पशुपालकों और छोटे किसानों के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की चारा कटाई मशीन सब्सिडी योजना एक बड़ा तोहफा साबित हो रही है। इस योजना से चारे की कटाई में लगने वाला समय, श्रम और पैसा आधे से भी कम हो जाएगा। 2026 में तेजी से लोकप्रिय हो रही यह स्कीम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सरकारी प्रयास है, खासकर पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।

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योजना की शुरुआत और उद्देश्य
सरकार ने कृषि मशीनीकरण उप-मिशन के तहत चारा कटाई मशीनों पर भारी सब्सिडी शुरू की है। इसका मकसद पशुपालकों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना है ताकि हरा-सूखा चारा बिना बर्बादी के बारीक कटाई हो सके। इससे पशुओं का पाचन बेहतर होता है, दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय दोगुनी होने की संभावना बनती है। लुधियाना जैसे पशुपालन हब में सैकड़ों किसान पहले ही लाभ ले चुके हैं। यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा है, जो छोटे स्तर के पशुपालकों को सशक्त बनाएगी।
सब्सिडी कितनी और किसे मिलेगी?
सामान्य किसानों को 40 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ मिलेगा, जबकि सीमांत किसान, एससी-एसटी वर्ग और महिलाओं को 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। अधिकतम सीमा 60,000 रुपये तक है। बाजार में 7,000 से 10,000 रुपये की मशीन पर 5,000 से 6,000 रुपये की सीधी बचत हो जाती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से पैसा बैंक खाते में पहुंचता है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश न्यूनतम रहती है। यह व्यवस्था किसानों को महंगे बाजार मूल्यों से राहत दिलाती है।
कौन बन सकता है पात्र?
भारतीय नागरिक जो अपनी जमीन पर पशुपालन करते हों और पहले इस योजना का लाभ न ले चुके हों, वे आवेदन कर सकते हैं। पीएम-किसान योजना के लाभार्थी या बीपीएल सूची में नाम वाले को प्राथमिकता मिलती है। एक वित्तीय वर्ष में केवल एक मशीन पर ही सब्सिडी मान्य है। दस्तावेजों में आधार कार्ड, बैंक पासबुक, जमाबंदी नकल, पशुधन प्रमाण-पत्र और फोटो जरूरी हैं। राज्यवार थोड़े बदलाव हो सकते हैं, लेकिन मूल पात्रता समान रहती है।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
आवेदन राज्य कृषि विभाग की वेबसाइट जैसे राज किसान पोर्टल या माई-स्कीम पोर्टल से शुरू करें। फॉर्म भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और सबमिट कर दें। सत्यापन के बाद स्वीकृति मिलने पर अधिकृत विक्रेता से मशीन खरीदें और बिल जमा करें। 15 से 30 दिनों में सब्सिडी खाते में आ जाती है। ई-मित्र केंद्र या जिला कृषि अधिकारी से भी मदद ली जा सकती है। जल्द आवेदन करें क्योंकि कोटा सीमित होता है।
उपलब्ध मशीनों के प्रकार
योजना में मैनुअल चारा कटर छोटे पशुपालकों के लिए बेस्ट हैं, जो कम कीमत में काम चला लेते हैं। इलेक्ट्रिक मॉडल 1-2 एचपी वाले बड़े खेतों के लिए उपयुक्त हैं, जबकि ट्रैक्टर माउंटेड मशीनें व्यावसायिक स्तर पर चारा तैयार करने में कारगर साबित होती हैं। ये सभी मशीनें चारे को एकसमान बारीक करती हैं, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य सुधरता है। किसान अपनी जरूरत के अनुसार चुनाव कर सकते हैं।
किसानों पर गहरा प्रभाव
इस योजना से श्रम खर्च 70 प्रतिशत तक कम हो गया है और दूध उत्पादन में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पंजाब के लुधियाना जैसे क्षेत्रों में पशुपालक अब स्वावलंबी बन रहे हैं। समय की बचत से वे अन्य आय स्रोतों पर ध्यान दे पा रहे हैं। सरकार का यह कदम ग्रामीण महिलाओं को भी सशक्त कर रहा है, जो अक्सर चारा कटाई का काम स्वयं करती हैं। कुल मिलाकर, यह पशुपालन क्रांति का आधार बनेगी।















