देशभर में लाखों संपत्ति स्वामियों के लिए जमीन पर अवैध कब्जा एक गंभीर समस्या बन चुका है। कई बार तो 12 साल पुराना कब्जा भी मालिकाना हक की तरह मजबूत हो जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि समय रहते सक्रिय कदम उठाने पर इसे आसानी से हटाया जा सकता है। लंबे समय से चली आ रही यह परेशानी अब प्रशासनिक स्तर पर ही सुलझ सकती है, बिना लंबी अदालती लड़ाई लड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और सही प्रक्रिया अपनाने से निजी और सरकारी दोनों तरह की संपत्ति को बचाया जा सकता है। पंजाब जैसे राज्यों में हाल की मुहिमों ने साबित कर दिया कि जल्द कार्रवाई से जमीन मुक्त कराना संभव है।

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समय की अहम भूमिका
कानूनी रूप से अगर कोई व्यक्ति 12 साल तक बिना रुके और शांतिपूर्ण तरीके से जमीन पर कब्जा जमाए रखे, तो वह प्रतिकूल कब्जे का दावा कर सकता है। लेकिन यह तभी लागू होता है जब मूल मालिक को इसकी जानकारी हो और वह चुप्पी साधे रहे। अगर कब्जा जबरन हो या हाल ही में पता चले, तो तत्काल राहत मिल जाती है। ग्रामीण इलाकों में खासकर खेती की जमीन पर यह विवाद आम हैं। देरी न करें, क्योंकि सक्रियता ही आपकी ताकत है।
पहला रास्ता: स्थानीय पंचायत का सहारा
सबसे सरल शुरुआत ग्राम पंचायत या नगर निगम से करें। सरपंच या पार्षद को लिखित शिकायत दें, जिसमें जमीन के कागजात संलग्न हों। वे दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत करवाते हैं और कई बार उसी हफ्ते कब्जा हटा देते हैं। छोटे विवादों में यह तरीका सबसे तेज काम करता है। पंचायती राज व्यवस्था इसे बाध्यकारी बनाती है।
दूसरा रास्ता: तहसीलदार या एसडीएम के पास जाएं
राजस्व विभाग का दरवाजा खटखटाएं। खतौनी, खसरा नंबर और फोटो साबित के साथ तहसीलदार को आवेदन दें। वे जांच टीम भेजकर आदेश जारी करते हैं। एसडीएम विशेष रूप से प्रभावी हैं, जो पुलिस की मदद से बुलडोजर तक चला सकते हैं। 30 दिनों के अंदर कार्रवाई आम है। पंजाब में यह प्रक्रिया तेजी से चल रही है।
तीसरा रास्ता: पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करें
अगर खतरा महसूस हो, तो नजदीकी थाने पहुंचें। आपराधिक प्रवेश या अतिक्रमण के आरोप लगाकर एफआईआर करवाएं। पुलिस बल प्रयोग कर सकती है, खासकर अगर महिलाओं या कमजोर वर्ग की संपत्ति हो। धमकी के केस में तत्काल सुरक्षा मिलती है। यह तरीका फौरी राहत के लिए बेस्ट है।
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चौथा रास्ता: जिला कलेक्टर को जगाएं
बड़े कब्जों के लिए डीएम या कलेक्टर के पास सीधी शिकायत करें। वे विशेष दस्ते बनाकर अभियान चलाते हैं। सूचना का अधिकार का इस्तेमाल कर रिकॉर्ड मंगवाएं। पंजाब सहित कई राज्यों में ऐसी टीमों ने सैकड़ों संपत्तियां मुक्त की हैं। यह स्तर पर बड़े परिणाम देता है।
पांचवां रास्ता: राजस्व नियमों का नोटिस
राज्य के भूमि राजस्व कानूनों के तहत विभाग से सार्वजनिक नोटिस जारी करवाएं। 15 से 30 दिन का समय देकर कब्जा खाली कराना पड़ता है। सरकारी जमीन पर तो यह फटाफट काम करता है, निजी पर भी असरदार। विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन भी संभव है।
अंतिम विकल्प और जरूरी सलाह
प्रशासनिक रास्ते फेल होने पर सिविल अदालत जाएं, लेकिन पहले वकील से सलाह लें। खुद जबरदस्ती कभी न आजमाएं, वरना उल्टा मुसीबत हो सकती है। फोटो, वीडियो और गवाहों को संभालकर रखें। जमीन के कागजात अपडेट रखें। जागरूक मालिक ही जीतते हैं। नई सरकारी पोर्टल्स ने प्रक्रिया को और आसान बना दिया है। संपत्ति बचाने का समय अभी है।















