
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, ने फार्मा सेक्टर में अपना दांव और मजबूत कर दिया है। हालिया डिस्क्लोजर के मुताबिक, LIC ने पिछले तीन महीनों (नवंबर 2025 से फरवरी 2026) में सिप्ला लिमिटेड के 2.03% अतिरिक्त शेयर खुले बाजार से खरीदे, जिससे इसकी कुल हिस्सेदारी 7.05% से बढ़कर 9.09% हो गई। यह निवेश ऐसे समय में आया जब सिप्ला के शेयर निचले स्तर पर ट्रेड कर रहे थे, जो LIC के लॉन्ग-टर्म कॉन्फिडेंस को दर्शाता है।
20 फरवरी तक सिप्ला का शेयर ₹1,338 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो 52-सप्ताह निचले स्तर के करीब है। कंपनी का मार्केट कैप ₹1,06,595 करोड़ है। LIC की यह रणनीतिक खरीदारी Q3 FY26 के कमजोर रिजल्ट्स के बाद हुई, जहां कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट उम्मीद से नीचे रहा। फिर भी, सिप्ला के मजबूत फंडामेंटल्स जैसे ROCE 22.7% और ROE 17.8% ने LIC को आकर्षित किया। सिप्ला के अलावा, LIC ने जनवरी 2026 में सन फार्मा में हिस्सेदारी 5.004% तक बढ़ाई। यह फार्मा सेक्टर में LIC की बढ़ती रुचि दिखाता है, जो हेल्थकेयर को डिफेंसिव इन्वेस्टमेंट मानता है।
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USFDA की चेतावनियां
सिप्ला को हाल में USFDA से झटके लगे। नवंबर 2025 में पार्टनर फार्माथेन के ग्रीस प्लांट पर इंस्पेक्शन के दौरान 9 फॉर्म 483 ऑब्जर्वेशंस मिले, जिनमें कंटैमिनेशन कंट्रोल, एसेप्टिक प्रोसेस और लैब प्रक्रियाओं में कमियां बताई गईं। इससे लैन्रियोटाइड इंजेक्शन (Somatuline Depot का जेनरिक) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जो US में $898 मिलियन की सेल्स वाली प्रोडक्ट है। मई 2025 में बेंगलुरु प्लांट पर भी एक ऑब्जर्वेशन मिला था। इनसे शेयर में 4.5% की गिरावट आई।
ब्रोकरेज व्यू: मिक्स्ड सिग्नल्स
Q3 के बाद कई ब्रोकरेज ने टारगेट कटे। जेफरीज ने ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग दी, TP ₹1,170; FY26 EBITDA मार्जिन 175-300 bps घटाया। गोल्डमैन सैक्स ने ‘सेल’ रखा, TP ₹1,275 (पहले ₹1,385); gRevlimid की कमी से FY27 EBITDA ग्रोथ कम। HSBC, BofA ने भी कटौती की। दूसरी ओर, औसत एनालिस्ट TP ₹1,642-1,692 (4-16% अपसाइड), हाई ₹1,827, लो ₹1,170। 2026 टारगेट्स ₹1,822-1,885 तक। ट्रेडिंगव्यू पर 37 एनालिस्ट्स का औसत ₹1,447।
क्या रॉकेट बनेगा स्टॉक?
LIC जैसे संस्थागत निवेशक की एंट्री से इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस बढ़ता है, जो वोलेटिलिटी कम करता है। सिप्ला की R&D पाइपलाइन, रेस्पिरेटरी-ऑन्कोलॉजी फोकस मजबूत हैं। लेकिन USFDA, मार्जिन प्रेशर और ग्लोबल ट्रेंड्स रिस्क हैं। विशेषज्ञ मीडियम-टर्म (1-2 साल) में ग्रोथ देखते हैं, अगर रेगुलेटरी क्लियर हो। शॉर्ट-टर्म में सतर्क रहें।















