उत्तर प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की प्रतीक्षा जल्द ही समाप्त होने वाली है। राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 2025-26 सत्र की राशि फरवरी के मध्य से सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में पहुंचने लगी है। आधिकारिक वेबसाइट पर स्टेटस जांचने का विकल्प पूरी तरह सक्रिय है, जिससे छात्र अपनी स्थिति तुरंत जान सकते हैं। फेज-1 जनवरी में संपन्न होने के बाद अब फेज-2 की बारी है, और छात्रों को सलाह दी जा रही है कि वे देरी न करें बल्कि अभी अपनी डिटेल्स पर नजर डाल लें।

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पेमेंट शेड्यूल का नया अपडेट
सरकार ने स्कॉलरशिप वितरण को चरणबद्ध तरीके से किया है। पहले चरण में जनवरी के आखिर से कई लाभार्थियों को धनराशि मिल चुकी है, खासकर प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक के फ्रेश तथा रिन्यूअल मामलों में। फरवरी 9 से दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसमें नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के छात्र शामिल हैं।
फॉर्म सुधार की अंतिम समय सीमा 13 फरवरी थी, उसके बाद संस्थानों को 18 फरवरी तक सत्यापित फॉर्म जमा करने थे। अब 27 फरवरी तक तकनीकी जांच पूरी हो रही है, जबकि डिस्ट्रिक्ट स्तर पर डेटा लॉकिंग 10 मार्च तक होगी। अंतिम हस्तांतरण 18 मार्च को निर्धारित है, लेकिन अधिकांश राशि इसी महीने छात्रों के खातों में आ जाएगी। एससी-एसटी वर्ग को प्राथमिकता मिल रही है, उसके बाद सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक श्रेणी के छात्रों का नंबर है।
स्टेटस कैसे जांचें?
छात्रों को सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर पहुंचना चाहिए। वहां स्टेटस सेक्शन में जाकर 2025-26 सत्र का चयन करें। रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म तिथि और सत्यापन कोड भरने पर पूरी जानकारी सामने आ जाती है। यदि स्थिति फॉरवर्डेड, वेरिफाइड या बैंक वेरिफाइड दिख रही है, तो पेमेंट की पुष्टि समझें। इसके अलावा पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम की वेबसाइट पर जाकर अकाउंट नंबर और बैंक आईएफएससी कोड डालें, ओटीपी सत्यापन के बाद भुगतान विवरण मिलेगा। पेंडिंग दिखने पर तुरंत अपने स्कूल या कॉलेज से संपर्क करें, क्योंकि संस्थान स्तर पर ही समस्या हल हो सकती है।
आम चुनौतियां और समाधान
कई छात्रों को आधार और बैंक खाते की लिंकिंग में बाधा आ रही है। इसके अलावा उपस्थिति प्रतिशत कम होना, आय प्रमाण पत्र में त्रुटि या फॉर्म जमा करने में देरी प्रमुख कारण हैं। यदि उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम है, तो मेडिकल प्रमाण पत्र से छूट मिल सकती है। डीबीटी प्रक्रिया में एनपीसीआई मैपिंग जरूरी है, इसलिए बैंक से संपर्क कर लें। पिछले साल के लंबित केस भी इसी चक्र में शामिल हो रहे हैं। छात्र जागरूक रहें, क्योंकि एक छोटी सी चूक पूरी स्कॉलरशिप खोने का कारण बन सकती है।
योजना का व्यापक प्रभाव
यह स्कॉलरशिप प्री-मैट्रिक छात्रों को मासिक 200 से 1200 रुपये तक और पोस्ट-मैट्रिक को कोर्स के अनुसार हजारों रुपये प्रदान करती है। उत्तर प्रदेश के निवासी छात्र, चाहे सरकारी या निजी संस्थानों में पढ़ें, लाभ उठा सकते हैं। राज्य सरकार का डिजिटल प्लेटफॉर्म इस प्रक्रिया को पारदर्शी बना रहा है, जिससे गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित न रहें। फरवरी 21 तक के आंकड़ों से साफ है कि प्रक्रिया तेज गति पकड़ चुकी है। छात्र हेल्पलाइन नंबरों पर भी मदद ले सकते हैं। अभी जांचें, भविष्य सुरक्षित करें।















