ग्रामीण भारत के लाखों पशुपालक परिवारों के लिए एक सुखद खबर है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर चारा कटाई मशीन खरीदने पर भारी छूट दे रही हैं। सामान्य बाजार मूल्य सात से दस हजार रुपये वाली यह उपयोगी मशीन अब महज तीन से चार हजार रुपये में उपलब्ध हो सकती है। छोटे किसान, सीमांत पशुपालक, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग तथा महिलाओं को विशेष रूप से फायदा होगा। यह कदम पशुपालन को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

पहले चारा काटना एक कठिन और समय लेने वाला काम था। हाथों से या पुरानी विधियों से काम करने में घंटों लग जाते थे, जिससे श्रम की बर्बादी होती थी। अब यह मशीन हरा या सूखा चारा तेजी से बारीक काटकर पशुओं को बेहतर आहार देती है। नतीजा, दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में सुधार आता है। सरकार का लक्ष्य ऐसे छोटे उपकरणों को सस्ता बनाकर पशुपालन को लाभदायक बनाना है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
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कौन ले सकते हैं लाभ?
यह योजना उन किसानों के लिए है जो कम से कम दो तीन पशु पालते हैं। खासतौर पर छोटे भू स्वामी, भूमिहीन पशुपालक और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार प्राथमिकता में हैं। महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आपके पास पहले से ऐसी कोई सब्सिडी प्राप्त मशीन न हो। एक वित्तीय वर्ष में केवल एक उपकरण पर लाभ मिलेगा। पंजाब सहित उत्तरी राज्यों में महिलाओं और कमजोर वर्गों को अतिरिक्त छूट का प्रावधान है। आधार कार्ड से जुड़ा बैंक खाता होना जरूरी है ताकि लाभ निर्बाध रूप से मिल सके।
जरूरी कागजात तैयार रखें
आवेदन के समय कुछ बुनियादी दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। इनमें आपका आधार नंबर, बैंक पासबुक की कॉपी, स्थानीय पंचायत या कृषि विभाग से जारी किसान पहचान पत्र शामिल है। साथ ही पशुओं की संख्या दर्शाने वाला प्रमाण पत्र और निवास का सबूत भी चाहिए। यदि आप आरक्षित वर्ग से हैं तो जाति प्रमाण पत्र संलग्न करें। सभी कागजात स्कैन करके ऑनलाइन जमा किए जा सकते हैं, जिससे प्रक्रिया सरल हो जाती है।
आवेदन की आसान प्रक्रिया
प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि गांव का हर किसान इसे अपना सके। सबसे पहले अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वहां यंत्र अनुदान या सब्सिडी खंड में रजिस्ट्रेशन करें। फॉर्म भरते समय सारी सटीक जानकारी दें और दस्तावेज अपलोड कर दें। आवेदन स्वीकृत होने पर नजदीकी अधिकृत विक्रेता से मशीन खरीदें। खरीदी का बिल जमा करने पर सब्सिडी राशि कुछ ही दिनों में खाते में आ जाती है। यदि इंटरनेट की सुविधा न हो तो स्थानीय कृषि कार्यालय या कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर ऑफलाइन मदद लें। पंजाब के लुधियाना जिले में एटीएमए केंद्रों पर विशेष काउंसलिंग शिविर लग रहे हैं।
पंजाब में विशेष अवसर
दूध उत्पादन में अग्रणी पंजाब के लिए यह योजना वरदान है। यहां स्थानीय किसान पहले से ही इस लाभ का जमकर उपयोग कर रहे हैं। एक पशुपालक ने बताया कि मशीन मिलने से दैनिक कामकाज में आधा समय बच गया और पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हो गया। जिले के गांवों में जागरूकता अभियान तेज हैं। बजट सीमित होने से आवेदन में देरी न करें। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कोटा बढ़ाया है, लेकिन जल्द कार्रवाई जरूरी है।
यह पहल न केवल आर्थिक राहत देगी बल्कि पशुपालन को व्यवसायिक स्तर पर ले जाएगी। किसान भाइयों, यह सुनहरा मौका हाथ से न जाने दें। नजदीकी कृषि विशेषज्ञ से संपर्क कर आज ही आवेदन शुरू करें। ग्रामीण समृद्धि का नया दौर यहीं से शुरू हो रहा है।















