
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने और जल संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए ‘खेत तालाब योजना’ को अब नया आयाम दे दिया है। पहले सिर्फ सिंचाई और मछली पालन तक सीमित यह योजना अब सिंघाड़ा, मखाना और मोती की खेती को भी शामिल कर चुकी है। योगी सरकार का यह कदम छोटे-सीमांत किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जहां ₹1,05,000 के तालाब पर ₹52,500 की सीधी सब्सिडी मिल रही है। जलवायु परिवर्तन के दौर में वर्षा जल संचयन के साथ वैकल्पिक फसलें किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं।
Table of Contents
योजना का नया स्वरूप और किसानों पर प्रभाव
पहले तालाब सिर्फ पानी जमा करने का साधन थे, लेकिन अब ये मुनाफे का खजाना बन गए हैं। सिंघाड़ा (water chestnut) और मोती पालन जैसे उत्पादों की मांग त्योहारों और ज्वेलरी बाजार में आसमान छू रही है। एक हेक्टेयर तालाब में 3-4 महीने में सिंघाड़े से 80-100 क्विंटल फल और ₹1 लाख का शुद्ध मुनाफा संभव है, जबकि लागत मात्र ₹50,000। वहीं, मीठे पानी की सीपों से मोती उत्पादन 12-24 महीनों में 40,000 मोती दे सकता है, जो ₹120-160 प्रति पीस बिकते हैं- कुल कमाई ₹12 लाख तक!
उत्तर प्रदेश के गंगा-यमुना मैदानों में भोजपुर मिट्टी और उष्णकटिबंधीय जलवायु सिंघाड़े के लिए आदर्श है। बिहार-यूपी के किसान पहले से इसकी खेती कर रहे हैं। मोती के लिए नवंबर-फरवरी में सीपों में बीज डालें, प्राकृतिक चारा दें- सरकारी ट्रेनिंग फ्री उपलब्ध। रामपुर जैसे जिलों में पायलट प्रोजेक्ट सफल हो चुके हैं, जहां तालाब से सिंचाई के साथ मछली-मोती का दोहरा लाभ मिला।
लागत-सब्सिडी का सरल गणित
एक मानक तालाब (1200 घन मीटर: 22m x 20m x 3m गहराई) की कुल लागत ₹1,05,000 है। सरकार 50% यानी ₹52,500 सब्सिडी देगी, बाकी ₹52,500 किसान वहन करेगा। छोटे तालाब (600 घन मीटर: 20m x 10m x 3m) पर ₹26,250 सब्सिडी, खासकर SC/ST, महिलाओं और सीमांत किसानों को प्राथमिकता। बुकिंग पर ₹1,000 टोकन मनी जमा करें। सब्सिडी DBT से दो किस्तों में बैंक खाते में।
| तालाब का आकार | कुल लागत (₹) | सब्सिडी (₹) | किसान हिस्सा (₹) |
|---|---|---|---|
| 1200 घन मी. | 1,05,000 | 52,500 | 52,500 |
| 600 घन मी. | 52,500 | 26,250 | 26,250 |
पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
लाभ के लिए कम से कम 0.5 हेक्टेयर जमीन, ड्रिप/स्प्रिंकलर सिस्टम और त्रिपक्षीय अनुबंध जरूरी। रजिस्टर्ड किसान, विशेषकर लघु-सीमांत वर्ग पात्र। आवेदन https://agridarshan.up.gov.in पर ऑनलाइन- रजिस्ट्रेशन, विवरण भरें, दस्तावेज अपलोड करें। CSC सेंटर से भी मदद लें।
कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं, “यह योजना भूजल रिचार्ज के साथ आय स्रोत बढ़ाएगी।” दिल्ली-NCR के पास यूपी किसानों के लिए आसान पहुंच। सफल किसान कहते हैं, “सिंघाड़ा से दीवाली पर लाखों कमाए।” यह योजना न सिर्फ किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देगी। जल्द आवेदन करें, मौका हाथ से न जाए!















