
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि अगर आप चप्पल या सैंडल पहनकर मोटरसाइकिल या स्कूटर चलाते हैं, तो आपका ₹1000 का भारी-भरकम चालान कट सकता है, कई वाहन चालक इस खबर से डरे हुए हैं, लेकिन क्या वाकई नए मोटर व्हीकल एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान है? आइए जानते हैं इस वायरल खबर की पूरी सच्चाई।
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क्या कहता है कानून?
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस वायरल दावे को पूरी तरह से भ्रामक और अफवाह करार दिया है, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत ऐसा कोई नियम नहीं है जो निजी वाहन चालकों के लिए जूते पहनना अनिवार्य बनाता हो।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के कार्यालय ने खुद इस पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि चप्पल, आधी आस्तीन की शर्ट या लुंगी पहनकर वाहन चलाने पर जुर्माना लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है।
क्यों फैल रही है यह अफवाह?
अक्सर सुरक्षा सुझावों को गलत तरीके से ‘नियम’ के रूप में प्रचारित कर दिया जाता है, चप्पल पहनकर गियर वाली बाइक चलाने में तकनीकी दिक्कतें आ सकती हैं, जिससे लोग इसे नियम समझने की भूल कर बैठते हैं:
- गियर शिफ्टिंग: चप्पल से गियर बदलने में पैर फिसलने का डर रहता है।
- सुरक्षा का अभाव: सड़क दुर्घटना की स्थिति में जूते पैरों को गंभीर चोट से बचाते हैं, जबकि चप्पल में सुरक्षा शून्य होती है।
- पकड़ (Grip): बंद जूतों से ब्रेक और गियर लीवर पर बेहतर नियंत्रण मिलता है।
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सावधान: इन नियमों को न समझें हल्के में
भले ही चप्पल पर चालान न हो, लेकिन परिवहन विभाग निम्नलिखित नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई कर रहा है:
- बिना हेलमेट: ₹1,000 का जुर्माना और लाइसेंस निलंबन की संभावना।
- बिना इंश्योरेंस: ₹2,000 तक का जुर्माना या जेल।
- नाबालिग द्वारा ड्राइविंग: ₹25,000 का जुर्माना और अभिभावक को सजा।
- शराब पीकर वाहन चलाना: ₹10,000 का भारी जुर्माना।
कानूनी तौर पर चप्पल पहनकर गाड़ी चलाने पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ और परिवहन विभाग हमेशा बंद जूते पहनकर ही ड्राइविंग करने की सलाह देते हैं, अफवाहों से बचें और सुरक्षित सफर के लिए वास्तविक ट्रैफिक नियमों का पालन करें।















