बिहार सरकार ने अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा की राह पर मजबूती से आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। ग्रेजुएशन पूरा करने वाली अविवाहित छात्राओं को अब 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचेगी और होली का त्योहार आने से ठीक पहले आवेदन का पोर्टल खुलने वाला है। यह पहल न केवल आर्थिक मदद देगी बल्कि लड़कियों में पढ़ाई के प्रति उत्साह भी जगाएगी।

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योजना का विस्तृत स्वरूप
यह कार्यक्रम बालिका के जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव पर सहारा देता है। जन्म से शुरू होकर प्राथमिक कक्षाओं से लेकर स्नातक तक विभिन्न स्तरों पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। ग्रेजुएशन पास करने पर मिलने वाली यह राशि पहले 25 हजार रुपये थी जो अब दोगुनी हो गई है। सरकार ने अब तक लाखों छात्राओं को करोड़ों रुपये की मदद पहुंचाई है। हाल ही में एक बड़ी राशि जारी की गई जिससे हजारों परिवारों में खुशी का माहौल है। यह व्यवस्था डिजिटल तरीके से काम करती है जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
कौन ले सकता है लाभ?
इस सहायता का फायदा उठाने के लिए कुछ बुनियादी शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। आवेदिका बिहार की मूल निवासी होनी चाहिए और शादीशुदा नहीं होनी चाहिए। मान्यता प्राप्त संस्थान से 2018 के बाद ग्रेजुएशन पूरा किया हो तो पात्रता बनती है। परिवार का कोई सदस्य सरकारी नौकरी या आयकर के दायरे में न हो। एक घर से अधिकतम दो बेटियां ही इस योजना का लाभ ले सकती हैं। बैंक खाता आधार कार्ड से जुड़ा होना जरूरी है ताकि पैसे बिना किसी रुकावट के आ सकें। पुराने बैच की छात्राओं को भी अब अंतिम मौका मिल रहा है।
आवेदन कैसे करें आसानी से?
सारी प्रक्रिया ऑनलाइन है और बेहद सरल रखी गई है। सरकारी वेबसाइट पर जाकर नया पंजीकरण कराएं। आधार नंबर और मोबाइल से सत्यापन करें। ग्रेजुएशन की जानकारी भरें और जरूरी कागजात अपलोड करें। सब कुछ जांच लें फिर आवेदन जमा करें। रसीद जरूर डाउनलोड कर लें। कोई कागजात कार्यालय में जमा करने की जरूरत नहीं। स्टेटस भी उसी पोर्टल से देख सकते हैं। होली से पहले शुरू हो रही इस प्रक्रिया में जल्दी शामिल हों ताकि कोई मौका हाथ से न निकले।
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दस्तावेजों की पूरी सूची
आवेदन के समय कुछ मुख्य दस्तावेज तैयार रखें। आधार कार्ड सबसे पहले जरूरी है। बैंक पासबुक की कॉपी जिसमें खाता संख्या और शाखा कोड साफ दिखे। ग्रेजुएशन का प्रमाण पत्र और अंक तालिका अपलोड करनी होगी। यदि निवास प्रमाण की जरूरत पड़े तो वह भी जोड़ दें। सभी फाइलें सही फॉर्मेट में हों तो रिजेक्ट होने का डर नहीं। अधूरे या गलत दस्तावेज ही सबसे बड़ी समस्या बनते हैं।
सामाजिक बदलाव का बड़ा माध्यम
यह सिर्फ पैसे की बात नहीं बल्कि समाज में लड़कियों की स्थिति मजबूत करने का प्रयास है। गांव-गांव में अब बेटियां कॉलेज जाने को प्रेरित हो रही हैं। जागरूकता अभियान तेज हो गए हैं और सोशल मीडिया पर जानकारी फैलाई जा रही है। फिर भी कई पात्र लड़कियां अवसर से वंचित रह जाती हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सहायता केंद्र खोले जाने की मांग बढ़ रही है। यह योजना बिहार के विकास की नींव रखेगी।
बेटियों के सपनों को पंख लगाने का यह सुनहरा अवसर है। तैयार रहें और समय पर कदम उठाएं। होली की खुशियों के साथ बैंक खाते में बड़ी राशि का स्वागत करें। बिहार सरकार बेटियों के कंधों पर राज्य का भविष्य संवारने को प्रतिबद्ध है।















