उत्तर प्रदेश के छोटे किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने खेतों में सिंचाई की सुविधा बढ़ाने के लिए निःशुल्क बोरिंग योजना को नया आयाम दिया है। इस पहल से लाखों लघु एवं सीमांत किसान बिना किसी आर्थिक बोझ के अपने खेतों में निजी नलकूप लगा सकेंगे। योजना के तहत बोरिंग का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी, साथ ही पंपसेट और अन्य सामग्री पर भी आकर्षक अनुदान मिलेगा। यह कदम किसानों की आय दोगुनी करने और फसल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मजबूत प्रयास है।

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क्यों जरूरी है यह योजना?
उत्तर प्रदेश में अधिकांश कृषि वर्षा पर निर्भर है। सूखे के मौसम में फसलें बर्बाद हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है। निःशुल्क बोरिंग योजना इसी समस्या का समाधान है। छोटे खेतों वाले किसानों को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि उनके पास निजी सिंचाई साधन नहीं होते। योजना से खेतों में समय पर पानी पहुंचेगा, जिससे गेहूं, धान, सब्जियों जैसी फसलों की पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है, ताकि किसान आत्मनिर्भर बन सकें।
कौन पा सकता है लाभ?
यह योजना उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासी लघु एवं सीमांत किसानों के लिए है। न्यूनतम 50 डिसमिल (0.2 हेक्टेयर) से लेकर 2.5 एकड़ तक जमीन वाले किसान आवेदन कर सकते हैं। सामान्य वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को भी शामिल किया गया है। महत्वपूर्ण शर्त यह है कि किसान ने पहले किसी अन्य सिंचाई योजना का लाभ न लिया हो। 18 वर्ष से अधिक उम्र के किसान जिनके नाम पर खतौनी दर्ज है, वे पात्र हैं। बोरिंग न्यूनतम 3 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने की क्षमता वाली होनी चाहिए। पठारी इलाकों में विशेष मशीनों का प्रावधान भी है।
अनुदान की राशि और सुविधाएं
योजना में बोरिंग पूरी तरह मुफ्त है। सामान्य किसानों को 5,000 से 7,000 रुपये, जबकि एससी-एसटी वर्ग को 10,000 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। पंपसेट पर 4,500 से 9,000 रुपये, एचडीपीई पाइप पर 3,000 रुपये और रिफ्लेक्स वाल्व जैसी सामग्री पर अतिरिक्त मदद दी जाएगी। सोलर पंप चुनने वालों को प्राथमिकता मिलेगी। असफल बोरिंग होने पर भी किसान को अधिकांश राशि वापस मिल जाएगी। विभाग स्वयं चयनित एजेंसियों से काम कराएगा, जिससे गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक बोरिंग पर 25 पेड़ लगाना जरूरी है।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। लघु सिंचाई विभाग की वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरें। नाम, मोबाइल नंबर, जमीन का विवरण दर्ज करें। आवेदन जमा करने के बाद तकनीकी टीम साइट का दौरा करेगी और जियो-टैगिंग करेगी। स्वीकृति पर बोरिंग लग जाएगी और अनुदान बैंक खाते में आ जाएगा। ऑफलाइन चाहें तो ब्लॉक कार्यालय या विकास भवन से फॉर्म लें। आधार कार्ड, खतौनी, जाति-आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक और फोटो साथ रखें। पहले आओ-पहले पाओ के सिद्धांत पर काम हो रहा है, इसलिए जल्द आवेदन करें।
2026 में नया विस्तार
इस साल योजना को 250 फीट गहरे नलकूप तक बढ़ाया गया है। महराजगंज जैसे जिलों में हजारों बोरिंग का लक्ष्य है। जागरूकता के लिए ग्राम स्तर पर कैंप लग रहे हैं। हालांकि, कई किसान ऑनलाइन प्रक्रिया से अनजान हैं, इसलिए नजदीकी कार्यालय से मदद लें। जल स्तर गिरने की चुनौती है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सफलता दर 80 प्रतिशत से अधिक है।
यह योजना न केवल सिंचाई क्रांति लाएगी, बल्कि किसान परिवारों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगी। सरकार की यह पहल किसानों के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक है। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय लघु सिंचाई कार्यालय से संपर्क करें।















