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बचत खाता है तो जरूर जान लें RBI का नया नियम! मिनिमम बैलेंस न होने पर अब कितना लगेगा जुर्माना? देखें ताजा अपडेट

आरबीआई के नए नियमों से सेविंग अकाउंट धारकों को बड़ी राहत! 1 जनवरी 2026 से मिनिमम बैलेंस न होने पर मनमाना जुर्माना बंद। SBI में मेट्रो के लिए ₹3000, HDFC में ₹10,000 जरूरी। अब फाइन सेवाओं के अनुपात में, पहले अलर्ट अनिवार्य। जीरो बैलेंस अकाउंट्स पर कोई पेनल्टी नहीं। नियम चेक करें, फाइन से बचें!

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बचत खाता है तो जरूर जान लें RBI का नया नियम! मिनिमम बैलेंस न होने पर अब कितना लगेगा जुर्माना? देखें ताजा अपडेट

हम सभी के पास सेविंग बैंक अकाउंट होता है, जहां हम अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखते हैं। लेकिन बैंक के सख्त नियमों के कारण कई बार न्यूनतम बैलेंस (मिनिमम बैलेंस) न रख पाने पर भारी जुर्माना लग जाता है। अच्छी खबर यह है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने हाल ही में ग्राहक हितैषी बदलाव किए हैं। 1 जनवरी 2026 से लागू हो रहे इन नए नियमों के तहत मिनिमम बैलेंस न होने पर मनमाना फाइन नहीं लगेगा। अब जुर्माना केवल प्रदान की गई सेवाओं के अनुपात में ही वसूला जाएगा और पहले चेतावनी अनिवार्य होगी। इससे करोड़ों खाताधारकों को बड़ी राहत मिलेगी।

प्रमुख बैंकों के मिनिमम बैलेंस नियम

भारत की प्रमुख बैंकों में सेविंग अकाउंट के लिए न्यूनतम बैलेंस अलग-अलग है, जो मेट्रो/शहरी, सेमी-अर्बन और ग्रामीण क्षेत्रों पर निर्भर करता है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI), देश की सबसे बड़ी बैंक, में मेट्रो शहरों के ग्राहकों को कम से कम 3,000 रुपये, छोटे शहरों में 2,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 1,000 रुपये रखना जरूरी है। प्राइवेट सेक्टर की दिग्गज HDFC बैंक में यह राशि मेट्रो में 10,000 रुपये, छोटे शहरों में 5,000 रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 2,500 रुपये है। इसी तरह, ICICI बैंक में मेट्रो के लिए 10,000 रुपये, शहरी क्षेत्रों में 5,000 रुपये और ग्रामीण में 2,000 रुपये अनिवार्य हैं।

पब्लिक सेक्टर के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा में मेट्रो/शहरी क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये तथा ग्रामीण में 1,000 रुपये रखना पड़ता है। बैंक ऑफ इंडिया में भी यही नियम लागू है- मेट्रो में 2,000 रुपये और ग्रामीण/छोटे शहरों में 1,000 रुपये। प्राइवेट इंडसइंड बैंक थोड़ा अलग है, जहां सामान्य खातों के लिए 10,000 रुपये जरूरी हैं, जबकि श्रेणी-C खातों में 5,000 रुपये पर्याप्त हैं। ये आंकड़े बैंकों की आधिकारिक नीतियों पर आधारित हैं और समय-समय पर बदल सकते हैं। जीरो बैलेंस अकाउंट्स पर ये नियम लागू ही नहीं होते, जो गरीब और छोटे खाताधारकों के लिए वरदान हैं।

जुर्माने की पुरानी vs नई व्यवस्था

पहले मिनिमम बैलेंस न होने पर बैंक 500 से 5,000 रुपये तक का फाइन काट लेते थे, जो खाते की राशि का 5-10% तक हो सकता था। उदाहरण के लिए, SBI में 3,000 रुपये से कम होने पर 300-500 रुपये का चार्ज लगता था। लेकिन आरबीआई के नए दिशानिर्देशों से यह बदल गया है। अब फाइन केवल उन सेवाओं पर आधारित होगा जो ग्राहक इस्तेमाल करते हैं, जैसे चेकबुक या ATM कार्ड।

साथ ही, कम बैलेंस पर एसएमएस/ईमेल अलर्ट भेजना अनिवार्य है। नेगेटिव बैलेंस होने पर भी अतिरिक्त नुकसान सीमित रहेगा। 1 जनवरी 2026 से FD और सेविंग अकाउंट से जुड़े कुल 8 बड़े नियम बदल चुके हैं, जिनमें ब्याज दरों की पारदर्शिता और पेनल्टी कैप शामिल हैं।

ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

अगर आप फाइन से बचना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने बैंक की ऐप या वेबसाइट पर जाकर क्षेत्र-विशेष नियम चेक करें। अलर्ट सेटिंग्स चालू रखें और ऑटो-स्वीप सुविधा का लाभ लें, जो अतिरिक्त पैसे को FD में बदल देती है। दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में रहने वाले खाताधारकों को प्राइवेट बैंकों में ज्यादा सतर्क रहना चाहिए, जहां बैलेंस सीमा ऊंची है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये बदलाव ग्राहक-केंद्रित बैंकिंग को बढ़ावा देंगे। अधिक अपडेट्स के लिए बैंक शाखा से संपर्क करें या टेलीग्राम/व्हाट्सएप ग्रुप जॉइन करें।

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info@divcomkonkan.in

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