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सिर्फ ₹2 में कराएं अपने पशु का इलाज! बस इस नंबर पर कॉल करें और घर बैठे पाएं सरकारी मदद; जानें पूरी प्रक्रिया।

सिर्फ इस नंबर पर कॉल करें, मुफ्त इलाज पाएं। गरीब किसानो के लिए खुशखबरी! पूरी प्रक्रिया जानें और तुरंत फायदा उठाएं। क्या आपका पशु बीमार है? आज ही कॉल करें!

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ग्रामीण भारत के लाखों पशुपालकों के लिए केंद्र सरकार ने एक वरदान जैसी योजना शुरू की है। अब मात्र 2 रुपये में अपने पशु का इलाज घर के दरवाजे पर करवाएं। बस टोल-फ्री नंबर 1962 पर एक फोन कॉल करें, और मोबाइल वेटरनरी यूनिट की पूरी टीम दवाइयों सहित आपकी थहल तक पहुंच जाएगी। यह सेवा उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़ तक फैल चुकी है, जो पशुपालन को आसान और सस्ता बना रही है।

सिर्फ ₹2 में कराएं अपने पशु का इलाज! बस इस नंबर पर कॉल करें और घर बैठे पाएं सरकारी मदद; जानें पूरी प्रक्रिया।

योजना का उद्देश्य और शुरुआत

‘पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ के तहत लॉन्च हुई यह योजना दूरदराज के गांवों में पशुओं को त्वरित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के मकसद से शुरू की गई। उत्तर प्रदेश में 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पशुपालन मंत्री ने 520 मोबाइल यूनिट्स को हरी झंडी दिखाई। इन वैनों में पशु चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, दवाइयां और बेसिक उपकरण मौजूद रहते हैं। इलाज का शुल्क नाममात्र 2 से 10 रुपये तक है, जो गरीब किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा। पहले पशु अस्पताल दूर होने से कई पशु इलाज के अभाव में मर जाते थे, लेकिन अब ऐसी घटनाएं कम हो रही हैं।

योजना का लाभ कैसे उठाएं?

यह प्रक्रिया बेहद सरल है, जिसे कोई भी पशुपालक आसानी से फॉलो कर सकता है। सबसे पहले टोल-फ्री 1962 नंबर डायल करें। उत्तर प्रदेश में यह सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक उपलब्ध है, जबकि कुछ राज्यों में 24×7 चलता है। कॉल पर पशु की समस्या जैसे बुखार, चोट, प्रसव दर्द या पेट की तकलीफ बताएं। साथ ही अपना सटीक गांव, तहसील और लोकेशन शेयर करें। कंट्रोल रूम तुरंत नजदीकी मोबाइल यूनिट को निर्देश देगा। आमतौर पर 30 से 60 मिनट में वैन आ जाती है। डॉक्टर जांच करेंगे, दवा देंगे और जरूरत पड़ने पर अस्पताल रेफर करेंगे। भुगतान सिर्फ न्यूनतम शुल्क ही करना होता है, कोई छिपा खर्च नहीं।

किन राज्यों में उपलब्ध और कितनी यूनिट्स

उत्तर प्रदेश में 520 से ज्यादा यूनिट्स 5 जोनल कंट्रोल सेंटर्स से संचालित हो रही हैं। राजस्थान के 50 जिलों में कंट्रोल रूम आधारित सेवा चल रही है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जैसे जिलों में 6-6 यूनिट्स सुबह 8 से शाम 4 तक सक्रिय रहती हैं। बिहार में राज्यव्यापी कवरेज है, जहां कई जगह निशुल्क दवाएं भी मिल रही हैं। कर्नाटक और ओडिशा में भी 1962 नंबर पर पशु एम्बुलेंस जैसी सुविधा उपलब्ध है। कुल मिलाकर, यह योजना पूरे देश में पशुपालन क्रांति ला रही है।

पशुपालकों को मिले लाभ और चुनौतियां

इस सेवा से दूध उत्पादन बढ़ा है, पशु मृत्यु दर घटी है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। खासकर 12 लाख निराश्रित गोवंश की देखभाल आसान हो गई। हालांकि, शुरुआत में कुछ जगहों पर व्यस्त लाइन की शिकायतें आईं, लेकिन विभाग लगातार सुधार कर रहा। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह पशुपालन को आधुनिक बनाने का बड़ा कदम है। पशुपालक भाइयों, मोबाइल में नंबर सेव कर लें। इमरजेंसी में देर न करें, तुरंत कॉल करें। ज्यादा जानकारी के लिए स्थानीय पशु विभाग से संपर्क करें। यह योजना न सिर्फ पशुओं की जिंदगी बचा रही, बल्कि किसानों की आजीविका भी सुरक्षित कर रही है। 

Author
info@divcomkonkan.in

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