झारखंड सरकार की अबुआ आवास योजना ग्रामीण इलाकों में रहने वाले गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा सहारा बन गई है। हाल ही में जारी नई लाभार्थी सूची से हजारों बेघर लोग उत्साहित हैं। इस योजना के तहत हर योग्य परिवार को पक्का मकान बनाने के लिए दो लाख रुपये तक की मदद मिल रही है। राज्य सरकार ने 2026 तक आठ लाख पक्के घर बनाने का संकल्प लिया है, जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की जिंदगी बदलने वाली साबित हो रही है।

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योजना की शुरुआत और बड़ा लक्ष्य
यह योजना 2023 में शुरू हुई थी, जब राज्य के मुखिया ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इसे लॉन्च किया। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना से छूटे हुए परिवारों को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया गया। कुल बजट पंद्रह हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। तीन चरणों में बंटी इस योजना का पहला चरण 2023-24 में दो लाख घरों का था। दूसरे चरण में 2024-25 के दौरान साढे तीन लाख और तीसरे चरण 2025-26 में ढाई लाख घर बनाने का इरादा है। हर घर में तीन कमरे, रसोई और शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो कुल 31 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया जाता है।
लाभार्थियों को क्या मिलेगा
प्रत्येक परिवार को दो लाख रुपये पांच किस्तों में दिए जाते हैं। इसके साथ ही मनरेगा योजना के तहत 95 दिनों की मजदूरी भी उपलब्ध कराई जाती है। मकान निर्माण के बाद पानी, बिजली और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी जोड़ी जाती हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने अब तक लाखों आवेदनों का सत्यापन कर स्वीकृति दी है। कई जिलों में पहली, दूसरी और तीसरी किस्तें पहुंच चुकी हैं, जिससे निर्माण कार्य तेजी पकड़ रहा है। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, डेढ लाख से अधिक घर पूरे हो चुके हैं।
नाम चेक करने का आसान तरीका
नई सूची जांचने के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाएं। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, आधार कार्ड या मोबाइल नंबर डालकर तुरंत पता चल जाता है। पंचायत या ब्लॉक स्तर पर आवेदन करने वाले लोग स्थानीय कार्यालयों में भी जानकारी ले सकते हैं। डीबीटी सिस्टम से पैसे सीधे बैंक खाते में आते हैं, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। 24 जिलों में एक साथ राशि वितरण की प्रक्रिया चल रही है। फरवरी 2026 से नई किस्तें शुरू होने की संभावना है।
पात्रता के नियम साफ
ग्रामीण क्षेत्रों के वे परिवार जो बेघर हैं या कच्चे मकान में रहते हैं, वे इसके हकदार हैं। केंद्र की किसी भी आवास योजना का लाभ पहले न ले चुके लोग प्राथमिकता में हैं। झुग्गी-झोपड़ी वालों को भी मौका मिलता है। आवेदन के बाद जमीन के दस्तावेजों और आय प्रमाण पत्र का सत्यापन होता है। कुछ मामलों में नाम कटौती भी होती है, अगर जानकारी गलत पाई जाती है।
चुनौतियां और आगे की राह
कई जिलों में घरों का निर्माण अधर में लटका है, लेकिन सरकार इसे पूरा करने के लिए कदम उठा रही है। कुछ इलाकों में एक लाख से ज्यादा घर बाकी हैं। मंत्री स्तर पर चर्चा हो रही है कि बजट बढ़ाकर लक्ष्य हासिल किया जाए। यह योजना न सिर्फ छत दे रही, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती भी प्रदान कर रही। मजदूरों को रोजगार और सामग्री खरीद से स्थानीय बाजार फल-फूल रहा।
अबुआ आवास योजना झारखंड के गांवों को नया रूप दे रही है। अगर आपका नाम लिस्ट में है तो तुरंत संपर्क करें। गरीब परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाली यह पहल राज्य की कल्याणकारी छवि को मजबूत करेगी। अपने पक्के घर का सपना अब दूर नहीं।















