ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को बड़ी राहत देने वाली केंद्र सरकार की फ्री सोलर चूल्हा योजना ने जोर पकड़ लिया है। गैस सिलेंडरों के बिल से परेशान महिलाओं के लिए यह वरदान साबित हो रही है। सूरज की रोशनी से चलने वाले इन चूल्हों से न केवल खाना पकाना सस्ता होगा, बल्कि घरों में धुआं भी कम होगा। प्री-बुकिंग प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिससे लाखों परिवार उत्साहित दिख रहे हैं।

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योजना का लक्ष्य और महत्व
यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है। पारंपरिक चूल्हों से निकलने वाले धुएं से होने वाली सांस की बीमारियों पर लगाम लगेगी। एक चूल्हा साल भर में कई गैस सिलेंडर बचाने की क्षमता रखता है। सरकार का इरादा 2026 तक करोड़ों घरों तक इसे पहुंचाना है। पायलट प्रोजेक्ट्स में परिवारों ने ईंधन खर्च में 40 प्रतिशत तक कमी महसूस की। महिलाओं को समय मिलेगा, जो शिक्षा या छोटे कामों में लग सकेंगी। पर्यावरण को फायदा मिलेगा, क्योंकि कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
पात्रता के सरल नियम
किसी भी भारतीय महिला या परिवार के लिए आवेदन का रास्ता खुला है। बीपीएल सूची या राशन कार्ड होना फायदेमंद है। घर की छत पर सोलर पैनल लगाने लायक जगह जरूरी है। आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और बिजली कनेक्शन अनिवार्य हैं। आय सीमा गरीबी रेखा से जुड़ी रखी गई है, ताकि जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिले। शहरी झुग्गीवासी भी लाभ उठा सकते हैं। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों पर केंद्रित है, जहां लकड़ी जलाने की समस्या आम है।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
ऑनलाइन तरीका सबसे तेज है। सरकारी पोर्टल पर जाकर फॉर्म भरें। नाम, पता, आधार विवरण दर्ज करें। जरूरी कागजात जैसे राशन कार्ड और बिजली बिल स्कैन करके अपलोड करें। मोबाइल पर आने वाले ओटीपी से पुष्टि करें। आवेदन स्वीकृत होने पर 15 से 30 दिनों में चूल्हा घर पहुंच जाएगा। मूल्य 15 से 25 हजार रुपये का होने पर भी यह पूरी तरह निःशुल्क है। ऑफलाइन विकल्प के लिए नजदीकी ग्राम पंचायत या तेल कंपनी के कार्यालय जाएं। जागरूकता अभियान के तहत मोबाइल वैन भी घूम रही हैं।
चूल्हे की खासियतें
ये आधुनिक सोलर चूल्हे धूप में चार्ज होकर रात में भी काम करते हैं। बिना धुएं के रोटी, सब्जी या दाल बनाएं। थर्मल स्टोरेज तकनीक से ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहती है। मजबूत डिजाइन से 10 साल तक चलने की गारंटी है। एक बार लगाने पर रखरखाव न्यूनतम रहता है। गर्मियों में तो यह पूरे परिवार का पेट भर सकता है। उपयोगकर्ताओं का अनुभव सकारात्मक है, जो इसे गैस का बेहतरीन विकल्प बता रहे हैं।
चुनौतियां और आगे की राह
दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट न होने से परेशानी हो सकती है। सरकार कॉमन सर्विस सेंटर्स की मदद ले रही है। जागरूकता बढ़ाने के लिए रेडियो और सोशल मीडिया का सहारा लिया जा रहा। पंजाब जैसे राज्यों में जल्द बड़े पैमाने पर वितरण शुरू होगा। लुधियाना में सैकड़ों महिलाएं पहले ही बुकिंग करा चुकी हैं। यह कदम ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अधिक जानकारी हेल्पलाइन से लें।
पिछले सालों की योजनाओं से प्रेरित होकर यह नई शुरुआत देश को हरा-भरा बनाने में योगदान देगी। महिलाओं का सशक्तिकरण और पर्यावरण सुरक्षा साथ-साथ चलेगी।















