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ATM से पैसे निकालना हुआ और भी महंगा! 2026 के नए नियम लागू, फ्री लिमिट खत्म होने के बाद अब कटेगा इतना चार्ज; देखें नई लिस्ट

फ्री लिमिट खत्म, SBI से PNB तक सभी बैंकों की नई चार्ज लिस्ट! महीने में 5 बार बाद हर निकासी पर ₹20-25 कटेगा। आपका बैंक कौन सा? अभी चेक करें, वरना जेब ढीली!

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भारत के लाखों बैंक खाताधारकों के लिए एटीएम से पैसे निकालना अब एक महंगा सौदा बन गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले साल मई से नए नियम लागू किए हैं, जिनके तहत फ्री ट्रांजेक्शन की सीमा खत्म होने पर हर निकासी पर 23 रुपये तक का चार्ज लगने लगा है। यह बदलाव खासकर मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है, जहां हर महीने केवल तीन फ्री कैश निकासी की अनुमति है। नॉन-मेट्रो इलाकों में यह संख्या पांच है, लेकिन उसके बाद भी हर अतिरिक्त ट्रांजेक्शन पर भारी पड़ रहा है।

ATM से पैसे निकालना हुआ और भी महंगा! 2026 के नए नियम लागू, फ्री लिमिट खत्म होने के बाद अब कटेगा इतना चार्ज; देखें नई लिस्ट

नए नियमों का पूरा खुलासा

इन नियमों के मुताबिक, दूसरे बैंक के एटीएम पर कैश विथड्रॉल या बैलेंस चेक करने की फ्री सीमा पार होते ही फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये और नॉन-फाइनेंशियल पर 11 रुपये का चार्ज लगता है। जीएसटी अलग से जुड़ जाता है। अपने बैंक के एटीएम पर कैश निकालना अभी भी ज्यादातर मामलों में मुफ्त है, लेकिन लोग अक्सर दूसरे बैंकों के एटीएम पर निर्भर हो जाते हैं। कैश डिपॉजिट करने वाली मशीनों पर अभी कोई शुल्क नहीं है, जो एक राहत की बात है। ये नियम सभी प्रमुख बैंकों जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और पीएनबी पर लागू हैं।

किन बैंकों पर कितना असर

एसबीआई और एचडीएफसी जैसे निजी और सरकारी बैंकों में फ्री लिमिट के बाद कैश निकासी पर 20 से 25 रुपये तक चार्ज वसूला जा रहा है। बैलेंस इंक्वायरी के लिए भी 8 से 10 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। पंजाब नेशनल बैंक में फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर 23 रुपये और नॉन-फाइनेंशियल पर 11 रुपये फिक्स हैं। आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक भी इसी पैटर्न पर चल रहे हैं। साल 2026 में कुछ बैंकों ने इन्हें और सख्त कर दिया, जिससे ग्रामीण और छोटे शहरों के लोग भी चिंतित हैं।

क्यों बढ़े चार्ज, असली वजह

रिजर्व बैंक का कहना है कि एटीएम मशीनों के रखरखाव, सिक्योरिटी और नई तकनीक लगाने की लागत बढ़ गई है। पहले 21 रुपये का चार्ज था, जो अब बढ़कर 23 हो गया। महंगाई के इस दौर में बैंकों को अपनी लागत वसूलनी पड़ रही है। पंजाब के लुधियाना जैसे औद्योगिक हब में छोटे व्यापारी, किसान और दिहाड़ी मजदूर रोजाना एटीएम पर जाते हैं। वहां फ्री लिमिट जल्दी खत्म हो जाती है, जिससे उनका बजट बिगड़ रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन जहां इंटरनेट या स्मार्टफोन की कमी है, वहां दिक्कतें कम नहीं होंगी।

यह भी देखें- UPI Charge Truth: क्या हर UPI ट्रांजेक्शन पर लगेगा चार्ज? क्या है खबर जानें

ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर

हर महीने अगर कोई व्यक्ति पांच-छह बार अतिरिक्त निकासी करता है, तो 100-150 रुपये का नुकसान हो जाता है। पीएम जन धन योजना के खाताधारकों को भी इससे मुक्ति नहीं मिली। एक अनुमान के मुताबिक, देशभर में करोड़ों ट्रांजेक्शन प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां यूपीआई का इस्तेमाल कम है, वहां कैश की मांग बनी हुई है। बैंकों ने एसएमएस अलर्ट का वादा किया है, लेकिन कई बार देरी हो जाती है।

समाधान के आसान तरीके

इस बोझ से बचने के लिए अपने बैंक के एटीएम का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। मोबाइल ऐप या एसएमएस से फ्री लिमिट की निगरानी रखें। यूपीआई, गूगल पे या फोनपे जैसी डिजिटल विधियों को अपनाएं, जो पूरी तरह मुफ्त हैं। एक बार में ज्यादा राशि निकालकर बार-बार जाने से बचें। बड़े परिवार वाले लोग महीने की शुरुआत में प्लानिंग करें।

भविष्य में क्या उम्मीद

सरकार फाइनेंशियल इंक्लूजन पर जोर दे रही है, लेकिन ये नियम उल्टे असर दिखा रहे हैं। ग्राहक संगठन चार्ज घटाने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सतर्क रहें और स्मार्ट तरीके से बैंकिंग करें। डिजिटल इंडिया का सपना तभी साकार होगा जब हर नागरिक को सुविधा मिले।

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info@divcomkonkan.in

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