तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में किराए पर रहने वाले लाखों लोगों के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार ने किराया समझौतों को आसान और निष्पक्ष बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। ये नए प्रावधान अब पंजाब समेत कई राज्यों में लागू हो चुके हैं। किरायेदारों को कानूनी सुरक्षा का पूरा जखीरा मिलेगा, वहीं मकान मालिकों को अपनी मनमानी पर नियंत्रण करना होगा। कुल पांच बड़े नियम ऐसे हैं जो रोजमर्रा की जिंदगी को सरल बनाएंगे।

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2025 से बदल जाएंगे किराए के ये 5 कानून
पहला नियम: हर समझौता होगा डिजिटल दर्ज
अब कोई भी किराया एग्रीमेंट बिना ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के वैध नहीं माना जाएगा। समझौता होने के 60 दिनों के अंदर सरकारी पोर्टल पर इसे दर्ज कराना अनिवार्य है। डिजिटल स्टांप पेपर का इस्तेमाल होगा, जिससे नकली कागजातों का चक्कर खत्म हो जाएगा। अमृतसर जैसे शहरों में जहां मकान मालिक और किरायेदार अक्सर छोटे-मोटे झगड़ों में उलझ जाते हैं, यह कदम दोनों को मजबूत आधार देगा। पहले मौखिक договор या अनरजिस्टर्ड कागजों के कारण कोर्ट के लंबे चक्कर लगते थे, लेकिन अब सब कुछ ट्रैकेबल रहेगा।
दूसरा नियम: डिपॉजिट की ऊपरी हद तय
सबसे ज्यादा राहत सिक्योरिटी डिपॉजिट के मामले में मिलेगी। घरेलू मकानों के लिए सिर्फ दो महीने का किराया ही डिपॉजिट ले सकेंगे मकान मालिक। दुकान या ऑफिस जैसी कमर्शियल जगहों पर छह महीने तक की छूट है। पहले तो 10 महीने तक का डिपॉजिट वसूल लिया जाता था, जो नौजवानों और छोटे व्यापारियों पर भारी पड़ता था। अब एग्रीमेंट खत्म होने पर डिपॉजिट ब्याज समेत लौटाना पड़ेगा। अमृतसर की चहल-पहल भरी गलियों में छोटे बिजनेस चलाने वालों को इससे बड़ी मदद मिलेगी।
तीसरा नियम: किराया वृद्धि पर ब्रेक
किराया बढ़ाने की प्रक्रिया भी सख्त हो गई है। साल में सिर्फ एक बार, वो भी 12 महीने पूरे होने के बाद ही बढ़ोतरी संभव होगी। इसके लिए कम से कम तीन महीने पहले लिखित नोटिस देना जरूरी है। अचानक महंगाई का बहाना बनाकर किराया दोगुना करने का चलन अब बंद हो जाएगा। इससे किरायेदार अपना बजट आसानी से प्लान कर सकेंगे। मान लीजिए अमृतसर में आपका किराया 12 हजार रुपये है, तो अगले साल बढ़ोतरी पर भी तीन महीने का समय मिलेगा प्लानिंग के लिए।
चौथा नियम: बेदखली आसान नहीं होगी
मकान मालिक अब मनमाने ढंग से किरायेदार को बाहर नहीं निकाल सकेंगे। बेदखली के लिए रेंट ट्रिब्यूनल या कोर्ट का आदेश लेना पड़ेगा। एक से तीन महीने का नोटिस पीरियड देना होगा, और वो भी सिर्फ ठोस कारणों पर जैसे किराया न देना या मकान को नुकसान पहुंचाना। मकान मालिक बिना इजाजत किरायेदार के कमरे में घुस भी नहीं पाएंगे। खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और परिवारों को इससे सुरक्षा का एहसास होगा। अमृतसर में प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए यह वरदान साबित होगा।
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पांचवां नियम: झगड़े जल्द सुलझेंगे
विवाद निपटान के लिए अलग रेंट कोर्ट और ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं। यहां मामले दो महीने के अंदर फैसला हो जाएगा। मरम्मत और मेंटेनेंस की जिम्मेदारियां एग्रीमेंट में साफ लिखनी पड़ेंगी। पंजाब में अमृतसर जैसे जिलों में ये ट्रिब्यूनल शुरू हो चुके हैं, जिससे पुराने कोर्टों का बोझ कम होगा।
मकान मालिकों पर क्या असर पड़ेगा?
ये बदलाव मकान मालिकों के लिए पहले तो कठिन लगेंगे, लेकिन लंबे समय में उनकी कमाई स्थिर रखेंगे। दुकानों पर ज्यादा रियायत है, जो व्यापार को बढ़ावा देगी। कुल मिलाकर किराए की दुनिया में संतुलन आएगा। नया एग्रीमेंट बनाने से पहले स्थानीय रेंट अथॉरिटी से सलाह लें। क्या ये नियम वाकई विवादमुक्त किरायेदारी लाएंगे? समय इसका जवाब देगा।















