भारत में डिजिटल क्रिएटिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एडोबी ने एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने प्रमुख सॉफ्टवेयर जैसे फोटोशॉप, एक्रोबेट और फायरफ्लाई एआई को चुनिंदा शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों के लिए पूरी तरह मुफ्त कर दिया है। यह घोषणा हाल ही में आयोजित एक प्रमुख एआई समिट में की गई, जो युवाओं को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।

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युवाओं को सशक्त बनाने की पहल
एडोबी का यह प्रयास देश भर के लाखों छात्रों को उच्च स्तरीय उपकरण उपलब्ध कराएगा। फोटोशॉप से लेकर जेनरेटिव एआई तक, ये टूल्स छात्रों को प्रोफेशनल स्तर का काम करने में सक्षम बनाएंगे। कंपनी ने स्कूलों और कॉलेजों में विशेष लैब्स स्थापित करने की योजना बनाई है, जहां छात्र न केवल सॉफ्टवेयर का उपयोग करेंगे बल्कि प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र भी प्राप्त करेंगे। यह कदम एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर केंद्रित है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत 2030 तक लाखों नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य है, और एडोबी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
टूल्स के फायदे और विशेषताएं
फायरफ्लाई एआई छात्रों को सुरक्षित और व्यावसायिक उपयोग योग्य सामग्री तैयार करने की क्षमता देगा। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न एआई मॉडल्स को एकीकृत करता है, जिससे क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे हो सकें। एक्रोबेट दस्तावेज प्रबंधन को आसान बनाएगा, जबकि फोटोशॉप डिजाइन और एडिटिंग में निपुणता लाएगा। पहले ये टूल्स महंगे सब्सक्रिप्शन पर उपलब्ध थे, लेकिन अब योग्य संस्थानों के छात्रों के लिए कोई लागत नहीं। छात्र छोटे वीडियो, रील्स, शॉर्ट फिल्म्स और ग्राफिक्स बना सकेंगे, जो सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में कारगर साबित होंगे।
कौन ले सकता है लाभ?
यह सुविधा केवल मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े छात्रों तक सीमित है। देश के हजारों स्कूलों और सैकड़ों कॉलेजों को लक्ष्य बनाया गया है। छात्रों को व्यक्तिगत रूप से आवेदन करने की बजाय अपने संस्थान के प्रशासन से संपर्क करना होगा। संस्थान कंपनी के टूलकिट के माध्यम से पहुंच प्रदान करेंगे, जिसमें कोर्सवर्क और ट्रेनिंग शामिल होगी। डिजिटल स्किलिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी से उद्योग-मान्य प्रमाणपत्र मिलेंगे, जो नौकरी बाजार में बढ़त देंगे।
समिट का महत्व और भविष्य की दृष्टि
समिट के दौरान भारतीय लोककथाओं पर आधारित एआई जनरेटेड शॉर्ट फिल्म्स का प्रदर्शन भी किया गया, जो सांस्कृतिक धरोहर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का उदाहरण है। यह पहल देश को वैश्विक एआई इकोसिस्टम में अग्रणी बनाने की कोशिश है। छात्रों के लिए यह सुनहरा मौका है, विशेष रूप से कंटेंट क्रिएटर्स, डिजाइनरों और मीडिया उत्साहीयों के लिए। हालांकि, सभी संस्थानों तक पहुंच सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण होगा, इसलिए जागरूकता अभियान जरूरी हैं। आने वाले समय में इससे हजारों युवा उद्यमी और पेशेवर उभरेंगे, जो भारत की क्रिएटिव अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे।
यह घोषणा न केवल शिक्षा को बदल रही है बल्कि भविष्य के क्रिएटर्स को तैयार कर रही है। छात्र अभी से अपने संस्थानों से जुड़ाव बढ़ाएं और इस अवसर का लाभ उठाएं।















