
मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब अपने सबसे निर्णायक और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक नया मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है, इस ‘फाइनल जंग’ में अब कुर्द लड़ाकों की एंट्री होने जा रही है, जिन्हें दुनिया के सबसे संगठित विपक्षी समूहों में गिना जाता है।
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कुर्द लड़ाकों को अमेरिकी साथ: क्या है ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में चल रहे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के तहत ईरान पर चौतरफा हमले जारी हैं इस बीच, खुफिया एजेंसी CIA द्वारा ईरानी कुर्द समूहों को हथियार देने और उन्हें ईरान के भीतर विद्रोह भड़काने के लिए तैयार करने की खबरें सामने आई हैं।
- इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में सक्रिय ‘कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी’ (PAK) ने अपने लड़ाकों को ईरानी सीमा के करीब तैनात कर दिया है और वे ‘स्टैंडबाय’ मोड पर हैं।
- अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि कुर्द लड़ाके सीमा पार कर ईरान में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें अमेरिकी वायुसेना द्वारा हवाई सुरक्षा (Air Support) प्रदान की जाएगी।
- विशेषज्ञों का मानना है कि कुर्द लड़ाकों के जरिए ईरान के भीतर जमीनी मोर्चा खोलने से ईरानी सेना का ध्यान बंट जाएगा, जिससे इजराइल और अमेरिका को अपने हवाई हमलों में और अधिक सफलता मिलेगी।
क्या मिडिल ईस्ट के नक्शे पर उभरेगा एक नया देश?
कुर्द लड़ाकों की इस सक्रियता ने एक बार फिर ‘स्वतंत्र कुर्दिस्तान’ की पुरानी मांग को हवा दे दी है, हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी किसी नए देश की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा हालात कई संकेत दे रहे हैं:
- इराक में स्थित पांच ईरानी कुर्द समूहों ने पिछले महीने ही एक नया राजनीतिक गठबंधन बनाया है, जिसका लक्ष्य ईरानी शासन को उखाड़ फेंकना और स्वायत्तता हासिल करना है।
- तुर्की, इराक और सीरिया जैसे पड़ोसी देश एक स्वतंत्र कुर्द राष्ट्र के विचार का कड़ा विरोध कर रहे हैं, क्योंकि इससे उनके अपने क्षेत्रों में भी अलगाववाद की आग भड़क सकती है।
- विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान की वर्तमान व्यवस्था कमजोर होती है, तो मिडिल ईस्ट का नक्शा पूरी तरह बदल सकता है और कुर्दों को अपनी लंबे समय से लंबित मांग मनवाने का मौका मिल सकता है।
युद्ध के ताजा हालात और वैश्विक असर
- इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने तेहरान और बेरुत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं।
- ईरान ने भी इजराइल और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिन्हें रोकने के लिए NATO ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
- युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $80 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का खतरा बढ़ गया है।















