
उत्तर प्रदेश के खेतिहरों के लिए एक बड़ी राहत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 21 फरवरी को ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना’ के तहत 3,500 प्रभावित परिवारों को कुल 175.67 करोड़ रुपये की सहायता राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी। यह कदम न केवल किसानों की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि खेती के जोखिमों से जूझते परिवारों को नई उम्मीद का संचार करता है। योजना के तहत खेती के दौरान दुर्घटना में मृत्यु या विकलांगता पर 5 लाख रुपये तक की सहायता मिलती है, जो सीधे वारिसों के खाते में पहुंचती है।
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योजना का विस्तृत स्वरूप और लाभ
2019 में शुरू हुई यह योजना उत्तर प्रदेश के पंजीकृत किसानों, भूमिहीन बटाईदारों और खेतिहर मजदूरों के लिए वरदान साबित हो रही है। मृत्यु की स्थिति में परिजनों को पूर्ण 5 लाख रुपये मिलते हैं, जबकि 60% से अधिक स्थायी विकलांगता पर 2 लाख और दोनों हाथ-पैर या आंखें खोने जैसी गंभीर स्थिति में 5 लाख तक की राशि प्रदान की जाती है। पात्रता में आयु सीमा 18 से 70 वर्ष रखी गई है, जिसमें खतौनी धारक किसानों के साथ बटाईदार भी शामिल हैं।
ट्रैक्टर उलटना, हार्वेस्टर हादसे, कीटनाशक विषाक्तता, सर्पदंश या बिजली गिरने जैसी खेती से जुड़ी दुर्घटनाओं पर यह कवरेज लागू होता है। हालांकि, शराब पीकर वाहन चलाने या लापरवाही से हुए हादसों पर क्लेम अमान्य होता है। हालिया वितरण से योजना की पारदर्शिता और डिजिटल पहुंच स्पष्ट हुई है।
क्लेम प्रक्रिया: सरल और समयबद्ध
दुर्घटना के 45 दिनों के भीतर आवेदन अनिवार्य है, हालांकि विशेष मामलों में 6 महीने तक छूट मिल सकती है। ऑनलाइन प्रक्रिया e-District पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन से शुरू होती है, जहां ‘मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना सहायता योजना’ चुनकर फॉर्म भरना होता है। दुर्घटना विवरण, पीड़ित की जानकारी और दावेदार का पता दर्ज कर दस्तावेज अपलोड करने होते हैं।
ऑफलाइन विकल्प में तहसील के उपजिलाधिकारी (SDM) या तहसीलदार कार्यालय में फॉर्म जमा किया जा सकता है। जांच के बाद 15-45 दिनों में राशि ट्रांसफर हो जाती है। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की वेबसाइट (bor.up.nic.in/krishakaccidentscheme) पर आवेदन स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है।
आवश्यक दस्तावेज और विशेष प्रावधान
आवेदन के लिए आधार कार्ड, खतौनी प्रति, मृत्यु प्रमाण पत्र, FIR कॉपी (यदि लागू), CMO द्वारा विकलांगता प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और बटाईदारों के लिए भूमिस्वामी का प्रमाण-पत्र जरूरी हैं। बटाईदार किसानों को अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता होती है, लेकिन KCC धारकों को प्राथमिकता मिलती है। यह डिजिटल प्रक्रिया कागजी घमासान से मुक्ति दिलाती है।
किसानों के चेहरे पर मुस्कान
योगी सरकार की इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। 175 करोड़ का यह वितरण योजना की सफलता का प्रमाण है, जो DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) पर आधारित है। फिर भी, जागरूकता की कमी और दस्तावेज सत्यापन में देरी चुनौतियां हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल ऐप और हेल्पलाइन से इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है। किसान भाइयों से अपील है कि खतरे से बचाव के साथ योजना का लाभ उठाएं। यह न केवल आर्थिक सहारा है, बल्कि खेती को सम्मानजनक बनाता है।















