गरीबी और बीमारी के दोहरे बोझ तले दबे लाखों परिवारों को अब स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत कवच आसानी से मिल सकेगा। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनवाना अब बेहद सरल हो गया है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को अब दूर-दराज के स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, क्योंकि कोटेदार, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सहायिकाएं इसकी कमान संभालेंगी। यह नई व्यवस्था न केवल समय बचाएगी, बल्कि जरूरतमंदों तक योजना का पूरा लाभ पहुंचाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

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सहयोगियों की अहम भूमिका
स्वास्थ्य विभाग ने एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए स्थानीय स्तर के इन कार्यकर्ताओं को कार्ड जारी करने का अधिकार प्रदान किया है। कोटेदार जो राशन वितरण के साथ-साथ अब स्वास्थ्य सहायता भी देंगे। आशा बहनें जो पहले से ही घर-घर जाकर जागरूकता फैलाती हैं, वे अब सीधे e-KYC प्रक्रिया पूरी करेंगी।
आंगनवाड़ी सहायिकाएं बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर नजर रखते हुए परिवारों को तत्काल कार्ड उपलब्ध कराएंगी। इसके अलावा पीएचसी सखी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और ग्रामीण फार्मासिस्ट भी इस चेन का हिस्सा बनेंगे। इन सभी को विशेष प्रशिक्षण देकर हजारों ऑपरेटर आईडी जारी की गई हैं, ताकि कोई पात्र परिवार छूट न जाए। विशेष अभियान के तहत गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों और अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को प्राथमिकता दी जा रही है।
आसान प्रक्रिया से करें लाभ
कार्ड बनवाने की प्रक्रिया को इतना आसान बनाया गया है कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी झंझट के इसे प्राप्त कर सके। नजदीकी कोटेदार या आशा कार्यकर्ता के पास जाइए, आधार कार्ड, राशन कार्ड, मोबाइल नंबर और एक फोटो दें। वे तुरंत e-KYC कर देंगे और आवेदन जमा हो जाएगा। अगर खुद करना हो, तो आयुष्मान ऐप मोबाइल में डाउनलोड करें। अपना राज्य और जिला चुनें, आधार नंबर डालकर ओटीपी से वेरीफाई करें। फोटो अपलोड कर आवेदन सबमिट करें। वेरिफिकेशन के बाद कुछ ही दिनों में डिजिटल कार्ड डाउनलोड हो जाएगा।
यह कार्ड पूरे परिवार के लिए वैलिड है और सालाना पांच लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज सुनिश्चित करता है। हृदय रोग से लेकर कैंसर, सर्जरी और दवाओं तक सब कवर होता है। पात्रता जांचने के लिए सरकारी पोर्टल या हेल्पलाइन नंबर का सहारा लें। ई-श्रम कार्ड धारक भी आसानी से लाभ ले सकते हैं।
व्यापक कवरेज, बदलती तस्वीर
यह पहल खासकर उन क्षेत्रों में कारगर साबित हो रही है जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं। नोएडा जैसे शहरी इलाकों से लेकर गांवों तक पहुंच बन रही है। पहले योजना का लाभ लेने में देरी होती थी, लेकिन अब स्थानीय सहयोग से प्रक्रिया तेज हो गई। ग्रामीण महिलाएं और बुजुर्ग जो पैदल या साइकिल से स्वास्थ्य केंद्र जाते थे, अब घर बैठे कार्ड पा लेंगे। इससे न केवल इलाज की लागत बचेगी, बल्कि बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ेगी। सरकार का लक्ष्य सौ फीसद पात्र परिवारों को कवर करना है, जो स्वास्थ्य असमानता को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम है।
सावधानियां और अपेक्षाएं
फर्जी एजेंटों से सतर्क रहें, केवल प्रशिक्षित सहयोगियों या आधिकारिक ऐप पर भरोसा करें। दस्तावेज पूर्ण और सही रखें ताकि कोई रुकावट न आए। जागरूकता अभियान तेज करने की जरूरत है, क्योंकि कई परिवार अभी भी योजना से अनजान हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बताते हैं कि प्रशिक्षण और निगरानी से यह व्यवस्था चमत्कारिक परिणाम देगी। प्रधानमंत्री के संकल्प सबका साथ सबका विकास को साकार करती यह योजना देश की स्वास्थ्य यात्रा को नई गति देगी। अगर आप पात्र हैं तो देर न करें, आज ही संपर्क करें और स्वस्थ जीवन की शुरुआत करें।















