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सिटी मजिस्ट्रेट (City Magistrate) कैसे बनते हैं? जानें कौन सी परीक्षा देनी होती है और कितनी मिलती है पावर और सैलरी

 प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए 'सिटी मजिस्ट्रेट' (City Magistrate) का पद हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है, यह न केवल समाज में प्रतिष्ठा दिलाता है, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी इस कंधे पर होती है, यदि आप भी इस पद पर पहुंचकर शहर की कमान संभालना चाहते हैं, तो इसकी चयन प्रक्रिया और मिलने वाली सुविधाओं की पूरी जानकारी नीचे दी गई है

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सिटी मजिस्ट्रेट (City Magistrate) कैसे बनते हैं? जानें कौन सी परीक्षा देनी होती है और कितनी मिलती है पावर और सैलरी
सिटी मजिस्ट्रेट (City Magistrate) कैसे बनते हैं? जानें कौन सी परीक्षा देनी होती है और कितनी मिलती है पावर और सैलरी

 प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए ‘सिटी मजिस्ट्रेट’ (City Magistrate) का पद हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है, यह न केवल समाज में प्रतिष्ठा दिलाता है, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी भी इस कंधे पर होती है, यदि आप भी इस पद पर पहुंचकर शहर की कमान संभालना चाहते हैं, तो इसकी चयन प्रक्रिया और मिलने वाली सुविधाओं की पूरी जानकारी नीचे दी गई है। 

कौन सी परीक्षा देनी होती है? (Selection Process)

सिटी मजिस्ट्रेट बनने के लिए आपको मुख्य रूप से राज्य लोक सेवा आयोग (State PSC) द्वारा आयोजित पी.सी.एस. (PCS) परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में यह परीक्षा UPPSC द्वारा आयोजित की जाती है। चयन प्रक्रिया तीन कड़े चरणों में पूरी होती है: 

  • प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): यह एक स्क्रीनिंग टेस्ट है, जिसमें वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं।
  • मुख्य परीक्षा (Mains): इसमें सफल होने के लिए लिखित वर्णनात्मक परीक्षा पास करनी होती है।
  • साक्षात्कार (Interview): अंतिम चरण में उम्मीदवार के व्यक्तित्व और प्रशासनिक सोच का परीक्षण किया जाता है। 

योग्यता और आयु सीमा (Eligibility)

  • शैक्षणिक योग्यता: किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduation) की डिग्री अनिवार्य है।
  • आयु: उम्मीदवार की आयु कम से कम 21 वर्ष होनी चाहिए। सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा अक्सर 35 से 40 वर्ष के बीच होती है, जबकि आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट दी जाती है। 

कितनी मिलती है पावर? (Authority and Powers)

सिटी मजिस्ट्रेट एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य करता है और उसे जिला मजिस्ट्रेट (DM) की सहायता के लिए नियुक्त किया जाता है। उनकी शक्तियों में शामिल हैं: 

  • कानून-व्यवस्था: शहर में शांति बनाए रखना और पुलिस के साथ समन्वय करना।
  • धारा 144: किसी आपातकालीन स्थिति में दंगों या अशांति को रोकने के लिए निषेधाज्ञा लागू करने का अधिकार।
  • प्रशासनिक नियंत्रण: अवैध अतिक्रमण हटाना, विभिन्न लाइसेंस (जैसे हथियार, पटाखा आदि) जारी करना और सरकारी योजनाओं की निगरानी करना।
  • चुनाव और आपदा: चुनाव के दौरान उप जिला निर्वाचन अधिकारी के रुप में और आपदा के समय राहत कार्यों का प्रबंधन करना। 

सैलरी और अन्य सुविधाएं (Salary & Perks) 

7वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद इस पद पर सैलरी काफी आकर्षक हो गई है: 

  • पे-स्केल: सिटी मजिस्ट्रेट का पद आमतौर पर पे-लेवल 10 के अंतर्गत आता है।
  • मूल वेतन (Basic Pay): शुरुआती बेसिक सैलरी ₹56,100 होती है।
  • इन-हैंड सैलरी: महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट (HRA) और अन्य भत्तों को मिलाकर यह राशि ₹75,000 से ₹90,000 प्रति माह तक पहुंच सकती है।
  • अन्य सुविधाएं: सरकारी आवास, वाहन, ड्राइवर, चपरासी और सुरक्षा गार्ड जैसी सुविधाएं पद की गरिमा के साथ मिलती हैं।
City Magistrate
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info@divcomkonkan.in

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