
कानूनी क्षेत्र में लॉयर और एडवोकेट शब्दों का इस्तेमाल अक्सर एक ही मतलब के लिए किया जाता है, लेकिन वास्तव में इन दोनों के बीच एक बड़ा तकनीकी अंतर होता है। सरल शब्दों में कहें तो हर एडवोकेट एक लॉयर होता है, लेकिन हर लॉयर एडवोकेट नहीं होता। अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि इनमें से कौन आपकी पैरवी कोर्ट में कर सकता है और किसके पास क्या अधिकार होते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
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लॉयर और एडवोकेट में क्या अंतर होता है?
कानूनी क्षेत्र में लॉयर और एडवोकेट शब्दों को अक्सर एक ही मान लिया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से इनमें बड़ा अंतर है। जिसके पास कानून (Law) की डिग्री होती है, वह ‘लॉयर’ कहलाता है, लेकिन वह कोर्ट में केस नहीं लड़ सकता। जब वही लॉयर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) की परीक्षा पास कर लेता है और वहां नामांकित हो जाता है, तब वह ‘एडवोकेट’ बनता है। सरल शब्दों में कहें तो, कोर्ट में आपका पक्ष रखने और केस लड़ने का अधिकार केवल एडवोकेट के पास होता है, जबकि लॉयर केवल कानूनी सलाह दे सकता है।
कौन होता है Lawyer?
लॉयर (Lawyer) वह व्यक्ति होता है जिसके पास कानून की डिग्री (जैसे LLB) होती है। सरल शब्दों में, जिसने कानून की पढ़ाई पूरी कर ली है, वह लॉयर कहलाता है। उसे कानून की अच्छी समझ और जानकारी होती है, लेकिन उसके पास कोर्ट में केस लड़ने का अधिकार नहीं होता।
लॉयर का मुख्य कार्य
- कानूनी सलाह: किसी भी कानूनी मसले पर सही मार्गदर्शन और सलाह देना।
- दस्तावेज तैयार करना: वसीयत, कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) और अन्य कानूनी कागजात बनाना।
- अनुबंधों की जांच: कानूनी दस्तावेजों और एग्रीमेंट्स की बारीकियों को परखना।
सरकारी विभागों और कंपनियों में ‘लॉयर’ की भूमिका
एक लॉयर के पास कानून की डिग्री तो होती है, लेकिन जब तक वह बार काउंसिल में एडवोकेट के रूप में पंजीकृत (Register) नहीं हो जाता, तब तक वह कोर्ट में सीधे तौर पर बहस नहीं कर सकता। इसके बावजूद, लॉयर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है; वे कई बड़ी कंपनियों, सरकारी विभागों और निजी संस्थानों में कानूनी सलाहकार (Legal Advisor) के तौर पर काम करते हैं। उनका मुख्य काम संस्थान को कानूनी पेचीदगियों से बचाना और नियमों के अनुसार सही मार्गदर्शन देना होता है।
एडवोकेट कौन होता है ?
एक एडवोकेट वह लॉयर होता है जिसे किसी राज्य की बार काउंसिल में पंजीकरण (Registration) प्राप्त हो चुका हो। एडवोकेट बनने के बाद ही किसी व्यक्ति को अदालत में अपने मुवक्किल का पक्ष रखने और कानूनी बहस करने का कानूनी अधिकार मिलता है। भारत में एडवोकेट बनने के लिए केवल एलएलबी (LLB) की डिग्री काफी नहीं है; इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा आयोजित AIBE (ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन) की परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है, तभी एक लॉयर पूर्ण रूप से एडवोकेट बन पाता है।
Lawyer और Advocate के बीच का मुख्य अंतर
आसान शब्दों में समझें तो हर एडवोकेट एक लॉयर होता है, लेकिन हर लॉयर एडवोकेट नहीं होता। इन दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर ‘अधिकार’ का है; जहाँ एक एडवोकेट के पास अदालत में खड़े होकर केस लड़ने और प्रैक्टिस करने का कानूनी अधिकार होता है, वहीं एक लॉयर के पास केवल कानून की डिग्री होती है, वह कोर्ट में केस नहीं लड़ सकता।















