गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। भारत सरकार की महत्वपूर्ण शिक्षा योजना के तहत अब प्राइवेट स्कूलों में कक्षा नर्सरी या पहली से 25 प्रतिशत सीटें पूरी तरह मुफ्त मिलेंगी। 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। यह मौका लाखों बच्चों के भविष्य को चमका सकता है। अभिभावक जल्द आवेदन करें।

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योजना का लक्ष्य क्या है?
यह योजना 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर केंद्रित है। प्राइवेट स्कूलों को बाध्य किया गया है कि वे आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और वंचित समुदायों के बच्चों को मुफ्त एडमिशन दें। सरकार स्कूलों को इन बच्चों की फीस, किताबें, वर्दी और अन्य खर्च का भुगतान करेगी। इसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग को समान शिक्षा का अवसर देना है। इस तरह गरीबी की दीवारें तोड़कर बच्चे बेहतर माहौल में पढ़ सकेंगे।
कौन ले सकता है लाभ?
इस योजना का फायदा उठाने के लिए परिवार की सालाना कमाई एक से दो लाख रुपये से कम होनी चाहिए। बच्चे की उम्र कक्षा एक के लिए पांच से छह साल के बीच हो। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चे पात्र हैं। चयन लॉटरी प्रणाली से होता है। दूरी के आधार पर प्राथमिकता मिलती है, यानी एक से छह किलोमीटर के दायरे में रहने वाले बच्चों को वरीयता। पंजाब के लुधियाना जैसे शहरों में स्थानीय शिक्षा कार्यालय से सटीक जानकारी लें।
आवेदन कैसे करें?
आवेदन प्रक्रिया बेहद आसान है। राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरें। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, रहने का प्रमाण पत्र जैसे राशन कार्ड या बिजली बिल, परिवार की आय का प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र अपलोड करें। फॉर्म जमा करने के बाद लॉटरी ड्रॉ में नाम आए तो स्कूल आवंटित हो जाएगा। यदि नाम न आए तो अपील का विकल्प रहता है। फरवरी मार्च में ज्यादातर राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में तारीखें अलग अलग हैं। अंतिम तिथि नजदीक आ रही है इसलिए देर न करें।
जरूरी दस्तावेज तैयार रखें
आवेदन के समय ये कागजात जरूरी होंगे। बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र और हाल की फोटो। माता पिता का आधार कार्ड और निवास प्रमाण। परिवार की आय बताने वाला प्रमाण पत्र जो स्थानीय तहसील या पटवारी से बनवा सकते हैं। यदि लागू हो तो जाति प्रमाण पत्र भी लगेगा। सभी दस्तावेज साफ और स्पष्ट स्कैन करके अपलोड करें। गलती होने पर आवेदन रद्द हो सकता है।
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि योजना शानदार है लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। स्कूलों को सरकार से फीस का भुगतान में देरी होती है। इससे कभी कभार सामान्य छात्रों की फीस बढ़ जाती है। फिर भी लाखों बच्चे इसका लाभ उठा चुके हैं। पंजाब में लुधियाना के अभिभावक स्थानीय डीईओ कार्यालय जाकर सटीक तारीखें और पोर्टल पता कर लें। यह योजना न सिर्फ शिक्षा देती है बल्कि सामाजिक न्याय की मिसाल भी कायम करती है।
गरीबी कोई बाधा नहीं। प्राइवेट स्कूलों की चमचमाती इमारतों में आपके बच्चे भी पढ़ सकेंगे। तुरंत संपर्क करें और इस अवसर को हाथ से न जाने दें। शिक्षा ही प्रगति का आधार है।















