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Holika Dahan 2026: भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया, जानें दहन का सही मुहूर्त

होलिका दहन 2026 पर चंद्र ग्रहण (3 मार्च, दोपहर 3:20-शाम 6:46) और भद्रा (2 मार्च शाम 5:55 से 3 मार्च सुबह 4:46) ने भ्रम पैदा किया है। फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:55 से 3 मार्च शाम 5:07 तक। ज्योतिषी 3 मार्च शाम 6:22-8:50 बजे ग्रहणोत्तर मुहूर्त या 2 मार्च रात 12:50-2:38 पुच्छ भद्रा सुझाते हैं। धुलेंडी 4 मार्च निश्चित। स्थानीय पंडित से पुष्टि करें।

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Holika Dahan 2026: भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया, जानें दहन का सही मुहूर्त

इस साल होलिका दहन पर खगोलीय घटनाओं ने श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन 3 मार्च को लगने वाले पूर्ण चंद्र ग्रहण और भद्रा काल के कारण होलिका दहन की तारीख और समय को लेकर ज्योतिषियों में मतभेद है। एक ओर जहां कुछ पंचांग 2 मार्च को भद्रा पुच्छ में दहन की सलाह देते हैं, वहीं अन्य 3 मार्च को ग्रहण समाप्ति के बाद रात्रि मुहूर्त बताते हैं।

फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि और जटिलता

पंचांगों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च शाम 5:15-5:55 बजे शुरू होकर 3 मार्च दोपहर 4:33 या शाम 5:07 बजे तक चलेगी। स्नान-दान के लिए 3 मार्च प्रधान है, जबकि व्रत 2 मार्च को रखें। होलिका दहन पूर्णिमा रात्रि में ही शास्त्रोक्त है, लेकिन इस बार तीन चुनौतियां हैं – पूर्णिमा तिथि, रात्रि काल और भद्रा मुक्त समय। 3 मार्च को पूर्णिमा समाप्ति के करीब चंद्र ग्रहण लगेगा, जिससे सूतक काल शुभ कार्यों पर रोक लगा देगा।

चंद्र ग्रहण 2026 समय और सूतक का असर

साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण 3 मार्च दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:46-6:48 बजे समाप्त होगा। भारत में दिखाई देने के कारण सूतक 9 घंटे पूर्व सुबह 6:20-6:39 बजे से लागू हो जाएगा। इस दौरान मंदिर बंद, पूजा-पाठ वर्जित, केवल बुजुर्गों-गर्भवती महिलाओं को छोड़कर उपवास। ब्‍लड मून का दुर्लभ नजारा भी दिखेगा। ग्रहणोत्तर स्नान के बाद ही दहन संभव, लेकिन तब तक पूर्णिमा तिथि समाप्त हो चुकी हो सकती है।​

भद्रा काल की बाधा

भद्रा 2 मार्च शाम 5:56 बजे से 3 मार्च तड़के 4:46 या सुबह 5:28 बजे तक भूमिलोक में रहेगी। शास्त्रों में मुख भद्रा त्याज्य है, लेकिन पुच्छ भद्रा में दहन श्रेष्ठ। 2 मार्च प्रदोषकाल (शाम 6:24-6:36, मात्र 12 मिनट) या निशीथकाल पूर्व रात 12:50 से 2:02/2:38 बजे (1-1.5 घंटे) उत्तम। सुबह दहन वर्जित माना जाता है। 3 मार्च भद्रा समाप्ति के बाद सूतक शुरू होने से संकट।

ज्योतिषियों के मतभेद और सुझाव

जागरण के अनुसार 3 मार्च शाम 6:48 से रात 8:50 बजे ग्रहणोत्तर मुहूर्त सर्वोत्तम, स्नान-शुद्धि के बाद। टीवी9 और इंडिया टीवी शाम 6:22-8:50 बजे बताते हैं। वहीं एबीपी और हिंदुस्तान 2 मार्च रात 12:50-2:38 बजे पुच्छ भद्रा में सुझाते हैं, क्योंकि प्रदोषकाल में पूर्णिमा प्रभावी। कुछ मंदिर समितियां स्थानीय पंचांग से फैसला लेंगी। धुलेंडी निश्चित 4 मार्च।

धार्मिक महत्व और सावधानियां

होलिका दहन भक्त प्रह्लाद की रक्षा और हिरण्यकशिपु की होलिका की कहानी का प्रतीक है – बुराई पर अच्छाई की जीत। गुलमोहर-सरसों की चैड़ा जलाएं, आम के बत्ती से दीप। स्थानीय पंडित से दिल्ली-विशेष मुहूर्त लें। असमंजस में शास्त्रसम्मत 2 मार्च रात्रि या 3 मार्च ग्रहणोत्तर चुनें। होली की धूम 4 मार्च को बरकरार रहेगी।

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info@divcomkonkan.in

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