उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेटियों को उच्च शिक्षा की राह में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है। हाल ही में पेश हुए बजट में मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की योजना को हरी झंडी मिल चुकी है। इस पहल से ग्रामीण इलाकों की हजारों लड़कियां कॉलेज पहुंचने की परेशानी से निजात पा सकेंगी। सरकार का मकसद साफ है कि आर्थिक तंगी या दूरस्थ दूरी किसी बेटी की पढ़ाई न रोके।

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योजना की पूरी जानकारी!
यह योजना खासतौर पर उन छात्राओं के लिए है जो ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही हैं। सरकारी कॉलेजों या मान्यता प्राप्त संस्थानों में दाखिला लेने वाली लड़कियों को प्राथमिकता मिलेगी। योजना से उच्च शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी बढ़ेगी और ड्रॉपआउट की दर घटीगी। बजट में चार सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे पहले चरण में चालीस-पैंतालीस हजार छात्राओं तक लाभ पहुंचेगा। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों को इसमें विशेष तरजीह दी जाएगी, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
कौन ले सकती हैं लाभ?
सिर्फ यूपी की मूल निवासी लड़कियां ही इसके हकदार होंगी। इंटरमीडिएट यानी बारहवीं कक्षा में कम से कम बहत्तर से बहत्तर-पांच प्रतिशत अंक जरूरी हैं। परिवार की सालाना कमाई ढाई लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर तबके, पिछड़े वर्ग और ग्रामीण छात्राओं को आगे रखा जाएगा। शहरी या उच्च आय वाले परिवारों की छात्राओं को इससे वंचित रखा जा सकता है। योजना का फोकस मेरिट पर है, इसलिए टॉप प्रदर्शन करने वाली बेटियों को मौका मिलेगा।
आवेदन कैसे करें, प्रक्रिया आसान?
आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन होगा। उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होगा। सबसे पहले रजिस्ट्रेशन करें, फिर व्यक्तिगत जानकारियां जैसे नाम, पता, मोबाइल नंबर दर्ज करें। शैक्षणिक प्रमाण जैसे दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट अपलोड करनी पड़ेगी। आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, बैंक खाते का विवरण और पासपोर्ट फोटो भी लगेंगे। फॉर्म जमा करने के बाद मेरिट सूची बनेगी। चयनित छात्राओं को एसएमएस या ईमेल से सूचना भेजी जाएगी। जिला स्तर पर सत्यापन के बाद स्कूटी का वितरण होगा। अभी रजिस्ट्रेशन की तारीखों का ऐलान बाकी है, लेकिन फरवरी तक शुरू होने की उम्मीद है।
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क्या मिलेगा, कैसे वितरित होगा?
चयनित बेटियों को सीधे स्कूटी या सब्सिडी राशि बैंक खाते में ट्रांसफर होगी। इलेक्ट्रिक स्कूटी पर जोर दिया जा रहा है, जो पर्यावरण के लिए बेहतर है। प्रति स्कूटी चालीस हजार रुपये तक की व्यवस्था हो सकती है। इससे न सिर्फ ईंधन का खर्च बचेगा, बल्कि सुरक्षित यात्रा भी सुनिश्चित होगी। वितरण में पारदर्शिता बरती जाएगी, ताकि कोई भेदभाव न हो।
बेटियों के सपनों को पंख
ग्रामीण इलाकों में कई लड़कियां दूर के कॉलेज जाने से पढ़ाई छोड़ देती हैं। यह योजना उसी समस्या का समाधान है। सोशल मीडिया पर छात्राओं का जोश देखने लायक है। कई ने अपनी कहानियां साझा कीं कि कैसे बस या साइकिल से सफर पढ़ाई में बाधा बनता था। सरकार की यह पहल बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को नया आयाम देगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अगले दो-तीन सालों में लड़कियों की शिक्षा दर में उल्लेखनीय सुधार होगा।















