केंद्र सरकार ने तेजी से बन रहे नेशनल एक्सप्रेसवे पर सफर को और सस्ता बनाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अधूरे या आंशिक रूप से खुले एक्सप्रेसवे के चालू हिस्सों पर अब प्रीमियम टोल की जगह सामान्य राजमार्ग दरें लागू होंगी। यह नया प्रावधान 15 फरवरी 2026 से पूरे देश में अमल में आ गया है, जिससे रोजाना लाखों गाड़ियों के मालिकों को सीधी आर्थिक बचत मिल रही है।

लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोग अब निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के छोटे-छोटे पैच पर भी भारी टोल से बच सकेंगे। पहले पूर्ण विकसित एक्सप्रेसवे पर निर्बाध और तेज रफ्तार के बदले 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जाता था, लेकिन अधूरे प्रोजेक्ट्स पर भी यही व्यवस्था लागू होने से असंतोष बढ़ रहा था। अब खुले हिस्से पर सिर्फ बुनियादी राजमार्ग शुल्क ही वसूला जाएगा, जब तक पूरा एक्सप्रेसवे एक छोर से दूसरे छोर तक चालू न हो जाए।
Table of Contents
नियम में क्या बदला?
सरकार ने पुराने राजमार्ग शुल्क नियमों में संशोधन कर यह सुविधा शुरू की है। मुख्य बदलाव यह है कि एक्सप्रेसवे का कोई भी हिस्सा तब तक प्रीमियम श्रेणी में नहीं आएगा, जब तक वह पूरी तरह कार्यरत न हो या संशोधन की तारीख से एक साल बीत न जाए—जो भी पहले घटित हो। इससे यात्रियों को 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। मिसाल के तौर पर, दिल्ली से गुजरात या महाराष्ट्र जाने वाले रास्तों पर आंशिक रूप से खुले खंडों से गुजरने पर फास्टैग बैलेंस कम कटेगा।
यह कदम यात्रा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाएगा। पुराने राजमार्गों पर भीड़ कम होने से ईंधन खपत घटेगी, समय बचेगा और वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण भी नियंत्रित होगा। विशेष रूप से कमर्शियल वाहनों के लिए यह वरदान है, क्योंकि माल ढुलाई की लागत घटी तो उपभोक्ता वस्तुओं के दाम स्थिर रहेंगे।
कौन-कौन से वर्ग लाभान्वित?
सामान्य कार मालिकों से लेकर ट्रक चालकों तक सभी को फायदा पहुंचेगा। लंबे सफर पर प्रति यात्रा सैकड़ों रुपये की बचत संभव है। मान लीजिए 100 किलोमीटर के अधूरे एक्सप्रेसवे खंड पर पहले चार-पांच सौ रुपये लगते थे, अब तीन-चार सौ में काम चल जाएगा। पंजाब, हरियाणा या उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के निवासियों को प्रमुख एक्सप्रेसवे से जुड़े रूट्स पर तत्काल राहत महसूस हो रही है।
लॉजिस्टिक्स कंपनियां साल भर में करोड़ों रुपये बचा सकेंगी, जो अर्थव्यवस्था को गति देगा। छोटे व्यापारी जो नियमित रूप से अंतरराज्यीय यात्रा करते हैं, उनके लिए यह नीति जेब हल्की रखने का सुनहरा अवसर है। साथ ही, निर्माण कंपनियों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, क्योंकि सस्ते टोल से उपयोगकर्ता बढ़ेंगे और प्रोजेक्ट पूर्ण होने की प्रक्रिया तेज होगी।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
देश भर में सैकड़ों किलोमीटर एक्सप्रेसवे तेजी से बन रहे हैं, लेकिन निर्माण में देरी आम बात है। ऐसे में आधे-अधूरे रास्तों पर ऊंचा टोल लगना यात्रियों के लिए बोझ बन जाता था। सरकार ने इसे देखते हुए उपयोगकर्ता-अनुकूल नीति अपनाई है, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर का अधिकतम लाभ आम आदमी को मिले। आने वाले समय में 25 हजार किलोमीटर से ज्यादा नए एक्सप्रेसवे बनने हैं, और यह प्रावधान उनके आंशिक उपयोग को बढ़ावा देगा।
यात्रियों को सलाह है कि फास्टैग हमेशा अपडेट रखें और टोल प्लाजा पर नए नियमों की जानकारी लें। कुल मिलाकर यह फैसला सड़क यात्रा को सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।















