झारखंड सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण योजना शुरू की है। मंईयां सम्मान योजना से जुड़ी महिलाओं को अब बिना किसी गारंटी के 20 हजार रुपये तक का लोन आसानी से मिल सकेगा। यह कदम ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार को बढ़ावा देगा और लाखों परिवारों की जिंदगी बदलेगा।

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योजना का आधार और उद्देश्य
यह नई सुविधा पहले से चल रही मासिक सहायता योजना का विस्तार है। राज्य सरकार हर महीने लाखों महिलाओं को 2500 रुपये की मदद दे रही है। अब इस राशि का इस्तेमाल लोन चुकाने में भी होगा, जिससे महिलाओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। मुख्य लक्ष्य 45 साल तक की महिलाओं को सिलाई, पशुपालन, छोटी दुकान या कृषि से जुड़े काम शुरू करने में सहारा देना है। इससे न केवल घर की आय बढ़ेगी बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
लाभ लेने की योग्यता
इस सुविधा का फायदा उठाने के लिए महिला को पहले से मासिक सहायता योजना में शामिल होना जरूरी है। एक ही परिवार की कई महिलाएं अलग अलग लोन ले सकती हैं। उम्र सीमा मुख्य रूप से 50 साल तक रखी गई है। स्वरोजगार के लिए विचार जैसे कि मशरूम की खेती, मसालों का प्रसंस्करण या किराना स्टोर आदर्श हैं। कोई बड़ी संपत्ति या गारंटर की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आवेदन कैसे करें?
प्रक्रिया को सरल रखा गया है ताकि गांव की महिलाएं बिना परेशानी के आगे बढ़ सकें। सबसे पहले नजदीकी बैंक शाखा जाएं और अपनी सहायता योजना का प्रमाण पत्र साथ ले जाएं। आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण दें। एक साधारण फॉर्म भरें, जिसमें सिर्फ नाम, पता और लोन के उपयोग का जिक्र हो। बैंक वाले सात दिनों में मंजूरी देंगे। खास डेस्क भी बनाए जाएंगे जो मदद करेंगे। किस्तें मासिक सहायता से कटेंगी, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं। पांच साल में पूरी रकम चुका देंगी।
प्रभाव और भविष्य की संभावनाएं
इस कदम से करीब 51 लाख महिलाएं प्रभावित होंगी। सरकार खुद बैंकों को सुरक्षा का भरोसा देगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नई ऊर्जा आएगी। महिलाएं न सिर्फ कमाने लगेंगी बल्कि परिवार की निर्णय प्रक्रिया में भी मजबूत होंगी। बजट सत्र में इसे औपचारिक रूप दिया जा सकता है। मार्च से शुरुआत होने की उम्मीद है।
महिलाओं की खुशी और उम्मीदें
गांवों में चर्चा जोरों पर है। कई महिलाएं पहले ही योजना बना रही हैं कि लोन से क्या शुरू करेंगी। एक ने कहा कि अब दुकान खोलकर बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी। यह बदलाव सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि आत्मविश्वास का भी है। झारखंड इस तरह अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है।
सरकार का यह प्रयास महिलाओं को मुख्यधारा में लाने का सशक्त माध्यम बनेगा। आने वाले समय में और भी सुधार देखने को मिल सकते हैं।















