
हाल के वक्त में इंजीनियरिंग की चमक फिर से लौट रही है, और बीटेक वालों के लिए नौकरी के अवसरों का दौर शुरू हो गया है। पिछले कुछ सालों में बेरोजगारी की बातें ज्यादा सुनने को मिलती थीं, लेकिन अब पासा पलट चुका है। 2026 में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, एआई और नई टेक्नोलॉजी की वजह से इंजीनियर्स की डिमांड बढ़ गई है, और सही स्किल्स वाले बच्चे शानदार सैलरी वाली नौकरियां पा रहे हैं।
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इंजीनियरिंग का क्रेज वापस आया है
कुछ साल पहले तक बीटेक के बाद बेरोजगारी का सवाल बहुत बड़ा था। कई कॉलेजों से निकलने वाले स्टूडेंट्स को अच्छी नौकरी नहीं मिल पा रही थी, और इंजीनियरिंग की तरफ धीरे-धीरे संदेह बढ़ गया था। लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है इंजीनियरों की रोजगार क्षमता (employability) धीरे-धीरे बढ़ रही है, और कंपनियां फिर से इंजीनियर्स को देखने लगी हैं। भारत के इंजीनियरिंग सेक्टर में आए इस उछाल के पीछे 2 बड़ी वजहें हैं — एक, डिजिटल इंडिया और एआई का जोर, और दूसरा, बीटेक के स्टूडेंट्स में स्किल्स की तलाश बढ़ना।
CS और IT में आई नौकरियों की बहार
डिजिटल युग में कंप्यूटर साइंस और आईटी ब्रांचेज ने अपनी जगह फिर से मजबूत की है। आज बैंक से लेकर ई-कॉमर्स, हॉस्पिटलिटी से लेकर लॉजिस्टिक्स तक हर जगह सॉफ्टवेयर की जरूरत है। इसी वजह से कंप्यूटर साइंस और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के बीटेक स्टूडेंट्स की डिमांड बहुत ज्यादा है।
कंपनियां अब सिर्फ डिग्री नहीं देखतीं, बल्कि कोडिंग स्किल्स, डेटा हैंडलिंग और प्रोजेक्ट्स का अनुभव देखती हैं। जैसे एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी टेक्नोलॉजीज में माहिर स्टूडेंट्स को तो खास तरजीह दी जा रही है।
एआई और ऑटोमेशन का जादू
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन ने इंजीनियरिंग के पुराने फॉर्मूले को बदल दिया है। जो बीटेक स्टूडेंट्स एआई टूल्स, मशीन लर्निंग और ऑटोमेशन के जरिए प्रोजेक्ट बना सकते हैं, उनकी रोजगार क्षमता दूसरों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि एआई-फर्स्ट इंजीनियर्स को कंपनियां अधिक सैलरी भी ऑफर कर रही हैं। इसलिए अगर बीटेक में एडमिशन लिया है, तो सिर्फ कोर्सबुक तक ही सीमित न रहें, बल्कि एआई और ऑटोमेशन की प्रैक्टिकल स्किल्स भी डेवलप करें।
कोर ब्रांचेज में भी जान आई है
इस बात में कोई शक नहीं कि आईटी और कंप्यूटर साइंस आगे बढ़ चुका है, लेकिन कोर इंजीनियरिंग ब्रांचेज भी अब धीरे-धीरे वापसी कर रही हैं। इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग को अब इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV), सोलर एनर्जी और स्मार्ट ग्रिड्स के फील्ड में जबरदस्त डिमांड मिल रही है। इसी तरह मैकेनिकल इंजीनियर्स की डिमांड रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, 3D प्रिंटिंग और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ी है। सिविल इंजीनियर्स भी बड़े प्रोजेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट सिटीज के जरिए अपनी नौकरियां बना रहे हैं।
स्किल्स के दम पर बदल रहा है पैमाना
आजकल बड़ी कंपनियां बस कॉलेज का नाम या ब्रांच नहीं देखतीं। बल्कि वे ज्यादा जोर देती हैं कोडिंग कॉम्पिटिशन, ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप और रियल-वर्ल्ड सॉल्यूशंस पर। टियर-3 कॉलेज के छात्र भी अगर अच्छी स्किल्स के साथ आते हैं, तो टियर-1 कॉलेज के स्टूडेंट्स के पैकेज को टक्कर दे सकते हैं। इसी वजह से बीटेक के दौरान ही अपने डोमेन में गहराई से चलना बहुत जरूरी है।
फ्रेशर्स की सैलरी में भारी उछाल
पिछले कुछ सालों के मुकाबले फ्रेश इंजीनियर्स की औसत सैलरी में 15–20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां एक वक्त पर औसत सैलरी 4–5 लाख तक ही होती थी, वहीं अब स्किल्ड फ्रेशर्स को 8 से 12 लाख तक के पैकेज मिल रहे हैं। खासकर एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस जैसे फील्ड में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है। कुछ बेहतरीन कैंडिडेट्स तो लाखों के सैलरी पैकेज से भी आगे जाकर करोड़ों तक के प्लान में भी आ चुके हैं।
2026 में कौन सी ब्रांचेज और स्किल्स लाएंगी अच्छी नौकरी?
अगर आप बीटेक कर रहे हैं या करने वाले हैं, तो ये ब्रांचेज और स्किल्स आपके लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं:
- कंप्यूटर साइंस और आईटी: एआई, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार: आईओटी, वीएलएसआई, रेडियो फ्रीक्वेंसी, एम्बेडेड सिस्टम।
- इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग: इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी, स्मार्ट ग्रिड्स।
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग: रोबोटिक्स, सीएडी/सीएएम, ऑटोमेशन, 3D प्रिंटिंग।
- सिविल इंजीनियरिंग: स्मार्ट सिटीज, बिम (BIM), ड्रोन बेस्ड सर्वेक्षण, ग्रीन बिल्डिंग।
इनके साथ-साथ जरूरत है कोडिंग, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स की। इंटर्नशिप, हैकाथॉन, गिटहब प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री-सर्टिफाइड कोर्स से भी अपने प्रोफाइल को मजबूत कर सकते हैं।















