आकाशीय घटनाओं का शौकीन लोगों के लिए एक नई तैयारी का समय आ गया है। साल का दूसरा चंद्र ग्रहण अगस्त महीने में 27 और 28 तारीख को होगा। यह आंशिक ग्रहण चंद्रमा को सुपर ब्लड मून जैसा रूप देगा, जहां उसका 93 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा। लालिमा से चमकता चंद्रमा वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों दोनों के लिए चर्चा का विषय बनेगा। भारत में यह नजारा नजर नहीं आएगा, इसलिए दैनिक जीवन पर कोई धार्मिक पाबंदी भी लागू न होगी।

Table of Contents
ग्रहण का पूरा समय सारणी
यह खगोलीय घटना कुल 5 घंटे 39 मिनट चलेगी। वैश्विक समय के हिसाब से 28 अगस्त को सुबह 1 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 2 मिनट पर समाप्त होगी। भारतीय समयानुसार रात्रि 6 बजकर 53 मिनट से अगली सुबह 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। सबसे रोमांचक पल चरम काल में आएगा, जो 28 अगस्त को सुबह 10 बजकर 11 मिनट पर होगा। उस समय चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होने से सुपरमून प्रभाव दिखेगा, यानी उसका आकार सामान्य से बड़ा और चमकीला प्रतीत होगा। खगोल प्रेमी इस दौरान दूरबीनों से लाल रंग की चमक का लुत्फ उठा सकेंगे।
भारत क्यों चूकेगा इस नजारे को
भौगोलिक स्थिति के चलते यह ग्रहण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में स्पष्ट दिखेगा। एशिया महाद्वीप के ऊपर न आने से भारतीय आकाश शांत रहेगा। नग्न आंखों या टेलीस्कोप से भी कोई बदलाव नजर नही आएगा। खगोलशास्त्री बताते हैं कि पृथ्वी की वायुमंडल परतें सूर्य की किरणों को अपवर्तित कर चंद्रमा को लाल रंग प्रदान करती हैं। जो लोग इसे मिस न करना चाहें, वे ऑनलाइन लाइव प्रसारण या अंतरराष्ट्रीय वेबसाइटों पर नजर रख सकते हैं।
सूतक काल पर क्या असर
धार्मिक मान्यताओं में चंद्र ग्रहण के दौरान सूतक लगता है, जो ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू होता है। लेकिन भारत में अदृश्य होने से यह नियम लागू न होगा। लोग सामान्य रूप से पूजा, भोजन और शुभ कार्य कर सकेंगे। गर्भवती महिलाओं या बच्चों को विशेष सावधानी की जरूरत न पड़ेगी। ज्योतिष विशेषज्ञ फिर भी सलाह देते हैं कि ग्रहण वाले दिन सात्विक आहार लें और मन को शांत रखें। यह समय ध्यान या योग के लिए उपयुक्त रहेगा।
यह भी पढ़ें- PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! 2 मार्च को ब्याज दर पर होगा फैसला, जानें कितनी बढ़ सकती है आपकी कमाई
राशि प्रभाव और सावधानियां
चंद्रमा मन का कारक ग्रह है, इसलिए यह ग्रहण सभी राशियों पर भावनात्मक स्तर पर असर डाल सकता है। कर्क राशि वालों को मानसिक उथल पुथल से बचना होगा, जबकि वृश्चिक को निर्णय लेते समय धैर्य रखना चाहिए। मेष यात्रा में सतर्क रहे, सिंह को धन लाभ के योग हैं। तुला परिवार में सुख बढ़ेगा, मीन रचनात्मक कार्यों में सफलता पाएंगे। वैदिक ज्योतिष में इसे राहु केतु का प्रभाव माना जाता है, जो कर्मों का फल देता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण केवल छाया का खेल है, कोई प्रत्यक्ष हानि नही पहुंचाता।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्व
2026 में कुल चार चंद्र ग्रहण दर्ज हैं। पहला मार्च में बीत चुका, बाकी तीन बाकी हैं। सुपर ब्लड मून का यह संयोग दुर्लभ है। खगोलशास्त्री इसे अध्ययन के लिए सुनहरा मौका बताते हैं। भारत जैसे देशों में भले न दिखे, सोशल मीडिया पर वैश्विक तस्वीरें छाई रहेंगी। उत्साही लोग नासा या अन्य प्लेटफॉर्म्स से अपडेट ले सकते हैं।
यह ग्रहण विज्ञान और आस्था का अनोखा मेल है। अदृश्य होते हुए भी इसकी चर्चा जोरों पर रहेगी। दैनिक जीवन निर्बाध चलेगा, बस ज्योतिषीय सलाह को अमल में लाएं। आकाशीय रहस्यों का पीछा करते रहें।















