
हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि जब वह रिटायर हो, तो उसके पास इतना बड़ा फंड हो कि बुढ़ापा ठाठ से कटे क्या आप जानते हैं कि आपकी सैलरी में से कटने वाला पीएफ (PF) ही आपको ₹5 करोड़ का मालिक बना सकता है? बस इसके लिए आपको EPF और VPF के बीच का फर्क समझना होगा और अपने निवेश में एक मामूली बदलाव करना होगा।
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EPF vs VPF: क्या है वो ‘मामूली’ अंतर?
ज्यादातर कर्मचारी केवल EPF (Employee Provident Fund) के भरोसे रहते हैं, जहाँ आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का अनिवार्य 12% हिस्सा कटता है। लेकिन करोड़पति बनने का असली राज VPF (Voluntary Provident Fund) में छिपा है।
- EPF (अनिवार्य): इसमें योगदान की सीमा तय (12%) है।
- VPF (स्वैच्छिक): यह EPF का ही विस्तार है यहाँ आप अपनी मर्जी से अपनी बेसिक सैलरी का 100% तक निवेश कर सकते हैं।
- ब्याज दर: दोनों पर समान ब्याज मिलता है वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने इसे 8.25% पर बरकरार रखा है।
₹5 करोड़ का फंड: कैलकुलेशन का गणित
अगर आप 25 साल की उम्र में नौकरी शुरू करते हैं और हर महीने ₹10,000 EPF में डालते हैं, तो 8.25% ब्याज की दर से 35 साल बाद आपके पास करीब ₹2.45 करोड़ होंगे।
लेकिन अगर आप इसी निवेश में VPF की सेटिंग जोड़ दें और अपना योगदान थोड़ा और बढ़ा दें, तो कंपाउंडिंग की ताकत से यह राशि ₹5 करोड़ के पार पहुँच सकती है।
VPF निवेश के बड़े फायदे (2026 अपडेट)
- शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर, इसमें आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
- आयकर की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है।
- ध्यान रहे, यदि EPF और VPF का कुल वार्षिक योगदान ₹2.5 लाख से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आएगा।
- इसके लिए अलग से खाता खोलने की जरूरत नहीं है। बस अपने कंपनी के HR को एक फॉर्म भरकर दें कि आप अपना योगदान बढ़ाना चाहते हैं।
यदि आप सुरक्षित भविष्य और करोड़ों का फंड चाहते हैं, तो केवल अनिवार्य पीएफ पर निर्भर न रहें आज ही अपने नियोक्ता (Employer) से संपर्क कर VPF का विकल्प चुनें और अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग को रफ्तार दें।















