भारतीय कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आ चुका है। अब खेतों का पारंपरिक लेखपाल सर्वे खत्म। इसके बजाय साधारण मोबाइल ऐप से फसल का डिजिटल सर्वे होगा, जिससे खराब फसल का मुआवजा किसान के बैंक खाते में तुरंत पहुंचेगा। यह नई व्यवस्था रबी सीजन 2026 में पंजाब समेत कई राज्यों में पूरी तरह लागू हो गई है। किसानों को सरकारी योजनाओं जैसे फसल बीमा और पीएम किसान का लाभ अब पहले से कहीं तेजी से मिलेगा।

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योजना की पूरी जानकारी!
कृषि मंत्रालय ने पिछले साल इस डिजिटल क्रॉप सर्वे को शुरू किया था। हर खेत के खसरा नंबर पर फसल का विवरण मोबाइल से दर्ज होता है। गेहूं, धान जैसी प्रमुख फसलों का क्षेत्रफल, बुआई की तारीख और सिंचाई का तरीका ऐप में अपलोड कर किसान खुद या पंचायत सहायक इसे पूरा कर सकते हैं। पहले मैनुअल नोटबुक सर्वे में गलतियां होती थीं, जो अनुदान में देरी का कारण बनती थीं। अब जीपीएस से फोटो और लोकेशन के साथ डेटा रीयल टाइम में अपलोड होता है। पंजाब में अमृतसर और लुधियाना जैसे जिलों में हजारों किसान इसे अपना चुके हैं।
ऐप से सर्वे कैसे करें?
प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। गूगल प्ले स्टोर से कृषि स्टैक या राज्य का डिजिटल क्रॉप सर्वे ऐप डाउनलोड करें। मोबाइल नंबर या किसान आईडी से लॉगिन करें। खेत पहुंचकर फसल का फोटो लें, क्षेत्रफल डालें, सिंचाई प्रकार चुनें और सबमिट पर क्लिक। अगर कोई गलती हो तो सुधार का मौका भी मिलता है। रबी 2026 के लिए जनवरी से फरवरी तक सर्वे चल रहा है। मार्च तक सारा डेटा अपडेट हो जाएगा। पंजाब कृषि विभाग ने गांव-गांव कैंप लगाकर ट्रेनिंग दी है। बिना स्मार्टफोन वाले किसानों के लिए कृषि सखी या सीएससी सेंटर मदद करेंगे।
किसानों को क्या फायदा?
सबसे बड़ा लाभ यह है कि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर बीमा क्लेम या मुआवजा 48 घंटों में खाते में आ जाता है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से कोई बिचौलिया नहीं। उदाहरण के तौर पर, सूखे या बाढ़ में प्रभावित किसानों को अब इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साथ ही खरीफ फसल खरीद, सब्सिडी और नीति बनाने में सटीक डेटा मिलेगा। पंजाब के गेहूं उत्पादक किसानों के लिए यह वरदान है, क्योंकि सर्वे न करने पर योजनाओं से वंचित होने का डर था। युवा रोजगार सेवक भी ऐप से सर्वे कर कमाई कर रहे हैं।
चुनौतियां और समाधान
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट या स्मार्टफोन की कमी एक समस्या हो सकती है। लेकिन सरकार ने किसान उत्पादक संगठन, महिला समूहों और स्थानीय केंद्रों से सहायता का इंतजाम किया है। डेटा की गोपनीयता के लिए एन्क्रिप्शन और साइबर सुरक्षा नियम सख्त हैं। केवल अधिकृत अधिकारी ही डेटा देख सकते हैं। पंजाब में अभी तक लाखों एकड़ का सर्वे पूरा हो चुका है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे उत्पादकता बढ़ेगी और बाजार लिंकेज मजबूत होगा।
भविष्य की राह
यह व्यवस्था डिजिटल इंडिया का हिस्सा बनकर कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। आने वाले खरीफ 2026 तक पूरे देश में यह पूरी तरह फैल जाएगी। लुधियाना के किसान बलवीर सिंह ने कहा, ऐप ने काम आसान कर दिया। मुआवजा भी तुरंत मिला। सरकार का लक्ष्य लाखों किसान आईडी बनाना है, ताकि हर लाभ सीधे पहुंचे। यह बदलाव न केवल डेटा सुधारता है, बल्कि किसानों को सशक्त भी बनाता है।















