
दुनिया भर में तलाक के मामलों की बात करें तो भारत में यह दर सबसे कम है। केवल लगभग 1 प्रतिशत शादियां ही तलाक तक पहुंच पाती हैं, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इस आंकड़े में इजाफा जरूर हुआ है। खासकर सेलिब्रिटीज के केसेज ने सुर्खियां बटोरीं- इंडियन क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या, पूर्व धाकड़ बल्लेबाज शिखर धवन और लेग स्पिनर युवेंद्र चहल जैसे नाम प्रमुख हैं।
इन मामलों ने न सिर्फ क्रिकेटप्रेमियों को चौंकाया, बल्कि आम लोगों के मन में एक बड़ा सवाल भी पैदा किया: तलाक के बाद पति की संपत्ति पर पत्नी का कितना हक होता है? क्या उसे आधी प्रॉपर्टी मिल जाती है?
Table of Contents
आम गलतफहमियां और कानूनी हकीकत
बहुत से लोग इस मुद्दे पर गलतफहमी का शिकार हैं। सोशल मीडिया और अफवाहों के चलते लगता है कि तलाक पर पत्नी को पति की सारी या आधी संपत्ति का हक मिल जाता है। लेकिन कानूनी हकीकत बिल्कुल अलग है। भारत में तलाक के बाद पत्नी को पति की संपत्ति में स्वतः कोई हिस्सा नहीं मिलता। हिंदू मैरिज एक्ट (सेक्शन 24-25), क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सेक्शन 125) और डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट जैसे कानूनों के तहत पति को पत्नी को भरण-पोषण (मेंटेनेंस या गुजारा भत्ता) देने की बाध्यता है, न कि संपत्ति बांटने की।
मेंटेनेंस की परिभाषा और निर्धारण
यह मेंटेनेंस सिर्फ नकद राशि तक सीमित नहीं। इसमें रहने की जगह, स्वास्थ्य खर्च, शिक्षा और अन्य जरूरतें शामिल हो सकती हैं। कोर्ट पति की आय, पत्नी की स्थिति, बच्चों की जिम्मेदारी और जीवनशैली को ध्यान में रखकर राशि तय करता है। उदाहरण के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में स्पष्ट किया कि पत्नी को ‘आधी प्रॉपर्टी’ का हक नहीं सिर्फ उचित मेंटेनेंस। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (2025) ने फैसला दिया कि तलाक के बाद पति के सरकारी क्वार्टर पर पत्नी का अधिकार समाप्त हो जाता है, हालांकि बच्चों को हक रहता है।
संपत्ति के प्रकार और पत्नी का हक
संपत्ति को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
- स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property): पति ने अपनी कमाई से खरीदी हो, जैसे नौकरी की सैलरी से फ्लैट। यहां पत्नी का कोई स्वाभाविक दावा नहीं। तलाक के बाद हिस्सा क्लेम करने के लिए पत्नी को साबित करना पड़ता है कि उसने आर्थिक योगदान दिया, जैसे लोन चुकाया। बिना सबूत के कोर्ट इनकार कर देता है।
- पैतृक या संयुक्त संपत्ति: हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) में पत्नी को शादी के दौरान रहने का अधिकार मिल सकता है, लेकिन मालिकाना हक नहीं। तलाक पर यह समाप्त। अगर प्रॉपर्टी जॉइंट नाम पर हो (दोनों ने मिलकर खरीदी), तो पत्नी को हिस्सा मिल सकता है। स्त्रीधन शादी में मिले गहने, उपहार पर पत्नी का पूर्ण हक बना रहता है।
धर्म-आधारित भिन्नताएं और हालिया फैसले
हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध पर हिंदू मैरिज एक्ट लागू। मुस्लिम महिलाओं के लिए 2019 का कानून ट्रिपल तलाक अमान्य कर मेंटेनेंस सुनिश्चित करता है। क्रिश्चियन मामलों में इंडियन डिवोर्स एक्ट अदालत को प्रॉपर्टी डिवीजन की छूट देता है। हालिया फैसलों ने स्पष्टता बढ़ाई। सुप्रीम कोर्ट: पत्नी को केवल नाम वाली प्रॉपर्टी पर हक नहीं। हिमाचल हाईकोर्ट (जनवरी 2026): तलाक बाद भी फैमिली कोर्ट स्त्रीधन दावे सुन सकता है। क्रिकेटर्स के केसेज- like हार्दिक पांड्या का- में भी मेंटेनेंस पर फोकस रहा, संपत्ति बंटवारे पर नहीं।















