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किराए के मकान में रहने वालों की सैलरी में होगा बड़ा बदलाव! सरकार बदलने जा रही है HRA के नियम, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

सरकार HRA के नए नियम ला रही है। किराए के मकान में रहने वालों की सैलरी पर सीधा असर पड़ेगा। क्या आपकी जेब भरेगी या खाली होगी? पूरी डिटेल जानें और फायदा उठाएं।

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किराए के मकान में रहने वाले सैलरीड कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की तैयारी में है। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों में संशोधन प्रस्तावित हैं, जो टैक्स छूट की प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखते हैं। अगर आप सालाना एक लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो अब मकान मालिक से अपने रिश्ते की जानकारी देना अनिवार्य हो सकता है। यह कदम फर्जी दावों को रोकने के लिए उठाया जा रहा है और अप्रैल 2026 से लागू होने की उम्मीद है।

किराए के मकान में रहने वालों की सैलरी में होगा बड़ा बदलाव! सरकार बदलने जा रही है HRA के नियम, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर

नए नियम क्या कहते हैं?

पहले सिर्फ मकान मालिक का नाम, पता और PAN नंबर जमा करना काफी था। अब प्रस्तावित नियमों के तहत रिश्तेदार जैसे माता-पिता, पति या अन्य संबंधों का प्रमाण देना होगा। इसका मतलब है कि अगर किराया माता-पिता या भाई को दिया जा रहा है, तो संबंध साबित करने वाले दस्तावेज जरूरी होंगे। आयकर विभाग का उद्देश्य उन मामलों को पकड़ना है, जहां लोग जानबूझकर टैक्स बचाने के लिए रिश्तेदारों को किराया दिखाते हैं। छोटे किराएदारों, जिनका सालाना किराया एक लाख से कम है, पर इस बदलाव का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

जेब पर क्या होगा प्रभाव

HRA छूट तीन मुख्य आधारों पर मिलती है: वास्तविक HRA राशि, किराए से 10 प्रतिशत आय कटौती, और शहर के आधार पर 50 या 40 प्रतिशत सीमा। मेट्रो शहरों में 50 प्रतिशत तक छूट मिलती है, जबकि गैर-मेट्रो में 40 प्रतिशत। नए नियमों से क्लेम प्रक्रिया सख्त हो जाएगी, जिससे गलत दावों पर पेनल्टी लग सकती है। उदाहरणस्वरूप, लुधियाना जैसे शहर में 25 हजार रुपये मासिक किराया देने वाले को अगर मकान मालिक रिश्तेदार है, तो दस्तावेज न होने पर सालाना हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है। हालांकि, ईमानदार किराएदारों को सही कागजात रखने से कोई दिक्कत नहीं होगी। कुछ चर्चाओं में गैर-मेट्रो क्षेत्रों के लिए छूट सीमा 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात भी सामने आ रही है, जो पंजाब के निवासियों के लिए राहत लेकर आएगी।

किरायेदारी से जुड़े अन्य बदलाव

इसके साथ ही किराएदारों और मकान मालिकों के लिए कई नए प्रावधान आ रहे हैं। रेंट एग्रीमेंट अब डिजिटल स्टैंप पर आधारित होंगे। एडवांस रेंट रेजिडेंशियल मामलों में सिर्फ दो महीने तक सीमित रहेगा। किराया बढ़ोतरी 12 महीने बाद ही संभव होगी और इसके लिए 90 दिन का नोटिस देना जरूरी होगा। ये नियम किरायेदारों को अनुचित वृद्धि से बचाएंगे और विवादों को कम करेंगे। मकान मालिकों को भी PAN आधारित लेनदेन अनिवार्य होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

सलाह और आगे की राह

विशेषज्ञों की सलाह है कि सभी सैलरीड कर्मचारी अपने रेंट एग्रीमेंट को तुरंत अपडेट कर लें। संबंधित प्रमाण जैसे आधार कार्ड या रिश्ते के सर्टिफिकेट तैयार रखें। लुधियाना में रियल एस्टेट बाजार तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए स्थानीय निवासियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। सरकार ने इन प्रस्तावों पर सार्वजनिक राय मांगी है, जो अंतिम नियमों को आकार देगी। कुल मिलाकर, ये बदलाव टैक्स प्रणाली को मजबूत बनाएंगे, लेकिन अनुपालन न करने वालों की जेब ढीली हो सकती है। सही तैयारी से आप अपनी टैक्स बचत को सुरक्षित रख सकते हैं।

Author
info@divcomkonkan.in

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