रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर सैलरीड कर्मचारी का सपना होता है। लेकिन एक बड़ा सवाल हमेशा खड़ा रहता है- पीएफ खाते से पूरी रकम एकमुश्त निकाल लें या मासिक पेंशन का इंतजार करें? हाल के बदलावों ने निकासी को आसान बना दिया है, फिर भी पेंशन का विकल्प लंबे समय की स्थिरता देता है। गलत फैसला लाखों रुपये की मासिक आय छीन सकता है।

ईपीएफ खाते में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान जमा होता है। यह राशि जरूरत पड़ने पर निकाली जा सकती है। दूसरी ओर, पेंशन स्कीम का हिस्सा रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करता है। दस साल की सेवा पूरी करने पर पचास साल की उम्र से पेंशन शुरू हो जाती है। नौकरी बदलने पर यूनिफाइड अकाउंट नंबर को ट्रांसफर करवाना जरूरी होता है, ताकि सारा योगदान जुड़ जाए।
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निकासी के सरल नए तरीके
पुराने नियमों में निकासी के लिए कई जटिल शर्तें थीं। अब इन्हें तीन मुख्य श्रेणियों में बांट दिया गया है- जरूरी खर्च, आवास संबंधी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां। बारह महीने की सेवा के बाद चिकित्सा, शिक्षा या विवाह जैसे खर्चों पर पूरी रकम निकाल सकते हैं। बेरोजगारी की स्थिति में पहले सत्तर पांच फीसदी तुरंत, और एक साल बाद बाकी रकम। अप्रैल से यूपीआई के जरिए निकासी और तेज होगी।
कंपनी बंद होने या लॉकआउट पर भी सत्तर पत्तर फीसदी निकासी की अनुमति है। शिक्षा के लिए दस बार और विवाह के लिए पांच बार तक आंशिक निकासी संभव है। लेकिन रिटायरमेंट कोष की सुरक्षा के लिए कम से कम पच्चीस फीसदी राशि खाते में रखनी पड़ती है। इससे बार-बार निकासी रोककर चक्रवृद्धि ब्याज का फायदा मिलता रहता है।
पेंशन क्यों है बेहतर विकल्प
पेंशन को कभी न छुएं, यही विशेषज्ञों की सलाह है। इससे जीवन भर मासिक आय मिलती रहती है। अट्ठावन साल से पहले कम राशि वाली पेंशन फॉर्म भरकर ले सकते हैं। पूर्ण निकासी रिटायरमेंट, स्थायी अक्षमता या देश छोड़ने पर ही संभव है। बेरोजगारी में भी पेंशन योग्यता बनी रहती है, बशर्ते छत्तीस महीने इंतजार करें। डिजिटल सेवाओं से अब किसी भी बैंक से पेंशन घर बैठे मिलेगी।
नए डिजिटल प्लेटफॉर्म से क्लेम सेटलमेंट तेज हो गया है। आधार से जुड़े सत्यापन और मोबाइल ऐप से ट्रैकिंग आसान है। नियोक्ता की देरी पर भी पेनल्टी कम हुई है। कर्मचारी अब ऑटो ट्रांसफर और पेपरलेस क्लेम का लाभ उठा सकते हैं।
हालिया बदलावों का असर
नए नियमों ने निकासी प्रक्रिया को पांच सरल भागों में बदल दिया। एक साल की न्यूनतम सेवा से सभी आंशिक निकासी खुल गई। यूपीआई निकासी और डोरस्टेप पेंशन सेवाएं लाखों को राहत देंगी। बेरोजगारी भत्ते में सुधार से लॉकडाउन जैसी स्थितियों में मदद मिलेगी।
कर्मचारियों को सलाह है कि यूएएन सक्रिय रखें और केवाईसी अपडेट करें। फॉर्म तीस एक, नाइनटीन और टेन सी-डी भरने से पहले नियम जांच लें। छोटी जरूरतों के लिए पीएफ इस्तेमाल करें, लेकिन भविष्य की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। इन बदलावों से सैलरीड वर्ग को लचीलापन मिला है, पर अनुशासन जरूरी है।















