राज्य सरकार ने गर्भवती और नवजात शिशु की मां बनने वाली महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। महतारी जतन योजना के तहत असंगठित क्षेत्र की श्रमिक महिलाओं को कुल 20,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचेगी, जिससे प्रसव पूर्व और उसके बाद की देखभाल आसान हो जाएगी। यह पहल न केवल मां और बच्चे के स्वास्थ्य को मजबूत करेगी, बल्कि आर्थिक बोझ को भी कम करेगी।

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योजना की शुरुआत और बड़ा मकसद
यह योजना 2010 में शुरू हुई थी और अब इसमें नई गति आई है। इसका लक्ष्य निर्माण कार्यों और अन्य असंगठित कामों में लगी महिलाओं को मातृत्व काल में हर संभव मदद पहुंचाना है। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि की महिलाओं को पोषण, दवा और आराम की सुविधा मिले, यही इसका मूल उद्देश्य है। राज्य स्तर पर यह प्रयास मां-बच्चे की मृत्यु दर घटाने और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में मजबूत कदम है। ग्रामीण इलाकों में जहां स्वास्थ्य सेवाएं सीमित हैं, वहां यह योजना वरदान साबित हो रही है।
कितनी राशि और कैसे मिलेगी
पात्र महिलाओं को दो बच्चों तक यह लाभ मिल सकता है। 20,000 रुपये की यह सहायता चरणबद्ध तरीके से वितरित होती है। गर्भावस्था की पुष्टि होते ही पहली किस्त शुरू हो जाती है। फिर प्रसव के बाद दूसरी किस्त और उसके बाद देखभाल के दौरान बाकी राशि। ऐसी व्यवस्था से महिलाएं हर स्टेज पर बेहतर आहार और चिकित्सा ले पाती हैं। डिजिटल ट्रांसफर से पैसा तुरंत खाते में आ जाता है, जिससे कोई देरी नहीं होती।
कौन ले सकता है लाभ?
यह योजना खासतौर पर छत्तीसगढ़ की रहने वाली उन महिलाओं के लिए है, जिनके पति या स्वयं निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हैं। लेबर कार्ड होना जरूरी है। गर्भावस्था का सर्टिफिकेट स्थानीय डॉक्टर, नर्स या स्वास्थ्य कार्यकर्ता से प्रमाणित कराना पड़ता है। सरकारी प्रोजेक्ट्स में काम करने वालों को इससे बाहर रखा गया है, ताकि जरूरतमंदों तक फोकस रहे। सादे शब्दों में, मजदूर वर्ग की महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है।
आसान आवेदन का तरीका
आवेदन बहुत सरल है। नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर फॉर्म भरें। आधार कार्ड, लेबर कार्ड और गर्भावस्था का प्रमाण-पत्र साथ ले जाएं। सत्यापन के बाद आवेदन मंजूर हो जाता है। फिर स्टेटस चेक करने की सुविधा भी उपलब्ध है। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और तेज बना दिया है, जिससे कागजी घमासान से छुटकारा मिला है। कोई भी इच्छुक महिला जल्द से जल्द आवेदन कर लाभ उठा सकती है।
क्या बदला है जमीनी स्तर पर
इस योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आया है। गर्भवती महिलाएं अब बेहतर खान-पान कर पा रही हैं, जिससे स्वस्थ बच्चे पैदा हो रहे हैं। परिवारों का आर्थिक तनाव कम हुआ है और स्वास्थ्य केंद्रों का उपयोग बढ़ा है। आंकड़े बताते हैं कि शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और समाज में उनकी भूमिका मजबूत हो रही है।
आगे की राह और सुझाव
हालांकि कुछ जगहों पर जागरूकता की कमी है, लेकिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर पहुंच का अभियान चल रहा है। देरी से बचने के लिए दस्तावेज पहले से तैयार रखें। सरकार का इरादा इसे और विस्तार देना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं जुड़ें। यह योजना छत्तीसगढ़ को मातृत्व देखभाल के मामले में मिसाल बना रही है। अगर आप या आपके आसपास कोई पात्र महिला है, तो आज ही संपर्क करें। स्वस्थ मां से ही स्वस्थ समाज बनता है।















