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Gardening Tips: झुलसती गर्मी में भी घर की छत पर उगेगी हरी सब्जियां, बस अपनाएं खाद-पानी का ये ‘सीक्रेट’ फॉर्मूला

गर्मियों की चढ़ती धूप में छत पर ताजी सब्जियां उगाना अब आसान! बस सही खाद-पानी फॉर्मूला अपनाएं। नोएडा बसंत उत्सव में एक्सपर्ट आनंद शर्मा ने बताया- फरवरी-मार्च में करेला, लौकी, तोरई, भिंडी लगाएं। भुरभुरी मिट्टी में गोबर खाद, केले छिलके फर्मेंट और ग्रीन नेट से 2-3 गुना पैदावार। जैविक टिप्स से हरी छत पाएं!

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गर्मियों की तलख धूप में भी घर की छत पर ताजी सब्जियां उगाना अब सपना नहीं रहा। होम गार्डनिंग का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है, खासकर शहरी इलाकों में जहां लोग जैविक और पौष्टिक भोजन चाहते हैं। लेकिन तेज गर्मी पौधों को झुलसा देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही खाद और पानी का ‘सीक्रेट फॉर्मूला’ अपनाकर आप लौकी, तोरई, भिंडी जैसी सब्जियां आसानी से उगा सकते हैं। नोएडा के 38वें बसंत उत्सव में प्लांट एक्सपर्ट आनंद शर्मा ने टीवी9 भारतवर्ष को दिए इंटरव्यू में यही टिप्स साझा किए।

गर्मी में प्लांटेशन की चुनौतियां

गर्मी में प्लांटेशन चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि जड़ें सूख जाती हैं और फूल गिर जाते हैं। लेकिन फरवरी-मार्च से शुरू करें तो 40-60 दिनों में हार्वेस्ट तैयार। आनंद शर्मा बताते हैं, “भुरभुरी मिट्टी में गोबर खाद मिलाएं। छत पर 6-8 घंटे धूप वाली जगह चुनें, लेकिन ग्रीन नेट से 30-50% छाया दें।” पहले मिट्टी तैयार करें: 50% सामान्य मिट्टी, 25% वर्मीकंपोस्ट या सड़ी गोबर खाद, और 25% कोकोपीट या राख मिलाएं। यह मिश्रण जलधारण करता है और जड़ों को ठंडक देता है। नालीदार ग्रो बैग या गमले इस्तेमाल करें।

करेला: गर्मी का ‘हीरो’ प्लांट

करेला उगाना सबसे आसान है। फरवरी-मार्च में नर्सरी से कटिंग या बीज लगाएं। बीज को 8-10 घंटे भिगोकर 1-1.5 इंच गहराई पर बोएं। बेल चढ़ाने के लिए बांस या रस्सी का सहारा दें। 45 दिनों में फल आने लगते हैं। खाद का सीक्रेट: केले के छिलके (30-40), 200 ग्राम गुड़ और 3-4 लीटर पानी फर्मेंट करें। 7 दिन बाद 6 गुना पानी मिलाकर हफ्ते में एक बार डालें। यह पोटैशियम से भरपूर होता है, जो फलन बढ़ाता है।

लौकी-तोरई: बेल वाली ‘फास्ट फूड’ सब्जियां

लौकी फरवरी-अप्रैल में लगाएं। हल्की, पानी निकालने वाली मिट्टी में बीज या कटिंग बोएं। तोरई मार्च-अप्रैल में तैयार होती है। दोनों के लिए जैविक खाद वाली दोमट मिट्टी बेस्ट। बीज भिगोकर 1 इंच गहराई पर लगाएं, सहारा दें। 40-60 दिनों में तोड़ाई शुरू। पानी का फॉर्मूला: सुबह-शाम ड्रिप से दें, मिट्टी नम रखें लेकिन भीगने न दें। ज्यादा पानी जड़ सड़न लाता है।

भिंडी: स्वाद और पैदावार का ‘स्टार’

भिंडी सभी की फेवरेट है। फरवरी-मार्च में 12 घंटे भिगोए बीज 1.5 इंच गहराई पर बोएं। दोमट-भुरभुरी मिट्टी में हफ्ते में जैविक खाद दें। 35-45 दिनों में ताजा भिंडी तैयार। पिंचिंग से झाड़ीदार प्लांट बनेगा, पैदावार दोगुनी। कीटों से बचाव के लिए नीम स्प्रे करें।

देखभाल के ‘गोल्डन टिप्स’

नर्सरी से प्लांट लाएं तो 1 दिन रेस्ट दें। मिट्टी सूखने पर ही पानी दें। DAP-मुक्त गोबर खाद फर्मेंटेड पानी (छिलकों का) से मिलाकर स्प्रे करें। पत्तियां पीली हों तो हटाएं। ग्रीन नेट लगाएं, राख मिलाकर नमी संतुलित रखें। फूल गिरने पर कैल्शियम राख डालें। इससे पैदावार 2-3 गुना बढ़ती है।

बसंत उत्सव से प्रेरणा

बसंत उत्सव जैसे इवेंट्स में 600+ किस्में देखकर प्रेरणा मिलती है। आनंद शर्मा कहते हैं, “यह न सिर्फ ताजी सब्जियां देता है, बल्कि पर्यावरण भी बचाता है।” दिल्ली-एनसीआर में छतों पर मिनी फार्म बन रहे हैं। आज से शुरू करें, गर्मी में भी हरी छत पाएं। 

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info@divcomkonkan.in

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