केंद्र सरकार ने पारंपरिक कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना शुरू की है, जिसमें सिलाई मशीन से जुड़ी सहायता महिलाओं के लिए सबसे बड़ा अवसर लेकर आई है। इस पहल से दर्जी कौशल वाली महिलाएं न केवल ₹15,000 की सीधी आर्थिक मदद पा रही हैं, बल्कि मुफ्त ट्रेनिंग के साथ दैनिक भत्ता भी प्राप्त कर रही हैं। घर बैठे टेलरिंग व्यवसाय शुरू करने का यह मौका लाखों परिवारों की जिंदगी बदलने वाला साबित हो रहा है। योजना का फोकस पारंपरिक शिल्पों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है, ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनें।

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योजना के प्रमुख लक्ष्य
यह कार्यक्रम सूक्ष्म उद्यम मंत्रालय के तहत चल रहा है और इसका मकसद कारीगरों को सशक्त बनाना है। सिलाई के क्षेत्र में महिलाओं को टूलकिट के रूप में ₹15,000 तक की राशि दी जाती है, जिससे वे अपनी पसंद की सिलाई मशीन, कैंची, आयरन बॉक्स जैसा उपकरण खरीद सकें। ट्रेनिंग अवधि में प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड भी सुनिश्चित किया गया है। पहले 5 से 7 दिन की बेसिक ट्रेनिंग होती है, उसके बाद एडवांस्ड कोर्स उपलब्ध है। इस तरह महिलाएं न केवल कौशल सीखती हैं, बल्कि व्यवसाय चलाने की पूरी क्षमता हासिल कर लेती हैं। योजना से जुड़ने पर प्रमाण पत्र और पहचान पत्र भी मिलता है, जो आगे लोन जैसी सुविधाओं का द्वार खोलता है।
कौन ले सकता है लाभ?
सिर्फ सिलाई का बुनियादी ज्ञान रखने वाली महिलाएं ही पात्र हैं। उम्र 20 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। पारिवारिक आय सीमित होने पर प्राथमिकता मिलती है, खासकर विधवाओं, विकलांगों या गरीब घरों की महिलाओं को। पहले कभी इस योजना का लाभ न ले चुकीं ही आवेदन कर सकती हैं। सिलाई का अनुभव या प्रमाण पत्र होना जरूरी है, ताकि ट्रेनिंग प्रभावी हो सके। शहरी हो या ग्रामीण क्षेत्र, हर जगह यह सुविधा उपलब्ध है। पंजाब जैसे राज्य में जहां हस्तशिल्प मजबूत हैं, यहां की महिलाएं तेजी से इससे जुड़ रही हैं।
आवेदन की सरल प्रक्रिया
मोबाइल फोन से महज 5 मिनट में पूरा काम हो जाता है। सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आधार और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें। व्यक्तिगत जानकारी भरें, व्यवसाय के रूप में दर्जी चुनें। बैंक खाता विवरण और फोटो अपलोड करें। ओटीपी से सत्यापन पूरा होने पर आवेदन स्वीकार हो जाता है। नजदीकी सामान्य सेवा केंद्र पर जाकर बायोमेट्रिक पूरा करवाएं। आवेदन आईडी से स्थिति जांचते रहें। ट्रेनिंग सेंटर आवंटन के बाद टूलकिट की राशि सीधे खाते में आ जाती है। आसानी के लिए हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध हैं।
महिलाओं पर दूरगामी असर
पिछले कुछ महीनों में हजारों महिलाओं ने इससे टेलरिंग व्यवसाय थामा है। घर से ही साड़ी, कुर्ती सिलकर रोज ₹500 से ₹1000 कमा रही हैं। आगे ₹1 लाख तक का सस्ता लोन मिलने से दुकान खोलने का सपना भी साकार हो रहा है। डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त प्रोत्साहन भी जोड़ा गया है। जालंधर की कई महिलाएं बता रही हैं कि यह योजना ने उनकी जिंदगी में नई उम्मीद जगाई है। हालांकि जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें। सरकार का लक्ष्य 2027-28 तक लाखों कारीगरों को जोड़ना है।
आगे की राह
यह योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत स्तंभ है। महिलाएं अभी आवेदन करें, क्योंकि अवसर सीमित हैं। कौशल विकास से न केवल आय बढ़ेगी, बल्कि पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभाना आसान हो जाएगा। पारंपरिक कला को संजोने का यह प्रयास देश की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा।















