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भारत के लिए चिंताजनक रिपोर्ट! नामीबिया जैसे छोटे देशों से भी पीछे है हमारी प्रति व्यक्ति आय, जानें ग्लोबल रैंकिंग

दुनिया की 5वीं बड़ी इकॉनमी होने पर भी प्रति व्यक्ति आय छोटे देशों से कम। 3 हज़ार डॉलर में गुजारा, जबकि नामीबिया 5 हज़ार कमाता है। 2030 तक सुधार की उम्मीद, लेकिन असली समस्या क्या? पूरी रिपोर्ट पढ़ें!

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दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद भारत प्रति व्यक्ति आय के मामले में नामीबिया, अंगोला जैसे छोटे अफ्रीकी देशों से भी पिछड़ गया है। यह तथ्य आर्थिक विकास की चमकदार कहानी के पीछे छिपी कड़वी हकीकत को उजागर करता है। विशाल जनसंख्या और आय में गहरी असमानता के कारण औसत भारतीय की जेब में उतनी पूंजी नहीं पहुंच पा रही, जितनी वैश्विक पटल पर अपेक्षित है।

भारत के लिए चिंताजनक रिपोर्ट! नामीबिया जैसे छोटे देशों से भी पीछे है हमारी प्रति व्यक्ति आय, जानें ग्लोबल रैंकिंग

चौंकाने वाली तुलना

नामीबिया की आबादी महज 30 लाख के आसपास है, जबकि भारत में 1.4 अरब से अधिक लोग रहते हैं। इसके बावजूद नामीबिया का औसत नागरिक भारत से लगभग 1.7 गुना ज्यादा कमाता है। इसी तरह अंगोला और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश खनन संसाधनों से लाभ उठा रहे हैं, जबकि भारत की कमाई इतने लोगों में बंटकर प्रति व्यक्ति आंकड़ा कम कर देती है। पड़ोसी भूटान भी इस सूची में आगे नजर आता है। यह स्थिति चीते आयात प्रोजेक्ट के संदर्भ में और भी विचारणीय है, जहां नामीबिया से जानवर लाए गए, लेकिन आर्थिक स्तर पर हम पीछे हैं।

वर्तमान आंकड़े और रैंकिंग

2026 में भारत की प्रति व्यक्ति आय करीब 3,000 अमेरिकी डॉलर के आसपास है, जो विश्व बैंक के निम्न-मध्यम आय वर्ग में रखती है। नाममात्र जीडीपी आधार पर वैश्विक रैंकिंग 130 से 140 के बीच है। खरीद शक्ति समता पर भी स्थिति 120-125वें पायदान पर अटकी हुई है। अमेरिका जैसे देश 75,000 डॉलर से ऊपर हैं, जबकि भारत उनके एक चौथाई से भी कम पर टिका है। केन्या, मोरक्को और मॉरीशस जैसे राष्ट्र भी आगे हैं। कुल आय का बड़ा हिस्सा शीर्ष 10 प्रतिशत लोग हजम कर लेते हैं, निचले 50 प्रतिशत को मात्र 15 प्रतिशत मिलता है।

ऐतिहासिक प्रगति

1960 के दशक में 90 डॉलर से शुरू हुई यात्रा ने 2009 तक 1,000 डॉलर, 2019 में 2,000 डॉलर और अब 3,000 डॉलर का आंकड़ा छुआ है। पिछले दशक में 8.3 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वृद्धि दर रही। 2014-15 से यह लगभग दोगुनी हो चुकी है। लेकिन जनसंख्या वृद्धि, ग्रामीण-शहरी खाई और बेरोजगारी ने गति रोकी हुई है।

वर्षप्रति व्यक्ति आय (डॉलर में)आय वर्ग
20091,000निम्न
20192,000निम्न-मध्यम
20263,000निम्न-मध्यम
2030 (अनुमान)4,000 से अधिकऊपरी मध्यम

भविष्य की राह

2030 तक 4,000-4,500 डॉलर पहुंचकर ऊपरी मध्यम आय वर्ग में प्रवेश संभव है। 7-8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि, डिजिटल क्रांति, निर्यात बढ़ोतरी और नीतिगत सुधार इसे मजबूत आधार देंगे। हालांकि समावेशी विकास, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सृजन और असमानता घटाना अनिवार्य है। 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के लिए 13,000 डॉलर पार करना होगा।

नीति निर्माताओं के लिए संदेश

बड़ी अर्थव्यवस्था का दावा करने से पहले प्रति व्यक्ति समृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। रोजगार केंद्रित नीतियां, कृषि सुधार और शिक्षा में निवेश ही इस अंतर को पाट सकते हैं। अन्यथा विकास की यह अधूरी कहानी जनता के सपनों को अधर में लटकाए रखेगी। भारत को न केवल बड़ा, बल्कि अमीर भी बनना होगा।

Author
info@divcomkonkan.in

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