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बिहार के लिए खुशखबरी! मिली 4 नई रेल लाइनों की सौगात; इन रूटों पर काम हुआ शुरू, बदल जाएगी प्रदेश की तस्वीर।

बिहार को मिली करोड़ों की सौगात- 4 नई रेल लाइनों पर काम शुरू! यात्रा होगी सुपरफास्ट, कनेक्टिविटी बूस्ट, अर्थव्यवस्था चमकेगी। जानें किन रूट्स पर धमाल मचेगा!

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बिहार को रेल यात्रा में नया आयाम देने वाली बड़ी खबर मिली है। चार नई रेल लाइनों पर काम शुरू हो चुका है, जो राज्य के दूरस्थ इलाकों को जोड़ेगी। इससे यात्रा समय कम होगा, व्यापार बढ़ेगा और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। आइए जानें इनकी पूरी जानकारी।

बिहार के लिए खुशखबरी! मिली 4 नई रेल लाइनों की सौगात; इन रूटों पर काम हुआ शुरू, बदल जाएगी प्रदेश की तस्वीर।

नई रेल लाइनों का विवरण

इन चार लाइनों से बिहार का रेल नेटवर्क मजबूत बनेगा। पहली लाइन साकरी से हसनपुर तक 62 किलोमीटर लंबी चलेगी, जो भागलपुर और वैशाली को सीधे जोड़ेगी। दूसरी खगरिया से कुशेश्वरस्थान तक 48 किलोमीटर की होगी, जिसमें मधेपुरा के ग्रामीण इलाके शामिल हैं। तीसरी कुर्सेला से बिहारिगंज 57 किलोमीटर दूर सुपौल और दरभंगा को लाभ पहुंचाएगी। चौथी गया-दरभंगा क्षेत्र में मुजफ्फरपुर को जोड़ेगी। कुल मिलाकर 426 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश होगा।

निर्माण कार्य की प्रगति

काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। साकरी-हसनपुर पर भूमि अधिग्रहण पूरा हो चुका, ट्रैक बिछाने की शुरुआत हुई। खगरिया रूट पर सर्वे और मिट्टी परीक्षण चल रहा, जबकि कुर्सेला में मजदूरों की भर्ती शुरू। गया क्षेत्र में डीपीआर फाइनल होने के बाद बुलडोजर लग चुके। रेलवे ने समयसीमा तय की है – दो साल में 70 फीसदी काम पूरा। इससे सड़कें कम इस्तेमाल होंगी, ट्रैफिक जाम घटेगा।

आर्थिक बदलाव की उम्मीदें

ये लाइनें बिहार की तस्वीर पलट देंगी। पटना-भागलपुर सफर 4 घंटे से घटकर 2 घंटे का हो जाएगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी – किसान अपनी उपज तेजी से बाजार पहुंचाएंगे। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, राजगीर-नालंदा जैसे स्थल ज्यादा आकर्षक होंगे। रोजगार में 50 हजार से ज्यादा नौकरियां पैदा होंगी, खासकर निर्माण और रखरखाव में। माल ढुलाई क्षमता दोगुनी हो जाएगी, जिससे उद्योगपति निवेश करेंगे। कुल प्रभाव से जीडीपी में 2-3 फीसदी की उछाल संभव।

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यात्रियों को क्या फायदा?

यात्रियों को कम भीड़, नई ट्रेनें और सुरक्षित सफर मिलेगा। वर्तमान में पटरी पर दबाव रहता है, अब डबल ट्रैक से स्पीड बढ़ेगी। टिकट सस्ते होंगे क्योंकि ईंधन खर्च कम। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आरक्षित कोच बढ़ेंगे। मोबाइल चार्जिंग, वाई-फाई जैसी सुविधाएं नई लाइनों पर तैनात। सीतामढ़ी-सहरसा जैसे रूट्स पर डायरेक्ट ट्रेनें चलेंगी।

भविष्य की योजनाएं

चार लाइनों के अलावा तीन नए कॉरिडोर प्रस्तावित हैं – कुल 260 किलोमीटर ट्रैक। पटना-गया-मुजफ्फरपुर पर 10 बड़े पुल बनेंगे। केंद्र सरकार 17,000 करोड़ आवंटित कर चुकी। 2026 तक पहला चरण पूरा, 2028 तक सभी लाइनें चालू। इससे बिहार पूर्वोत्तर राज्यों से बेहतर जुड़ेगा। स्थानीय विधायक और सांसद सक्रिय हैं, जनता की मांग पर काम तेज।

चुनौतियां और समाधान

जमीन विवाद बड़ी बाधा थी, लेकिन अब 90 फीसदी अधिग्रहण हो चुका। बाढ़ प्रभावित इलाकों में ऊंचे पुल बन रहे। पर्यावरण मंजूरी मिली, वन क्षेत्र कम प्रभावित। रेलवे ने स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी, जिससे पारदर्शिता बढ़ी। जनता की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन शुरू।

ये परियोजनाएं बिहार को रेलहब बनाएंगी। विकास की रफ्तार तेज होगी, युवाओं को अवसर मिलेंगे। बिहार अब पीछे नहीं रहेगा। 

Author
info@divcomkonkan.in

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