
सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) भारत में सुरक्षित निवेश और टैक्स बचत के लिए सबसे पसंदीदा योजनाओं में से एक है, हालांकि, कई निवेशक इस उलझन में रहते हैं कि क्या वे अलग-अलग बैंकों या पोस्ट ऑफिस में एक से अधिक पीपीएफ खाते खोल सकते हैं, सरकार ने इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर आपको आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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एक व्यक्ति, एक खाता: क्या कहता है कानून?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड एक्ट, 1968 के तहत एक व्यक्ति अपने नाम पर केवल एक ही पीपीएफ खाता रख सकता है, आप देश के किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस को मिलाकर दूसरा खाता नहीं खोल सकते।
- गलती से दूसरा खाता खुलने पर क्या होगा? यदि आपके पास एक से अधिक पीपीएफ खाते पाए जाते हैं, तो दूसरे खाते को “अनियमित” (Irregular) माना जाएगा।
- ब्याज का नुकसान: अनियमित खाते पर सरकार कोई ब्याज नहीं देती है, ऐसे मामलों में केवल जमा की गई मूल राशि (Principal) ही वापस की जाती है।
नाबालिग के लिए नियम (Minor Account Exceptions)
नियमों में एक अपवाद है कि आप अपने नाबालिग बच्चे (Minor) के नाम पर अभिभावक के तौर पर खाता खोल सकते हैं।
- निवेश की सीमा: स्वयं के खाते और नाबालिग के खाते को मिलाकर एक वित्त वर्ष में अधिकतम निवेश सीमा ₹1.5 लाख ही रहेगी।
- अभिभावक का नियम: माता और पिता दोनों एक ही बच्चे के नाम पर अलग-अलग खाते नहीं खुलवा सकते।
1 अक्टूबर 2024 से लागू नए नियम
वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने पीपीएफ खातों को सुव्यवस्थित करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं:
- ब्याज का निर्धारण: अब केवल प्राथमिक (Primary) खाते पर ही ब्याज मिलेगा, बशर्ते कुल जमा ₹1.5 लाख की वार्षिक सीमा के भीतर हो।
- खातों का विलय (Merger): यदि किसी निवेशक के पास एक से अधिक खाते हैं, तो उन्हें मर्ज करने के लिए आवेदन करना होगा। विलय के बाद, प्राथमिक खाते की शुरुआती तारीख से ही मैच्योरिटी और अन्य लाभ तय होंगे।
- NRI के लिए नियम: अनिवासी भारतीयों (NRI) के पीपीएफ खातों पर भी नए नियमों का प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर यदि खाता पात्रता समाप्त होने के बाद भी सक्रिय है।
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अहम वित्तीय जानकारी (Current Stats)
| विवरण | नियम/दर |
|---|---|
| वर्तमान ब्याज दर | 7.1% प्रति वर्ष |
| न्यूनतम वार्षिक निवेश | ₹500 |
| अधिकतम वार्षिक निवेश | ₹1.5 लाख |
| लॉक-इन पीरियड | 15 साल |
यदि आपके पास एक से अधिक खाते हैं, तो भविष्य में होने वाले ब्याज के नुकसान से बचने के लिए जल्द से जल्द अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस से संपर्क कर उन्हें मर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करें।















