बिहार के ग्रामीण युवाओं और छोटे किसानों के लिए एक बड़ा अवसर आ गया है। राज्य सरकार की बकरी पालन योजना के तहत 8 लाख रुपये तक की सब्सिडी, मुफ्त ट्रेनिंग और बैंक लोन की सुविधा मिल रही है। यह कम निवेश वाला व्यवसाय सालाना लाखों की कमाई दे सकता है, जो बेरोजगारी कम करने में मददगार साबित हो रहा है।

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योजना का उद्देश्य
पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग द्वारा चलाई जा रही यह समेकित बकरी विकास योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर केंद्रित है। बकरी पालन कम जगह में शुरू होता है और तेजी से लाभ देता है। छोटे किसान आसानी से इसे अपना सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ज्यादा से ज्यादा परिवार आत्मनिर्भर बनें।
सब्सिडी का ब्रेकअप
योजना तीन स्तरों पर उपलब्ध है:
- छोटा फार्म: 20 बकरी + 1 बकरा पर कुल लागत 2.42 लाख, सब्सिडी 1.21 लाख तक।
- मध्यम फार्म: 40 बकरी + 2 बकरे पर 3-4 लाख की सहायता।
- बड़ा फार्म: 100 बकरी + 5 बकरे पर 7.52 लाख से 8 लाख तक अनुदान।
सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत और एससी-एसटी को 60 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा छोटी इकाइयों के लिए 13,500 रुपये प्रति यूनिट का अतिरिक्त लाभ भी है। बैंक लोन पर सब्सिडी सीधे खाते में आती है।
पात्रता और दस्तावेज
बिहार के स्थायी निवासी, खासकर बीपीएल परिवार और कम आय वाले लोग आवेदन कर सकते हैं। 1800-9000 वर्ग फुट जमीन फार्म के लिए जरूरी है, साथ ही हरा चारा उगाने के लिए 50-100 डिसमिल जगह। ट्रेनिंग ले चुके या अनुभवी पशुपालकों को प्राथमिकता मिलती है।
आवश्यक दस्तावेज:
- आधार कार्ड और वोटर आईडी।
- जाति प्रमाण पत्र।
- जमीन के कागजात जैसे लगान रसीद।
- बैंक पासबुक और ट्रेनिंग सर्टिफिकेट।
आवेदन कैसे करें?
पशुपालन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करें। फॉर्म भरें, दस्तावेज अपलोड करें और सबमिट करें। स्थानीय पशु अस्पताल या कृषि केंद्र से मुफ्त ट्रेनिंग लें। चयन होने पर सब्सिडी बैंक में ट्रांसफर हो जाती है। प्रक्रिया सरल और पारदर्शी है।
लाभ और सफलता की मिसालें
बकरी का मांस, दूध और खाद बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है। 100 बकरियों से सालाना 5-10 लाख तक कमाई हो सकती है। मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जैसे जिलों में सैकड़ों किसान लाभ उठा चुके हैं। एक किसान ने बताया कि 20 बकरियों से शुरू कर अब लाखों कमा रहे हैं।
सरकार ने 2025-26 के लिए भारी बजट आवंटित किया है। इच्छुक युवा जल्द आवेदन करें, क्योंकि अवसर सीमित हैं। यह योजना न केवल आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण विकास का नया अध्याय लिखेगी।















