ओधनिया चाचा | राजस्थान (पोखरण) | चाचा का पूरा नाम, परिवारिक हंसी | OCH |
| दारू | झारखंड (हजारीबाग) | शराब जैसा लगता, लेकिन गांव का नाम | – |
| टट्टी खाना | तेलंगाना (रंगारेड्डी) | नाम से ही शरम, छोटा सा शहर | – |
ये स्टेशन छोटे हैं, जहां 2-16 ट्रेनें रुकती हैं। विदेशी पर्यटक इन्हें ‘यूनिक इंडिया’ कहकर वीडियो बनाते हैं।
सांस्कृतिक महत्व और चुनौतियां
ये नाम हमारी भाषाई विविधता दर्शाते हैं- राजस्थानी, हिंदी, तेलुगु मिश्रण। लेकिन आधुनिक संदर्भ में दोहरा अर्थ समस्या बन जाता है। रेलवे ने कभी नाम न बदले, क्योंकि इससे टिकट बुकिंग ऐप्स में कन्फ्यूजन होगा। 2026 में भी सोशल मीडिया पर रील्स वायरल हैं, जैसे ‘ट्रेन से दिखे काला बकरा’। पर्यटक इन्हें एक्सप्लोर करने का बहाना बनाते हैं।
कई स्टेशन जैसे ‘सुअर’ (उत्तर प्रदेश), ‘कुत्ता’ (कर्नाटक) या ‘बीबीनगर’ (हैदराबाद) भी चर्चा में हैं। ये साबित करते हैं कि भारत की यात्रा सिर्फ मंजिल नहीं, रास्ते की कहानियां भी हैं। अगली ट्रिप में इन नामों पर नजर रखें- हंसी तो बिल्कुल गारंटीड!















