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Ancestral Property Law: पैतृक संपत्ति पर अब बेटियों का होगा इतना अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का 2026 का ताजा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया। अब बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर हक मिलेगा। पुराने कानून उखड़ गए। बेटे-बेटी सब बराबर। जानिए पूरा नियम और क्या बदलेगा आपकी जिंदगी।

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हिंदू परिवारों में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस अब सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों से साफ हो गई है। बेटियों को जन्म से ही बेटों के बराबर अधिकार मिले हुए हैं, और यह नियम 2005 के कानूनी संशोधन के बाद और मजबूत हुआ। कोर्ट ने बार-बार दोहराया कि पैतृक संपत्ति पर बेटियों का हक किसी भी स्थिति में कम नहीं किया जा सकता, चाहे परिवार में कितने भी पुराने रिवाज हों। यह बदलाव लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक बन गया है।

Ancestral Property Law: पैतृक संपत्ति पर अब बेटियों का होगा इतना अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का 2026 का ताजा फैसला

पैतृक संपत्ति क्या होती है?

पैतृक संपत्ति उस जमीन या मकान को कहते हैं जो चार पीढ़ियों से चली आ रही हो, जैसे दादा या परदादा के समय से बिना बंटवारे के संयुक्त रूप से रखी गई हो। हिंदू अविभाजित परिवार में यह संपत्ति सभी सदस्यों की साझा जिम्मेदारी होती है। पहले बेटियां इसे केवल मां के माध्यम से हिस्सा पाती थीं, लेकिन अब कानून ने उन्हें सीधे हिस्सेदार बना दिया। जन्म लेते ही बेटी परिवार की संपत्ति में बराबर की मालिक बन जाती है और बंटवारा मांग सकती है। शादी के बाद भी उनका अधिकार बना रहता है।

कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में स्पष्ट किया कि 2005 का संशोधन पुराने सभी फैसलों पर हावी है। एक मामले में तमिलनाडु से जुड़े विवाद में बेटी को बेटे के बराबर हिस्सा दिया गया। दूसरे फैसले में कहा गया कि बंटवारे के बाद मिला हिस्सा व्यक्तिगत हो जाता है, जिसे कोई भी बेच या दान कर सकता है, लेकिन मूल पैतृक हिस्से पर परिवार का अधिकार बरकरार रहता है। इन निर्णयों ने रिव्यू याचिकाओं की सीमाएं भी तय कीं, ताकि बार-बार पुराने दावे न उठें। ट्राइबल इलाकों में भी महिलाओं को यही लाभ मिला।

स्व-अर्जित संपत्ति का अलग नियम

पिता या दादा ने अपनी कमाई से खरीदी गई संपत्ति को स्व-अर्जित कहते हैं। इसमें बेटियों का हक पिता की मृत्यु के बाद ही लागू होता है, और वसीयत से इसे बदला जा सकता है। लेकिन पैतृक संपत्ति पर ऐसा कोई हस्तक्षेप नहीं। कई बार लोग दोनों को मिला देते हैं, जिससे भ्रम फैलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के कागजातों की जांच जरूरी है, ताकि सही प्रकार पता चल सके।

सोशल मीडिया पर भ्रामक दावे

इंटरनेट पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट अक्सर कहते हैं कि बेटियों का हक खत्म हो गया। ये क्लिकबेट हैं, जो आधे-अधूरे तथ्यों से डर फैलाते हैं। वास्तव में कोर्ट ने बेटियों के अधिकारों को और पक्का किया है। परिवारों को सलाह दी जाती है कि कानूनी सलाहकार से संपर्क करें और दस्तावेजों को साफ रखें। जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, खासकर पंजाब जैसे किसान बहुल राज्यों में।

महिलाओं के लिए नया दौर

ये फैसले संविधान की समानता की भावना को साकार कर रहे हैं। अब बेटियां न केवल हिस्सा मांग सकती हैं, बल्कि संपत्ति बेचकर अपना भविष्य संवार सकती हैं। पंजाब के लुधियाना जैसे शहरों में किसान परिवारों को इससे फायदा होगा, जहां जमीन विवाद आम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डिजिटल रजिस्ट्री से पारदर्शिता बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है। 

Ancestral Property Law
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info@divcomkonkan.in

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