हिमाचल प्रदेश सरकार की क्रांतिकारी योजना ‘बेटी है अनमोल’ ने गरीब परिवारों के माता-पिताओं के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है। 2010 में शुरू हुई यह योजना बीपीएल परिवारों की अधिकतम दो बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता प्रदान करती है। बेटी के जन्म पर ही उसके नाम 21,000 रुपये की नकद राशि बैंक या डाकघर खाते में जमा हो जाती है, जो 18 साल की उम्र में मैच्योर होकर मिल जाती है। यह योजना न सिर्फ पढ़ाई की फीस और किताबों का खर्च उठाती है, बल्कि शादी जैसी बड़ी चिंताओं को भी दूर करती है।

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योजना की शुरुआत और उद्देश्य
जुलाई 2010 को लॉन्च हुई ‘बेटी है अनमोल’ का मुख्य लक्ष्य राज्य में लिंगानुपात सुधारना और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना है। बीपीएल श्रेणी के परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों को यह विशेष लाभ मिलता है। जन्म के ठीक बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से खाता खुलवाया जाता है और 21,000 रुपये की राशि जमा कर दी जाती है। इसके अलावा शिक्षा के हर स्तर पर सालाना छात्रवृत्ति दी जाती है, जो कक्षा एक से ग्रेजुएशन तक जारी रहती है। अब तक लाखों बेटियां इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं और राज्य सरकार ने सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह योजना बाल विवाह रोकने और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
विभिन्न स्तरों पर मिलने वाली सहायता
योजना के तहत जन्म सहायता के अलावा पढ़ाई के हर चरण में आर्थिक मदद मिलती है। कक्षा एक से तीन तक प्रतिवर्ष 450 रुपये, चौथी कक्षा में 750 रुपये, पांचवीं में 900 रुपये मिलते हैं। छठी से सातवीं कक्षा के लिए 1,050 रुपये सालाना, आठवीं में 1,200 रुपये, नौवीं-दसवीं के लिए 1,500 रुपये और ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में 2,250 रुपये प्रतिवर्ष दिए जाते हैं। ग्रेजुएशन स्तर जैसे बीए, बीकॉम, बीएससी या अन्य पाठ्यक्रमों में 5,000 रुपये सालाना की सहायता उपलब्ध है। ये राशियां किताबें, यूनिफॉर्म, स्टेशनरी और अन्य शैक्षिक खर्चों पर खर्च की जा सकती हैं। कुल मिलाकर एक बेटी को पूरे शिक्षा चक्र में लाखों रुपये की सहायता मिल सकती है, जो परिवार की आर्थिक बोझ को काफी हल्का कर देती है।
पात्रता मानदंड और शर्तें
इस योजना का लाभ लेने के लिए बेटी हिमाचल प्रदेश की स्थायी निवासी होनी चाहिए और परिवार बीपीएल सूची में शामिल होना जरूरी है। जन्म की तारीख 5 जुलाई 2010 के बाद होनी चाहिए और शादी 18 वर्ष से पहले नहीं होनी चाहिए। एक परिवार केवल दो बेटियों को ही इस योजना का लाभ दे सकता है। यदि बेटी की असामयिक मृत्यु हो जाती है या शादी हो जाती है, तो जमा राशि सरकार को वापस करनी पड़ती है। ये सख्त शर्तें योजना के दुरुपयोग को रोकती हैं और वास्तविक जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाती हैं।
आवेदन की सरल प्रक्रिया
आवेदन प्रक्रिया बेहद आसान है। सबसे पहले ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करें। फिर फॉर्म भरकर नजदीकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को सौंप दें, जो बैंक खाता खुलवाकर राशि जमा करवाएगी। छात्रवृत्ति के लिए स्कूल के हेडमास्टर को आवेदन करना होता है। आवश्यक दस्तावेजों में जन्म प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र और बैंक पासबुक शामिल हैं। पूरी प्रक्रिया मुफ्त है और कुछ ही दिनों में पूरी हो जाती है। हिमाचल के ग्रामीण इलाकों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका सराहनीय है, जो घर-घर पहुंचकर जागरूकता फैला रही हैं।
समाज पर सकारात्मक प्रभाव
‘बेटी है अनमोल’ ने हिमाचल के समाज को नया आयाम दिया है। पहले जहां बेटी के जन्म पर चिंता होती थी, अब वह खुशी का क्षण बन गया है। लिंगानुपात में सुधार हुआ है, स्कूलों में लड़कियों का नामांकन बढ़ा है और उच्च शिक्षा की दर में वृद्धि दर्ज की गई है। यह योजना नारी सशक्तिकरण की मिसाल है और अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है। यदि आप हिमाचल प्रदेश के निवासी हैं, तो तुरंत नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र या ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर संपर्क करें। बेटी का भविष्य सुरक्षित करने का यह सुनहरा अवसर हाथ से न जाने दें।















