प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों के लिए बड़ा अपडेट! केंद्र सरकार ने इस साल से जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बना दिया है। पुराने जमाने के लंबे-लंबे कागजी दौड़-धूप को अलविदा। अब सब कुछ ऑनलाइन पोर्टल पर होगा, जिसमें बायोमेट्रिक चेक और रियल-टाइम वेरिफिकेशन शामिल है। इसका फायदा यह कि जमीन विवाद आधे हो जाएंगे और रजिस्ट्री का काम आधे घंटे में निपटेगा। लेकिन ध्यान दें, बिना पांच जरूरी दस्तावेजों के दरवाजा बंद!

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नए नियम क्यों जरूरी थे?
पहले जमीन डील में फर्जीवाड़ा आम था। बेनामी प्रॉपर्टी, पुराने झगड़े और कोर्ट के चक्कर लाखों लोगों को परेशान करते थे। सरकार ने डिजिटल इंडिया को मजबूत करने के लिए ये कदम उठाया। हर रजिस्ट्री अब रेवेन्यू रिकॉर्ड से सीधे जुड़ेगी। खरीदार को जमीन का पूरा इतिहास मालिक कौन, कोई लोन बाकी है या नहीं, विवाद तो नहीं तुरंत पता चल जाएगा। पंजाब में जमाबंदी पोर्टल पर जाकर चेक करें, बस क्लिक से सारी डिटेल सामने। गलत कागजात पकड़े गए तो न रजिस्ट्री होगी, न पैसा वापस।
पांच अनिवार्य दस्तावेज जो हर डील बदल देंगे
रजिस्ट्री से पहले इन्हें जुटा लें, वरना समय बर्बाद। पहला, आधार कार्ड। खरीदार और विक्रेता दोनों का होना चाहिए। रजिस्ट्री ऑफिस में फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन से पहचान होगी, पुराना साइन वाला तरीका गया। दूसरा, पैन कार्ड। स्टांप ड्यूटी का हिसाब-किताब और टैक्स चेक के लिए बेसिक। बड़ी डील में टीडीएस कटौती भी इसी से। तीसरा, भूमि रिकॉर्ड यानी खसरा-खतौनी या जमाबंदी एक्सट्रैक्ट। यह जमीन का ताजा मालिकाना हक साबित करेगा, पुराने कागज काम नहीं आएंगे। चौथा, एनओसी या क्लीनेंस सर्टिफिकेट। बैंक से लोन क्लियर, कोर्ट से कोई केस न हो, लोकल बॉडी से मंजूरी सबका प्रूफ। पांचवां, स्टांप ड्यूटी की रसीद। यह पूरी तरह ऑनलाइन पेमेंट का सबूत, पंजाब में 6 से 7 फीसद तक चार्ज।
कैसे होगी आसान प्रक्रिया?
घर बैठे शुरूआत। राज्य के भूलेख या लैंड रिकॉर्ड पोर्टल पर लॉगिन करें। दस्तावेज स्कैन करके अपलोड कर एपॉइंटमेंट लें। ऑफिस पहुंचें, बायोमेट्रिक दें। सिस्टम अपने आप क्रॉस-चेक करेगा। मैच हो गया तो डिजिटल साइन से रजिस्ट्री तैयार। लुधियाना के रजिस्ट्री सेंटर्स में रोज सैकड़ों केस ऐसे निपट रहे। पहले हफ्तों लगते थे, अब मिनटों का खेल। पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों में सिस्टम फुल स्पीड पर।
फायदे तो हैं, चुनौतियां भी
अब खरीदार को धोखा मिलने का चांस न के बराबर। ट्रांसपेरेंसी से भरोसा बढ़ेगा, समय और पैसा बचेगा। विशेषज्ञ कहते हैं, साल के अंत तक 90 फीसद रजिस्ट्रेशन डिजिटल हो जाएंगे। लेकिन गांवों में डिजिटल नॉलेज की कमी समस्या। कई किसान अभी भी पुराने रास्ते तलाश रहे। सरकार ने हेल्प डेस्क और कॉमन सर्विस सेंटर्स बढ़ा दिए हैं। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए ऐप भी लॉन्च।
खरीदने वालों की सलाह
प्रॉपर्टी बूम के इस दौर में जल्दबाजी मत करें। ऑनलाइन वेरिफाई करें, वकील से बात करें। तहसील या सरकारी साइट्स पर जाकर अपडेट लें। ये नियम न सिर्फ प्रक्रिया आसान करेंगे, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखेंगे। लुधियाना जैसे शहरों में प्रॉपर्टी मार्केट गर्म है, स्मार्ट बनें!















