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बुढ़ापे का सहारा! हर महीने ₹1000 की गारंटीड पेंशन देगी सरकार, जानें इस योजना में आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया

असंगठित मजदूरों के लिए UP सरकार की योजना 60+ आयु वालों को ₹1000 मासिक पेंशन देती है। लेबर कार्ड धारकों के लिए पात्र, दो साल बाद ₹1250 तक बढ़ोतरी। आधार, बैंक विवरण सहित दस्तावेज जमा कर श्रम विभाग में आवेदन करें-आर्थिक सुरक्षा का सरकारी वादा!

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बुढ़ापे का सहारा! हर महीने ₹1000 की गारंटीड पेंशन देगी सरकार, जानें इस योजना में आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया

वृद्धावस्था में आर्थिक तंगी से जूझ रहे असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (महात्मा गांधी पेंशन योजना) बुजुर्गों को आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम बन रही है। इस योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के पात्र मजदूरों को हर महीने ₹1000 की पेंशन सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है। राज्य सरकार का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के उन श्रमिकों को सहारा देना है, जो जीवन भर कठिन परिश्रम के बाद बुढ़ापे में लाचार न रहें।

पात्रता के मुख्य मानदंड

यह योजना विशेष रूप से उन मजदूरों के लिए है जिनके पास लेबर कार्ड (श्रमिक रजिस्ट्रेशन कार्ड) मौजूद है। पात्रता के मानदंड सख्त हैं – आयु न्यूनतम 60 वर्ष होनी चाहिए, परिवार गरीबी रेखा से नीचे (BPL) होना चाहिए, और व्यक्ति केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य पेंशन योजना का लाभ न उठा रहा हो। योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लाभार्थी का निवासी प्रमाण भारत का होना अनिवार्य है। यदि लाभार्थी पति की मृत्यु हो जाती है, तो पेंशन राशि पत्नी को हस्तांतरित कर दी जाती है, जिससे परिवार की महिलाओं को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है।

योजना के प्रमुख लाभ

योजना के लाभ लंबे समय तक चलने वाले हैं। दो वर्ष बाद पेंशन राशि में वृद्धि कर दी जाती है, जो अधिकतम ₹1250 तक पहुंच सकती है। यह बढ़ोतरी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क या प्रीमियम के होती है, जो योजना को मजदूर-केंद्रित बनाती है। उत्तर प्रदेश जैसे कृषि-प्रधान राज्य में, जहां असंगठित मजदूरों की संख्या करोड़ों में है, यह योजना वृद्धजनों के लिए वरदान साबित हो रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लाखों लाभार्थी इस स्कीम से जुड़ चुके हैं, और 2026 में नई अपडेट्स के साथ पंजीकरण बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

आवश्यक दस्तावेजों की सूची

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची विस्तृत है ताकि सत्यापन प्रक्रिया सुगम हो। आवेदक को आधार कार्ड, बैंक पासबुक (खाता विवरण सहित), निवास प्रमाण-पत्र, लेबर कार्ड, और केंद्र-राज्य सरकार से किसी अन्य पेंशन न मिलने का प्रमाण-पत्र जमा करना पड़ता है। इसके अलावा, हर साल लाइफ सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना जरूरी है।

यदि पेंशनभोगी की मृत्यु हो जाती है, तो परिवारजनों को एक माह के अंदर श्रम विभाग को सूचित करना अनिवार्य है। अन्य दस्तावेजों में पासपोर्ट साइज फोटो, राशन कार्ड और सक्रिय मोबाइल नंबर शामिल हैं। ये दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल sspy-up.gov.in या ऑफलाइन श्रम कार्यालयों पर जमा किए जा सकते हैं।

आवेदन प्रक्रिया

आवेदन प्रक्रिया सरल रखी गई है। इच्छुक मजदूर नजदीकी श्रम विभाग, ई-मित्र केंद्र या सामाजिक कल्याण कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। फॉर्म भरने के बाद दस्तावेज संलग्न कर जमा करें – सत्यापन के 30-45 दिनों में पेंशन शुरू हो जाती है। ऑनलाइन विकल्प के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का pfrda.org.in या nfsa.gov.in जैसे पोर्टल उपयोगी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इंडिया के दौर में आधार-लिंक्ड भुगतान से भ्रष्टाचार कम हुआ है, और DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) से राशि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच रही है।

चुनौतियां और भविष्य की दिशा

हालांकि, चुनौतियां बाकी हैं। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी और दस्तावेजों की समस्या कई पात्र मजदूरों को योजना से वंचित रखती है। सरकार ने 2026 बजट में जागरूकता अभियान और मोबाइल पेंशन वैन की घोषणा की है। दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों में रहने वाले यूपी निवासी भी पात्र हैं – स्थानीय तहसील या pmjandhan.gov.in से जांचें। यह योजना न केवल बुढ़ापे का सहारा है, बल्कि सामाजिक न्याय की मिसाल भी। अधिक जानकारी के लिए श्रम विभाग हेल्पलाइन 1800-XXX-XXXX पर संपर्क करें।

Author
info@divcomkonkan.in

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