किसानों की किस्मत बदलने वाली एक बड़ी योजना मध्य प्रदेश में जोर पकड़ रही है। यहां सोलर पंप सिर्फ दस फीसदी की मामूली लागत पर घर ला सकते हैं। बाकी नब्बे फीसदी की भारी भरकम राशि राज्य और केंद्र सरकार वहन करेगी। यह खास पहल डीजल पंपों और बिजली बिलों के बोझ तले दबे लाखों किसानों को सस्ती और स्वच्छ सिंचाई का रास्ता दिखा रही है।

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योजना की शुरुआत और लक्ष्य
राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा पर जोर देते हुए यह कार्यक्रम शुरू किया है। इसका मकसद हर छोटे बड़े किसान के खेत तक सूरज से चलने वाले पंप पहुंचाना है। अब तक लाखों किसानों को चयनित किया जा चुका है। योजना के तहत तीन से दस हॉर्स पावर तक के पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। एक सामान्य तीन से पांच हॉर्स पावर का पंप जो बाजार में दो से चार लाख रुपये तक का होता है वह किसान को महज तीस से सैंतालीस हजार रुपये में मिल जाता है। इसी तरह सात पॉइंट पांच हॉर्स पावर का पंप इकतालीस हजार और दस हॉर्स पावर का चौरानबे हजार से भी कम कीमत पर लग जाता है। यह व्यवस्था किसानों को सालाना हजारों रुपये की बचत दिला रही है।
किस लाभ का सौदा है यह
इन सोलर पंपों से न केवल सिंचाई सस्ती हो रही है बल्कि किसान अतिरिक्त बिजली ग्रिड में बेचकर कमाई भी कर सकते हैं। डीजल की बढ़ती कीमतों और बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे किसानों के लिए यह वरदान साबित हो रही है। पंपों की रखरखाव लागत न के बराबर है और ये पच्चीस साल तक आसानी से चलते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी यह कदम सराहनीय है क्योंकि इससे प्रदूषण में कमी आ रही है। छोटे जोत वाले सीमांत किसानों को खास तवज्जो दी जा रही है ताकि गांव गांव तक सौर ऊर्जा का लाभ पहुंचे।
आवेदन कैसे करें आसान तरीके से
किसानों को सबसे पहले ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कराना होता है। आधार कार्ड बैंक खाता संख्या खसरा नंबर और किसान पहचान पत्र अपलोड करने होते हैं। शुरुआती पंजीकरण शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये जमा करने पड़ते हैं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने पर शेष राशि बैंक ट्रांसफर से देनी होती है। इसके बाद नब्बे दिनों के अंदर पंप खेत में स्थापित हो जाता है। जिला स्तर पर कृषि या बिजली विभाग के कार्यालयों में ऑफलाइन मदद भी उपलब्ध है। चयनित स्थलों का सघन निरीक्षण किया जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
चुनौतियां और सतर्कता की जरूरत
हालांकि योजना का असर जमीन पर दिख रहा है फिर भी कुछ चुनौतियां बाकी हैं। फर्जी वेबसाइटों और ऐप्स से सावधान रहना जरूरी है। पंप का इस्तेमाल सिर्फ खेती के लिए ही अनुमत है बिक्री या स्थानांतरण पर सख्त पाबंदी है। रखरखाव और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी किसान की होती है। सरकार ने जागरूकता अभियान और हेल्पलाइन शुरू की हैं ताकि किसान भ्रमित न हों।
भविष्य की उम्मीदें
यह योजना न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली भी है। आने वाले समय में और अधिक किसानों को जोड़कर मध्य प्रदेश को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाया जा सकता है। किसान भाइयों को तुरंत आवेदन कर इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। सूरज की मुफ्त रोशनी से खेत लहलहाएंगे और जीवन स्तर ऊंचा होगा।















